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जीएसटी रजिस्ट्रेशन रद्द कराने को अब नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार, जारी किए गए दिशा निर्देश
Mon, 22 Apr 2019 11:33 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 22 Apr 2019 11:33 AM IST
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हरियाणा में कारोबारियों को अब जीएसटी पंजीकरण रद्द करवाने के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि विभाग ने सुधार के लिए कमर कस ली है। आबकारी एवं कराधान विभाग अधिकारियों को लंबित मामलों का निपटान तेजी से करने के निर्देश दिए गए हैं। कारोबारियों को कोई दिक्कत न हो, इसके मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
जिन कारोबारियों ने पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन किए हुए हैं और उन्हें रिटर्न भरने के नोटिस मिले हैं, उनके संबंध में विभाग जल्दी दिशा-निर्देश जारी करने जा रहा है। आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि विभाग ने पंजीकरण रद्द करवाने के लिए आने वाले आवेदनों को निरस्त करने की प्रकिया में तेजी लाई है।
कुछ समय पहले जीएसटी के निरस्तीकरण प्रक्रिया के सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या आ गई थी। इसके चलते पंजीकरण रद्द कराने के बहुत सारे आवेदन लंबित हो गए थे, लेकिन अब इन्हें जल्दी निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
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जिन कारोबारियों ने पंजीकरण रद्द कराने के लिए आवेदन किए हुए हैं और उन्हें रिटर्न भरने के नोटिस मिले हैं, उनके संबंध में विभाग जल्दी दिशा-निर्देश जारी करने जा रहा है। आबकारी एवं कराधान विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि विभाग ने पंजीकरण रद्द करवाने के लिए आने वाले आवेदनों को निरस्त करने की प्रकिया में तेजी लाई है।
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कुछ समय पहले जीएसटी के निरस्तीकरण प्रक्रिया के सॉफ्टवेयर में कुछ समस्या आ गई थी। इसके चलते पंजीकरण रद्द कराने के बहुत सारे आवेदन लंबित हो गए थे, लेकिन अब इन्हें जल्दी निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।
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ऑनलाइन होने के कारण आ रहीं दिक्कतें
प्रवक्ता ने कहा कि पंजीकरण निरस्तीकरण की शक्तियां विभाग के जिला मुख्यालय और केंद्र सरकार के जीएसटी विभाग को मिली हुई हैं। साधारणतया जिन व्यापारियों ने निरस्तीकरण का आवेदन कर रखा है, उनको रिटर्न न भरने के कारण नोटिस नहीं दिए जाते। फिर भी अगर कुछ नोटिस जारी हुए हैं तो विभाग इसमें जरूरी दिशा निर्देश जारी करेगा।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि जीएसटी कानून पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत (ऑनलाइन) है। इसके चलते इसके निर्वहन में थोड़ी-बहुत दिक्कतें आना स्वभाविक है। लेकिन जीएसटी काउंसिल अथवा जीएसटी परिपालन कमेटी (जीआईसी) तुरंत संज्ञान लेते हुए व्यावहारिक निपटान करवाती हैं। इसी कड़ी में अनेक मुख्य फैसले लिए गए हैं। भविष्य में भी अनेक हितकारी कदम कारोबारियों के लिए उठाने की योजना है।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि जीएसटी कानून पूर्ण रूप से कंप्यूटरीकृत (ऑनलाइन) है। इसके चलते इसके निर्वहन में थोड़ी-बहुत दिक्कतें आना स्वभाविक है। लेकिन जीएसटी काउंसिल अथवा जीएसटी परिपालन कमेटी (जीआईसी) तुरंत संज्ञान लेते हुए व्यावहारिक निपटान करवाती हैं। इसी कड़ी में अनेक मुख्य फैसले लिए गए हैं। भविष्य में भी अनेक हितकारी कदम कारोबारियों के लिए उठाने की योजना है।
कारोबारियों केलिए विभाग ने उठाए अनेक अहम कदम
. रिटर्न फाइल करते हुए पोर्टल पर आई दिक्कतों को दूर करने के लिए समय पर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाना
. रिटर्नों का सरलीकरण
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के व्यापारी जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये, उन्हें मासिक रिटर्न के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न फाइल करने का प्रावधान
. छोटे एवं लघु स्तर के व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल द्वारा अनिवार्य टर्नओवर लिमिट को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये किया
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए कंपोजीशन योजना के तहत टर्नओवर लिमिट 1.5 करोड़ रुपये किया
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के सर्विस सेक्टर के व्यापारियों के लिए 50 लाख रुपये के कारोबार पर भी कंपोजीशन योजना
. रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के आवेदन उपरांत व्यापारी का रजिस्ट्रेशन निलंबित करने का प्रावधान।
. रिटर्नों का सरलीकरण
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के व्यापारी जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये, उन्हें मासिक रिटर्न के स्थान पर त्रैमासिक रिटर्न फाइल करने का प्रावधान
. छोटे एवं लघु स्तर के व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल द्वारा अनिवार्य टर्नओवर लिमिट को 20 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये किया
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए कंपोजीशन योजना के तहत टर्नओवर लिमिट 1.5 करोड़ रुपये किया
. छोटे, लघु एवं मध्यम स्तर के सर्विस सेक्टर के व्यापारियों के लिए 50 लाख रुपये के कारोबार पर भी कंपोजीशन योजना
. रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के आवेदन उपरांत व्यापारी का रजिस्ट्रेशन निलंबित करने का प्रावधान।