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पर्यटकों को आखिर कैसे रिझाए मेहमान परिंदों का डेरा
गुरदासपुर ।
Updated Wed, 29 Oct 2014 11:01 PM IST
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केशोपुर छंब आज उपेक्षा का शिकार है। ऐसे में सवाल है कि अपने नैसर्गिक सौन्दर्य के बावजूद आखिर यह पर्यटकों को रिझाए भी तो कैसे? ठंड के दिनों में विदेशी पक्षियों के प्रवास के दौरान आकर्षण का केंद्र इस छंब की सुंदरता में चार चांद लगाने की कवायद तो आठ साल पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन बाद में सारी कवायद ठंडे बस्ते में डाल दी गईं। दिलचस्प बात यह है कि इसे सूबे में पर्यटन के विकास के लिहाज से खुद प्रदेश सरकार ने ही कम्यूनिटी रिजर्व छंब घोषित किया था।
जिला मुख्यालय से करीब पांच से छह किलोमीटर दूर बहरामपुर सड़क पर स्थित लगभग 800 एकड़ क्षेत्रफल में फैले केशोपुर छंब के बारे में कहा जाता है कि यहां कभी महाराजा रणजीत सिंह भी शिकार के लिए आते थे। ठंड के दिनों में आज भी यह स्थान विभिन्न प्रजातियों के साइबेरियन या अन्य विदेशी पक्षियों का डेरा बन जाता है। यह पक्षि इस स्थान की शोभा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अफसोस की बात यह है कि उचित देखभाल के अभाव में आज इसका क्षेत्रफल सिमटता जा रहा है।
सिमट रहा क्षेत्रफल :
पूर्व में जिले के डीसी रहे एसके संधु ने छंब को विकसित करने के लिए योजना तैयार कर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। इस पहल के आठ साल गुजर जाने के बाद फिर कोई कदम नहीं उठाया जा सका। आज स्थिति यह है कि छंब क्षेत्र में अवैध कब्जे का क्रम जारी है। यहां पानी कम होने की स्थिति में लोगों ने यहां काश्त करने के अलावा मछली पालन करना भी शुरू कर दिया।
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इसी का नजीता है कि हाल के कुछ वर्षों में यहां प्रवासी पक्षियों के आगमन की संख्या में भी कमी आई है। काबिलेगौर है कि करीब चार साल पूर्व एशिया बैंक से संबंधित दिल्ली से आई एक टीम ने भी यहां का मुआयना किया था।
टीम की ओर से इस स्थान के सौन्दर्यीकरण पर आने वाली लागत का ब्यौरा तैयार तो किया गया, लेकिन इस बार भी मामला ठप पड़ गया। मामले में जिलाधीश गुरदासपुर डा.अभिनव त्रिखा का कहना है कि छंब को विकसित करने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को गाइड के तौर पर नियुक्त किया गया है।
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जिला मुख्यालय से करीब पांच से छह किलोमीटर दूर बहरामपुर सड़क पर स्थित लगभग 800 एकड़ क्षेत्रफल में फैले केशोपुर छंब के बारे में कहा जाता है कि यहां कभी महाराजा रणजीत सिंह भी शिकार के लिए आते थे। ठंड के दिनों में आज भी यह स्थान विभिन्न प्रजातियों के साइबेरियन या अन्य विदेशी पक्षियों का डेरा बन जाता है। यह पक्षि इस स्थान की शोभा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। अफसोस की बात यह है कि उचित देखभाल के अभाव में आज इसका क्षेत्रफल सिमटता जा रहा है।
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सिमट रहा क्षेत्रफल :
पूर्व में जिले के डीसी रहे एसके संधु ने छंब को विकसित करने के लिए योजना तैयार कर इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी थी। इस पहल के आठ साल गुजर जाने के बाद फिर कोई कदम नहीं उठाया जा सका। आज स्थिति यह है कि छंब क्षेत्र में अवैध कब्जे का क्रम जारी है। यहां पानी कम होने की स्थिति में लोगों ने यहां काश्त करने के अलावा मछली पालन करना भी शुरू कर दिया।
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इसी का नजीता है कि हाल के कुछ वर्षों में यहां प्रवासी पक्षियों के आगमन की संख्या में भी कमी आई है। काबिलेगौर है कि करीब चार साल पूर्व एशिया बैंक से संबंधित दिल्ली से आई एक टीम ने भी यहां का मुआयना किया था।
टीम की ओर से इस स्थान के सौन्दर्यीकरण पर आने वाली लागत का ब्यौरा तैयार तो किया गया, लेकिन इस बार भी मामला ठप पड़ गया। मामले में जिलाधीश गुरदासपुर डा.अभिनव त्रिखा का कहना है कि छंब को विकसित करने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए स्थानीय युवाओं को गाइड के तौर पर नियुक्त किया गया है।