एक नजर में, पंजाब में 2014 की 15 बड़ी घटनाएं
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के संस्थापक आशुतोष महाराज 28 जनवरी की रात करीब साढ़े बारह बजे समाधि में लीन हो गए। नूरमहल स्थित महाराज आशुतोष जी के डेरे से मिली जानकारी के मुताबिक रात करीब ढाई बजे डॉक्टरों ने उन्हें चेक किया और कहा कि महाराज आशुतोष जी समाधि में चले गए हैं।
उनकी नब्ज व दिल की धड़कन गायब थी। मामले में तब विवाद खड़ा हो गया जब नूर महल निवासी पुरण सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने आशुतोष महाराज को गैर कानूनी रूप से बंधक बनाकर रखा है और उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं।
इसके बाद दरभंगा बिहार के लखनौर गांव के रहने वाले दिलीप झा ने खुद को आशुतोष महाराज का बेटा और वारिस बताते हुए शव हासिल करने और दाह संस्कार की इजाजत मांगी। कई सुनवाई और जांच के बाद हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2014 को पंजाब सरकार को 15 दिन में दाह संस्कार करने का आदेश दे दिया।
इसके बाद में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका में हाईकोर्ट की डबल बेंच ने दाह संस्कार करने पर रोक लगा दी। मामला अब भी पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में चल रहा है।
अरबों के ड्रग्स रैकेट में मंत्री शामिल
8 जनवरी 2014: बनूड़ पुलिस द्वारा पकड़े गए अरबों के ड्रग्स रैकेट के मुख्य आरोपी जगदीश भोला ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाए। नवंबर 2013 नवंबर में गिरफ्तार आरोपी सरगना जगदीश भोला पंजाब पुलिस का निलंबित डीएसपी है।
भोला के खुलासे के आधार पर अमृतसर के व्यवसायी बिट्टू औलख और जगजीत सिंह चहल को भी गिरफ्तार किया गया। भोला ने आरोप लगाया कि ड्रग्स रैकेट में पंजाब के केबिनेट मंत्री मजीठिया शामिल हैं। वही सारे रैकेट का मास्टर माइंड है।
मजीठिया पर इस सनसनीखेज आरोप के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई। पंजाब के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के साले और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं। कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों ने इस मुदृदे को लोकसभा चुनाव में अपना प्रमुख चुनावी हथियार बनाया।
अब हवाला और ड्रग्स रैकेट केस में मजीठिया पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा और कस गया है। ईडी ने उन्हें 26 दिसंबर को हाजिर होने का समन भेजा है। ड्रग्स तस्करी का धंधा केवल पंजाब में ही 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का आंका जा रहा है।
कुएं से मिले 122 शहीदों के अस्थि पिंजर
1 मार्च 2014: अमृतसर की तहसील अजनाला में कुएं में दफन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के 282 शहीदों की अस्थियों निकालने के लिए शुरू की गई खुदाई में 122 शहीदों की अस्थियां कुएं की खुदाई का काम इस कुएं पर शोध करने वालों इतिहासकारों और गुरुद्वारा शहीदगंज-शहीदांवाला खूह कमेटी द्वारा सुयंक्त रूप से कराया गया।
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में विद्रोह करने वाले 282 भारतीय सैनिकों की हत्या कर अंग्रेजों ने अजनाला के एक कुएं में फेंक दिया था। इनमें 45 सैनिकों को जिंदा ही कुएं में दफन किया गया था। शोधकर्ता सुरिंदर कोछड़ के अनुसार, 30 जुलाई, 1857 को लाहौर की मियां मीर छावनी से ईस्ट इंडिया कंपनी से बगावत करके बंगाल नेटिव इनफेंटरी की 26 रेजीमेंट के करीब 500 निहत्थे हिंदुस्तानी सिपाही भाग कर अजनाला में दरिया रावी के पास पहुंच गए थे।
वहां गांव के लोगों की मुखबरी पर ब्रिटिश सेना ने उनमें से 218 सिपाहियों की गोली मारकर हत्या कर दी जबकि शेष 282 सैनिकों को अमृतसर का डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हेनरी कूपर रस्सियों से बांधकर अजनाला ले आया।
अगली सुबह एक अगस्त को बकरीद के दिन थाने में बंद 282 सैनिकों में से 237 को गोली मारकर कुएं में फेंककर कुएं को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया। नरसंहार के 157 वर्ष बीत जाने के बाद शहीदों की अस्थियों को अगस्त 2014 सुबह साढ़े 10 बजे कनखल हरिद्वार के सती घाट पर देशभक्ति के नारों के बीच गंगा में प्रवाहित किया गया।
मोदी हटाओ...मोदी हटाओ...कहते हुए दे दी जान
मई 2014: कस्बा अजीतवाल में जहानाबाद (बिहार) का मूल निवासी मजदूर श्याम कुमार यादव (20) पुत्र डिंगल यादव रविवार सुबह करीब ढाई बजे कोकरी कलां सड़क के पास बिजली के 132 केवी वाली लाइन के लगभग सौ फुट ऊंचे टावर पर चढ़ गया।
इसका पता आसपास खेतों में रहते लोगों को लगा तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। डीएसपी गुरमीत सिंह, थाना प्रभारी राजेश कुमार मौके पर पहुंचे और उसे नीचे उतरने को कहा। लेकिन श्याम कुमार ने नीचे आने से मना कर दिया। युवक लालू को लाओ और मोदी को हटाओ की बात पर अड़ा हुआ था।
उसने लोगों को और पुलिस को चेतावनी दी कि अगर उसे टावर पर चढ़कर बचाने की कोशिश की गई तो वह छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेगा। पुलिस ने काफी आग्रह किया, लेकिन वह नहीं माना। इस पर पुलिस ने किसी अनहोनी की आशंका से फायर ब्रिगेड की गाड़ी को भी मौके पर बुला लिया।
टावर पर श्याम को नीचे उतारने के लिए कोई पुख्ता प्रबंध न होने के चलते जब पुलिस और पावरकॉम के मुलाजिम टॉवर पर चढ़ने लगे तो सुबह करीब साढ़े सात बजे श्याम टावर से हटकर लाइनों से लटक गया और पांच-सात मिनट लाइनों से लटकते रहने के बाद उसने नीचे छलांग लगा दी।
उसकी मौके पर ही मौत हो गई। थाना अजीतवाल पुलिस के प्रभारी राजेश कुमार ने बताया कि पुलिस की ओर से धारा 174 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
भगत सिंह की बहन को 25 साल बाद इंसाफ
12-May 2014: शहीद-ए-आजम भगत सिंह की बहन 98 वर्षीय प्रकाश कौर के दामाद के भाई कुलजीत सिंह के फर्जी एनकाउंटर में मारे जाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल कैद और दो लाख दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम आर जोशी की अदालत ने 12 मई को फैसला सुनाते हुए दसूहा में तत्कालीन डीएसपी रहे जसपाल सिंह, रिटायर्ड आईजी व तत्कालीन एसपी (ऑपरेशन) एसपीएस बसरा और तत्कालीन गढ़दीवाला चौकी इंचार्ज सीता राम को दोषी करार दे दिया। हायक जिला अटार्नी टीएस गरेवाल ने बताया कि अदालत ने तीनों को ही धारा 364 के तहत दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसी तरह धारा 120 बी के तहत भी उन्हें दोषी करार देते हुए पांच साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। साथ ही अदालत ने धारा 218 के तहत उन्हें दोषी करार देते हुए दो साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। तीनों सजाएं एक साथ चलेंगी। मामले के दो आरोपियों सरदूल सिंपाह और एएस संधू की पहले ही मौत हो चुकी है। कुलजीत सिंह निवासी अंबाला जट्टां को 23 जुलाई, 1989 में होशियारपुर पुलिस ने अगवा करके कैद कर लिया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि कुलजीत सिंह का संबंध आतंकवादियों से था।
पुलिस के अनुसार जब कुलजीत सिंह को हथियारों की बरामदगी के लिए ले जाया जा रहा था तो वह ब्यास दरिया में कूदकर भाग गया था मामले के चश्मदीद गवाह प्यारा सिंह की मौत हो चुकी है और अन्य दो गवाह गुरमेल सिंह व गुरमीत सिंह की आयु अब 90 साल के करीब जा पहुंची है।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से नौ सितंबर, 1990 में रिटा. जस्टिस एचएल रणदेव की अध्यक्षता में गठित न्यायिक कमीशन की ओर से 1993 में सौंपी रिपोर्ट के बाद तत्कालीन एसपी ऑपरेशन एसपीएस बसरा, दसूहा के तत्कालीन एसएचओ जसपाल सिंह व गढ़दीवाला चौकी के इंचार्ज सीता राम को अदालत के आदेशों के बाद गिरफ्तार किया गया था।
मोदी लहर से अछूता रहा पंजाब, दिग्गज हारे
लोकसभा चुनाव में जहां देश भर में मोदी की लहर का असर दिखा, वहीं पंजाब का नजारा इससे कुछ हटकर रहा। पंजाब जहां दिग्गजों की पराजय स्थली बना, वहीं चुनावी परिणाम आम आदमी पार्टी के लिए भी राहत लेकर आया।
आप ने पंजाब की 13 में से चार लोकसभा सीटें जीतकर सबको चौंकाते हुए, जबरदस्त उपस्थिति दर्ज करवाई। बाकी नौ सीटों में से चार शिअद, तीन कांग्रेस और दो भाजपा की झोली में गईं। प्रदेश से हार का मुंह देखने वाले दिग्गजों में अमृतसर से भाजपा के अरुण जेटली, गुरदासपुर से पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा, आनंदपुर साहिब से कांग्रेस की अंबिका सोनी, पटियाला से कांग्रेस की परनीत कौर, फिरोजपुर से पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता चौ. सुनील जाखड़, बठिंडा से कांग्रेस के मनप्रीत सिंह बादल (पीपीपी अध्यक्ष) और संगरूर से शिअद के सुखदेव सिंह ढींढसा शामिल हैं।
जीतने वाले दिग्गजों में शिअद अध्यक्ष व पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर बादल और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह शामिल हैं। बेशक देशभर में पार्टी को मिली बड़ी जीत के कारण पंजाब भाजपा में जश्न का माहौल था। फिर भी अरुण जेटली की हार का दर्द पार्टी कार्यकर्ताओं की खुशी पर भारी पड़ता दिखाई दिया।
स्वर्ण मंदिर में खूनी संघर्ष
06-Jun 2014: अमृतसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर दो गुटों में जमकर तलवारें चलीं। अकाली दल मान के समर्थक और एसजीपीसी की टास्क फोर्स के कर्मचारियों में हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में एक महिला श्रद्धालु समेत 12 लोग घायल हो गए।
संघर्ष अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह द्वारा अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष सिमरन जीत सिंह मान को बोलने के लिए माइक न देने पर हुआ। एक तरफ टास्क फोर्स के कर्मचारी थे, दूसरी तरफ रेडिकल ग्रुप्स यानी अकाली दल, सिख स्टूडेंट फेडरेशन, सिख यूथ फेडरेशन भिंडरावाला और दल खालसा के लोग थे। दोनों गुटों में जमकर संघर्ष हुआ।
धक्का-मुक्की हुई और कुछ सिख सदस्यों की पगड़ियां तक उतार दी गईं। संघर्ष दो बार हुआ। सुबह कार्यक्रम के दौरान, उसके बाद दोपहर में 12 बजे के करीब। संघर्ष के बाद रेडिकल ग्रुप के युवा सदस्यों ने अकाल तख्त पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। शहर भर में विरोध प्रदर्शन किया और दुकानें बंद करा दीं।
इस मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 5 युवकों को हिरासत में ले लिया। इस मामले में अमृतसर की थाना ई डिवीजन पुलिस ने देर शाम तक 28 आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर 21 आरोपियों को गिरफ्तार किया। अकाल तख्त और सरकार ने घटना की जांच के आदेश दे दिए।
हत्यारों को मिली सजा तो छलक पड़ी आंखें
08-Aug: पंजाब के अमृतसर में एएसआई रविंदरवाल सिंह के हत्यारे को अदालत ने मौत तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोषी रणजीत सिंह उर्फ राणा, बिक्रम ओहरी, धर्मजीत सिंह, गुरबीर सिंह और संदीप रामपाल को जज हरप्रीत कौर रंधावा ने सजा सुनाई।
एएसआई को 2012 में बीच राह गोली मारी गई थी। एएसआई की हत्या मामले में सरकारी वकील आरके सलवान की ओर से कुल 27 गवाह पेश किए गए थे। इनमें मुख्य गवाही एएसआई की बेटी रोबिनजीत कौर की रही है। जिसकी आंखों के सामने उसके पिता को गोली मारी गई थी।
इसके अलावा पुलिस कर्मियों और संबंधित इलाके के लोगों ने भी गवाही दी। हालांकि रविंदरपाल की बेटी रोबिनजीत और पत्नी परमजीत कौर ने इस फैसले से असंतुष्टि जताते हुए दोषियों को फांसी की सजा दिलवाने के लिए हाईकोर्ट जाने की बात कही है। पीड़ित परिवार के अनुसार राणा ने उनके हंसते-खेलते हुए परिवार को उजाड़ दिया।
एएसआई रविंदरपाल सिंह की हत्या के मामले ने काफी तुल पकड़ लिया था। आम जनता से सियासी नेता तक सड़कों पर उतर गए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री बादल ने पीड़ित परिवार से मिल दुख जताया और रोबिनजीत को सब इंस्पेक्टर भर्ती करने के आर्डर दिए बाद में नायब तहसीलदार के नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे।
लुधियाना पुलिस मुठभेड़ का सच
28 सितंबर 2014: हत्या के प्रयास में नामजद आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए गई थाना माछीवाड़ा की पुलिस टीम की फायरिंग में दो सगे भाइयों की मौत हो गई। दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जबकि एक आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो गया।
घटना जमालपुर की आहलुवालिया कॉलोनी की है। मुठभेड़ में मारे गए युवकों की पहचान माछीवाड़ा के गांव गोवापुर निवासी जतिंदर और हरिंदर सिंह के रूप में हुई। वहीं काबू किए गए युवकों की पहचान पुलिस ने उजागर नहीं की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दोनों को इतने करीब से गोलियां मारी गईं कि अधिकतर गोलियां शरीर के आरपार निकल गईं।
पुलिस ने मामले को पहले मुठभेड़ बताया लेकिन बात बिगड़ने पर गांव तखरां की सरपंच के पति गुरजीत सिंह और थाना माछीवाड़ा में तैनात तीन कांस्टेबलों पर हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। वहीं थाना माछीवाड़ा के एसएचओ मनिंदरजीत सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उधर, धार्मिक समागम में हिस्सा लेने लुधियाना के किचलू नगर पहुंचे मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने शनिवार को उक्त वारदात की पूरी रिपोर्ट तलब की।
यो यो हनी सिंह की किडनैपिंग की साजिश
22 अक्टूबर 2014: पंजाब पुलिस ने स्टार गायक यो यो हनी सिंह को किडनैप करने की साजिश रच रहे गिरोह का पर्दाफाश किया है। फरीदकोट पुलिस ने विदेशी हथियारों के अवैध कारोबार से जुड़े दो आरोपियों को सोमवार रात एक मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया।
इनकी पहचान गांव सूरघूरी निवासी परमपाल सिंह पाला और डोगर बस्ती निवासी लक्शदीप सिंह लक्श के रूप में हुई जबकि उनका एक साथी डोगर बस्ती निवासी गुरचरण सिंह रिंका फरार होने में सफल रहा। इनकी गिरफ्तारी से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि गिरफ्तारी आरोपी पंजाबी गायक यो यो हनी सिंह का अपहरण करने की योजना बना रहे थे।
मंगलवार को एसएसपी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बठिंडा जोन के आईजी परमराज सिंह उमरानंगल ने बताया कि करीब 15 दिन पहले कोटकपूरा में एक गन हाउस से हथियारों की बड़ी खेप चुराई गई थी। इस केस की पड़ताल के दौरान ही जिला पुलिस को विदेशी हथियारों के अवैध कारोबार करने वाले गिरोह का सुराग मिला।
किडनैप के बाद मेहरम की हत्या
Nov 2014: पंजाब के मोहाली से कुछ दिन पहले फेज 9 से लापता हुए बच्चे मेहरम का शव सेक्टर 69 में कूड़ेदान के पास मिला। सेक्टर 69 में रखे कूड़ादान में कूड़ा डालने आए व्यक्ति ने मिट्टी में एक शूज निकला हुआ देखा। किसी अनहोनी की आशंका से उसने तुरंत पुलिस को फोन किया।
जिला पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच की। पुलिस ने मेहरम के परिजनों को शिनाख्त के लिए बुलाया। चेहरा गला होने के कारण शुरूआत में शव की पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने मौक पर चिकित्सकों की टीम को भी बुलाया, जिन्होंने चिकित्सीय जांच में शव की पहचान की।
गत 27 अक्तूबर को फेज-9 में पार्क से एक छह वर्षीय बच्चा अगवा हो गया था। बच्चे की मां ने बच्चे के दादा पर ही उसे किडनैप करने का अंदेशा जताया था। बच्चे की मां ने हरिंदर कौर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि बच्चे का पिता ऑस्ट्रेलिया में रहता है, जबकि उसके ससुर खरड़ में रहते हैं।
महरम फेज-11 के नामी प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था। मंगलवार शाम सवा छह बजे के करीब महरम पार्क में खेलते समय अचानक लापता हो गया। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने केस को सुलझाने का दावा किया। 6 वर्षीय मेहरम का कातिल उसका करीबी पड़ोसी ही निकला। कातिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। कातिल का नाम तेजिंदर बताया जा रहा है। वह पेशे से कार ड्राइवर है और मेहरम के घर के सामने वाले घर में रहता था। आईजी पटियाला ने केस सुलझने की पुष्टि कर दी है।
अस्पताल में 5 नवजातों की मौत पर बवाल
24 नवंबर 2014: 21 नवंबर को खुले मदर-चाइल्ड केयर अस्पताल में रविवार को डिलीवरी के दौरान 5 नवजातों की मौत हो गई। इससे भड़के परिजनों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को लास्ट स्टेज पर लाया गया था। घटना पंजाब के लुधियाना की है।
सेहतमंत्री सुरजीत कुमार ज्याणी ने 21 नवंबर को सौ बेड के जच्चा बच्चा अस्पताल का उद्घाटन करते समय आधुनिक सेहत सुविधाएं देने का दावा किया था, लेकिन उनके दावे पहले ही झटके में खोखले साबित हो गए। रविवार को अस्पताल में चार बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया। अगले दिन एक और बच्चे की जान चली गई।
अस्पताल में दाखिल सभी मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में किसी तरह की कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल के डॉक्टर इलाज में काफी कोताही इस्तेमाल करते हैं। परिजनों के हंगामे की सूचना मिलने के बाद थाना डिवीजन दो की पुलिस मौके पर पहुंच गई। हंगामा बढ़ने से पहले ही पुलिस ने वहां की स्थिति पर काबू पा लिया। पुलिस ने मरीजों के परिजनों को समझाया और घर भेजा।
वहीं सिविल अस्पताल में तैनात गायनोकोलोजिस्ट डॉ. अलका मित्तल ने मरीजों के परिजनों द्वारा लगाए आरोपों को बेबुनियाद बताया।
देखिए, जो रोशनी बढ़ाने चले थे वो आंखें गंवा बैठे
05-Dec-14: नेत्र शिविर में ऑपरेशन कराने वाले 60 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई। यह दर्दनाक हादसा अमृतसर के गुरदासपुर के गांव घुमान में हुआ। गांव घुमान में बीते सप्ताह आयोजित नेत्र शिविर में ऑपरेशन कराने वाले 60 मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई।
वीरवार को मामले का खुलासा होने पर जिला प्रशासन की ओर से सभी मरीज अमृतसर के ईएनटी अस्पताल ले जाए गए। जांच में खुलासा हुआ कि सभी के ऑपरेशन में लापरवाही बरती गई है। बताया जाता है कि कुछ मरीजों की रेटिना तक निकाल ली गई। मामले की जानकारी मिलते ही डीसी, सिविल सर्जन समेत उच्चाधिकारी ईएनटी अस्पताल पहुंचे।
नेत्र शिविर को लगाने के लिए किसी जिम्मेदार अधिकारी से इजाजत नहीं ली गई थी। एक एनजीओ द्वारा आयोजित इस शिविर में जिले के अजनाला सेक्टर के गग्गो महल गांव के 16 लोगों ने आपरेशन कराया। बाकी 44 मरीज गुरदासपुर जिले के थे। आपरेशन के बाद 60 मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती गई।
कुछ मरीजों की आंखों से पानी तो कुछ मरीजों की आंखों से खून निकलने लगा। इसके बाद गग्गोवाल निवासी मरीजों के परिजनों ने मामले की जानकारी जिला प्रशासन को दी। इससे अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन सभी को अमृतसर ईएनटी अस्पताल लाया गया। डॉक्टर राजीव भल्ला, सिविल सर्जन, अमृतसर ने बताया कि गग्गो महल के 16 लोगों समेत 60 लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा चुकी है।
हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। दोनों गांवों में किसी एनजीओ की ओर से नेत्र शिविर लगाने की अनुमति नहीं लेने की जानकारी मिली है। मामले में आपराधिक धाराओं में केस दर्ज कराया जाएगा। रवि भगत, उपायुक्त, अमृतसर ने बताया कि सभी मरीजों को ईएनटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डा. करमजीत सिंह सभी की जांच कर रहे हैं। मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
आमिर खान की PK पर पंजाब में बवाल
23-Dec-14: आमिर खान की बहुचर्चित फिल्म 'PK' पर पंजाब के लुधियाना में बवाल हो गया। हिंदू संयुक्त मोर्चा और हिंदू न्याय पीठ ने बॉलीवुड फिल्म पीके के विरोध में मंगलवार को जमकर रोष प्रदर्शन किया। हिंदू संगठनों ने लुधियाना-फिरोजपुर रोड पर आरती चौक में धरना देकर जाम किया।
इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। फिल्म पीके में हुए देवी-देवताओं के अपमान के विरोध में हिंदू संयुक्त मोर्चा व हिंदू न्याय पीठ के नेतृत्व में शहर की कई संस्थाओं शिव सेना, पंजाब हिंदू सिख जागृति सेना, हिंदू मोर्चा, बजरंग दल, शिवरात्रि महोत्सव कमेटी, शिव सेना बाल ठाकरे, युवा जागृति मंच, शिव वेलफेयर सोसाइटी और शिव मंदिर ट्रस्ट संस्थाओं से जुड़े लोगों ने अपना रोष प्रकट किया।
नेताओं ने केंद्र सरकार से समाज की भावनाओं का ख्याल रखते अलग से हिंदू सेंसर बोर्ड बनाने की मांग की। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि बुधवार सुबह तक आपत्तिजनक डायलॉग न निकाले गए तो मॉल में घुसकर फिल्म को बंद करवाएंगे। इसके लिए बुधवार को संगला वाला शिवाला में मीटिंग बुलाई गई है।
पंजाब के शिंगार बम कांड में बड़ा फैसला
17 दिसंबर 2014: शिंगार सिनेमा में 14 अक्तूबर 2007 को हुए बम कांड में अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया। एडिशनल सेशन जज हरी सिंह गरेवाल की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
शिंगार बम कांड में हरमिंदर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रविंदर सिंह और संदीप सिंह के खिलाफ केस चलाया गया था। 2013 में संदीप सिंह की जेल में ही मौत हो गई थी। तीन आरोपियों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया।
बचाव पक्ष के वकील गुरमीत सिंह रत्तू ने कहा कि शिंगार सिनेमा में बम धमाका एक ब्लाइंड केस था। पुलिस ने घटना के करीब एक माह बाद चार गवाह खड़े किए और उनके बयानों के आधार पर 12 नवंबर को रविंदर सिंह और हरमिंदर सिंह को नामजद कर लिया। इसके बाद 15 नवंबर को संदीप और गुरप्रीत को नामजद किया गया। रत्तू ने कहा कि इस केस में सिर्फ रविंदर रिंकू से 250 ग्राम आरडीएक्स बरामद किया गया था।
गुरमीत के अनुसार गवाहों ने पहले आरोपियों की शिनाख्त की, लेकिन जिरह में वे टिक नहीं पाए। इसके अलावा किसी भी जख्मी ने आरोपियों को बम रखते हुए नहीं देखा। इस केस में सरकारी पक्ष की तरफ से 43 और बचाव पक्ष की तरफ से 13 लोगों की गवाही हुई। इस मामले में बहस 11 दिसंबर 2014 को पूरी हो गई थी।14 अक्तूबर 2007 को ईद के दिन शिंगार सिनेमा में इंटरवल के पांच सात मिनट बाद ही देर शाम करीब 8.35 बजे हॉल के अंदर जोरदार धमाका हुआ। इस विस्फोट में छह लोगों की जान गई थी और 38 लोग जख्मी हुए थे।