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टायलेट ब्लाक मामले में यूटी के गृह सचिव और एमसी के तत्कालीन अफसरों को नोटिस
ब्यूरो/अमर उजाला/चंडीगढ़
Updated Tue, 04 Oct 2016 10:10 PM IST
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कोर्ट
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चंडीगढ़ के विभिन्न कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में टायलेट ब्लॉक पर विज्ञापन लगाने वाली कंपनी की ओर से म्युनिसिपल कारपोरेशन के लाखों रुपये हजम कर जाने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के गृह सचिव, सीबीआई के दिल्ली व चंडीगढ़ में तैनात उच्चाधिकारियों, चंडीगढ़ एमसी के तत्कालीन सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दीवान, एसआर अग्रवाल, चीफ इंजीनियर एसके बंसल और सेलवेल कंपनी के जीएम बिश्वदीप दत्ता को 16 नवंबर के लिए नोटिस जारी करने के साथ ही सीबीआई को इस मामले में अब तक की गई जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं।
सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापन लगाने वाली कंपनी तक्ष मीडिया के निदेशक अशोक कुमार मनुजा की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण को लेकर सीबीआई द्वारा 9 दिसंबर, 2014 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत पुलिस स्टेशन सीबीआई/एसीबी चंडीगढ़ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर संख्या आरसीसीएचजी2014ए0021 पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सीबीआई को एफआईआर पर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई और चंडीगढ़ प्रशासन के आला अफसर इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं और जानबूझकर जांच कार्य में ढिलाई बरत रहे हैं, जबकि चंडीगढ़ एमसी के तत्कालीन अधिकारी, जिन्हें याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है, इस मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
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यह है मामला
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2007 के दौरान चंडीगढ़ में विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर 40 और 46 टायलेट ब्लाक की मरम्मत के दो अलग-अलग टेंडर एमसी ने जारी किए थे। इसके बाद 40 टायलेट ब्लाक के काम को दो भागों में विभाजित कर जारी किया गया। भाग-एक के तहत टायलेट ब्लाक की दीवारों पर विज्ञापन लगाने का काम किया जाना था, जबकि भाग-दो के तहत कनेक्टिंग पैसेज में विज्ञापन लगाए जाने थे।
इससे चंडीगढ़ एमसी को पांच साल तक हर महीने प्रति टायलेट 500 रुपये मिलने थे यानी एमसी को इस उपक्रम से अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होना था, लेकिन चंडीगढ़ एमसी के अधिकारियों की साठगांठ से सेलवेल कंपनी को अलॉट किए गए प्रोजेक्ट में कंपनी ने टायलेट ब्लाक पर विज्ञापन लगाने वाली अन्य कंपनियों से तो पैसा लिया, लेकिन उसे एमसी को नहीं चुकाया। नवंबर 2014 में कंपनी को 9 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करवाने के आदेश भी जारी किए थे। आखिरकार, इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी।
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सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापन लगाने वाली कंपनी तक्ष मीडिया के निदेशक अशोक कुमार मनुजा की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि इस पूरे प्रकरण को लेकर सीबीआई द्वारा 9 दिसंबर, 2014 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 के तहत पुलिस स्टेशन सीबीआई/एसीबी चंडीगढ़ द्वारा दर्ज की गई एफआईआर संख्या आरसीसीएचजी2014ए0021 पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सीबीआई को एफआईआर पर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए जाएं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई और चंडीगढ़ प्रशासन के आला अफसर इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहे हैं और जानबूझकर जांच कार्य में ढिलाई बरत रहे हैं, जबकि चंडीगढ़ एमसी के तत्कालीन अधिकारी, जिन्हें याचिका में प्रतिवादी बनाया गया है, इस मामले को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
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यह है मामला
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2007 के दौरान चंडीगढ़ में विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर 40 और 46 टायलेट ब्लाक की मरम्मत के दो अलग-अलग टेंडर एमसी ने जारी किए थे। इसके बाद 40 टायलेट ब्लाक के काम को दो भागों में विभाजित कर जारी किया गया। भाग-एक के तहत टायलेट ब्लाक की दीवारों पर विज्ञापन लगाने का काम किया जाना था, जबकि भाग-दो के तहत कनेक्टिंग पैसेज में विज्ञापन लगाए जाने थे।
इससे चंडीगढ़ एमसी को पांच साल तक हर महीने प्रति टायलेट 500 रुपये मिलने थे यानी एमसी को इस उपक्रम से अच्छा खासा राजस्व प्राप्त होना था, लेकिन चंडीगढ़ एमसी के अधिकारियों की साठगांठ से सेलवेल कंपनी को अलॉट किए गए प्रोजेक्ट में कंपनी ने टायलेट ब्लाक पर विज्ञापन लगाने वाली अन्य कंपनियों से तो पैसा लिया, लेकिन उसे एमसी को नहीं चुकाया। नवंबर 2014 में कंपनी को 9 करोड़ से ज्यादा राशि जमा करवाने के आदेश भी जारी किए थे। आखिरकार, इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई ने कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली थी।