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राहतः तीन साल पुराने रिश्वत केस में पूर्व इंस्पेक्टर जसविंदर कौर के खिलाफ नहीं चलेगा मुकदमा
Thu, 06 Aug 2020 11:21 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2020 11:21 AM IST
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फाइल फोटो
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तीन साल पुराने रिश्वत के एक मामले में मनीमाजरा थाने की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर को राहत मिल गई है। चंडीगढ़ पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई अदालत ने जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने से मना कर दिया है।
अदालत ने कहा कि इस मामले के सक्षम प्राधिकारी ने जसविंदर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना किया है। ऐसी स्थिति में अदालत मामले में संज्ञान नहीं ले सकती। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि चंडीगढ़ डीआईजी की रिपोर्ट के खिलाफ सीबीआई और शिकायतकर्ता ऊपर की अदालत में जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। इस संबंध में मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दी और कहा कि जसविंदर के खिलाफ कोई सुबूत नहीं है। सीबीआई की ओर से दिए गए रिकार्ड, रिकॉर्डिंग और चार्जशीट को बारीकी से जांचने-परखने के बाद पाया कि मोहन सिंह ने कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि उसने जसविंदर कौर के कहने पर रिश्वत के पैसे लिए थे।
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इस संबंध में न ही मौखिक सुबूत हैं और न ही लिखित में। बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के एडवोकेट केपी सिंह ने कहा कि जसविंदर कौर को बरी और दोषी साबित करने के लिए ठोस सबूत हैं या नहीं, यह तय करने की ड्यूटी डीआईजी की नहीं बल्कि अदालत की है। उन्होंने कहा कि नए तथ्य का कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी को पहली बार मामले पर विचार करने के लिए आदेश दिया गया है।
शिकायतकर्ता ने अदालत में बयान दिया था कि जसविंदर कौर और मोहन सिंह ने आमने-सामने बैठकर उनसे रिश्वत की मांग की थी। चंडीगढ़ पुलिस के सक्षम प्राधिकारी ने शिकायतकर्ता और मोहन सिंह की मुलाकात की सीसीटीवी फुटेज पर भी ध्यान नहीं दिया है।
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अदालत ने कहा कि इस मामले के सक्षम प्राधिकारी ने जसविंदर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना किया है। ऐसी स्थिति में अदालत मामले में संज्ञान नहीं ले सकती। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि चंडीगढ़ डीआईजी की रिपोर्ट के खिलाफ सीबीआई और शिकायतकर्ता ऊपर की अदालत में जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
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जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। इस संबंध में मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दी और कहा कि जसविंदर के खिलाफ कोई सुबूत नहीं है। सीबीआई की ओर से दिए गए रिकार्ड, रिकॉर्डिंग और चार्जशीट को बारीकी से जांचने-परखने के बाद पाया कि मोहन सिंह ने कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि उसने जसविंदर कौर के कहने पर रिश्वत के पैसे लिए थे।
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इस संबंध में न ही मौखिक सुबूत हैं और न ही लिखित में। बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के एडवोकेट केपी सिंह ने कहा कि जसविंदर कौर को बरी और दोषी साबित करने के लिए ठोस सबूत हैं या नहीं, यह तय करने की ड्यूटी डीआईजी की नहीं बल्कि अदालत की है। उन्होंने कहा कि नए तथ्य का कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी को पहली बार मामले पर विचार करने के लिए आदेश दिया गया है।
शिकायतकर्ता ने अदालत में बयान दिया था कि जसविंदर कौर और मोहन सिंह ने आमने-सामने बैठकर उनसे रिश्वत की मांग की थी। चंडीगढ़ पुलिस के सक्षम प्राधिकारी ने शिकायतकर्ता और मोहन सिंह की मुलाकात की सीसीटीवी फुटेज पर भी ध्यान नहीं दिया है।
बयानों और कॉल रिकॉर्डिंग पर विचार नहीं किया
इस मामले में शिकायतकर्ता ने कहा कि चंडीगढ़ पुलिस ने उनके गवाहों के बयानों और कॉल रिकॉर्डिंग पर विचार नहीं किया है। दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना कर दिया।
मामला 2017 का है। शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया था कि हत्या के मामले में उनके तीन कर्मचारियों को छोड़ने के नाम पर सेक्टर-31 थाना एसएचओ मोहन सिंह ने नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने कहा था कि रिश्वत जसविंदर कौर के निर्देश पर मांगी गई थी। नौ लाख में से 8 लाख रुपये जसविंदर कौर के हैं।
मोहन सिंह की गिरफ्तारी के बाद जसविंदर कौर के खिलाफ सबूत न मिलने के कारण उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने फरवरी 2020 में सीबीआई अदालत में याचिका दायर कर जसविंदर कौर को आरोपी बनाने की मांग की थी, जिसके बाद चंडीगढ़ डीआईजी को जवाब दायर करने के आदेश दिए थे।
एक दूसरे मामले में इस समय जेल में हैं जसविंदर कौर
चंडीगढ़ पुलिस की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर इस समय बुड़ैल जेल में बंद हैं। उन पर दोबारा से रिश्वत लेने का आरोप है। गुरदीप सिंह नाम के एक शख्स ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उस पर केस दर्ज न करने की एवज में जसविंदर ने पांच लाख रुपये मांगे थे। सीबीआई ने इस मामले में पहले बिचौलिए को गिरफ्तार किया। उसके बाद जसविंदर फरार हो गई थी। 25 जुलाई को जसविंदर कौर ने अदालत में सरेंडर किया था। चंडीगढ़ पुलिस ने जसविंदर कौर को सस्पेंड कर दिया है।
मामला 2017 का है। शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने आरोप लगाया था कि हत्या के मामले में उनके तीन कर्मचारियों को छोड़ने के नाम पर सेक्टर-31 थाना एसएचओ मोहन सिंह ने नौ लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। उन्होंने कहा था कि रिश्वत जसविंदर कौर के निर्देश पर मांगी गई थी। नौ लाख में से 8 लाख रुपये जसविंदर कौर के हैं।
मोहन सिंह की गिरफ्तारी के बाद जसविंदर कौर के खिलाफ सबूत न मिलने के कारण उनके खिलाफ मामला बंद कर दिया था। इसके बाद शिकायतकर्ता प्रेम सिंह बिष्ट ने फरवरी 2020 में सीबीआई अदालत में याचिका दायर कर जसविंदर कौर को आरोपी बनाने की मांग की थी, जिसके बाद चंडीगढ़ डीआईजी को जवाब दायर करने के आदेश दिए थे।
एक दूसरे मामले में इस समय जेल में हैं जसविंदर कौर
चंडीगढ़ पुलिस की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर इस समय बुड़ैल जेल में बंद हैं। उन पर दोबारा से रिश्वत लेने का आरोप है। गुरदीप सिंह नाम के एक शख्स ने सीबीआई को शिकायत दी थी कि उस पर केस दर्ज न करने की एवज में जसविंदर ने पांच लाख रुपये मांगे थे। सीबीआई ने इस मामले में पहले बिचौलिए को गिरफ्तार किया। उसके बाद जसविंदर फरार हो गई थी। 25 जुलाई को जसविंदर कौर ने अदालत में सरेंडर किया था। चंडीगढ़ पुलिस ने जसविंदर कौर को सस्पेंड कर दिया है।