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Chandigarh News: पीएनबी हाउसिंग से 1.26 करोड़ की धोखाधड़ी में बिल्डर समेत तीन बरी
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चंडीगढ़। पीएनबी हाउसिंग से 1.26 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में जिला अदालत ने तीन आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। बरी होने वालों में खरड़ का बिल्डर राधे सोनी और पंचकूला के रहने वाले विजेंद्र अनजान और उनकी पत्नी आशा शामिल हैं। तीनों के खिलाफ सेक्टर-36 थाना पुलिस ने दो साल पहले आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत केस दर्ज किया था लेकिन इन पर लगे आरोपों को पुलिस साबित नहीं कर सकी।
पीएनबी हाउसिंग की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राधे सोनी ने विजेंद्र और उनकी पत्नी आशा के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी की। सोनी ने उन्हें कस्टमर बनाकर तीन फ्लैट दिखाए, जिस पर बैंक ने उन्हें 1.26 करोड़ रुपये का लोन दिया। बाद में उन्होंने बैंक को किस्त देनी बंद कर दी। बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत एडीएम मोहाली के पास केस दायर कर दिया। बैंक जब इन फ्लैट्स का कब्जा लेने गया तो पता चला कि वहां तो कोई और लोग रह रहे थे। उन लोगों का दावा था कि ये फ्लैट्स तो उन्होंने राधे सोनी से खरीदे थे। तब बैंक को पता चला कि आरोपितों ने बैंक से धोखाधड़ी की है। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी।
बचाव पक्ष के वकील सजल शर्मा ने अदालत में बहस के दौरान कहा कि उनके मुवक्किलों को झूठे केस में फंसाया गया है। बैंक ने केवल अपने अधिकारियों को बचाने के लिए आरोप बिल्डर, विजेंद्र व सोनी पर लगा दिए जबकि विजेंद्र और आशा सोनी ने तो फ्लैट्स का कब्जा तक नहीं लिया। पीएनबी हाउसिंग ने शिकायत में जिन फ्लैट्स को बेचने का जिक्र किया है, वह फ्लैट्स अलग हैं। ये वो फ्लैट्स नहीं हैं जिन पर विजेंद्र और आशा ने बैंक से लोन लिया था। एडवोकेट शर्मा ने कहा कि ये आपराधिक शिकायत नहीं बनती थी और कंपनी को इसके लिए सिविल केस दायर करना चाहिए था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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पीएनबी हाउसिंग की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राधे सोनी ने विजेंद्र और उनकी पत्नी आशा के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी की। सोनी ने उन्हें कस्टमर बनाकर तीन फ्लैट दिखाए, जिस पर बैंक ने उन्हें 1.26 करोड़ रुपये का लोन दिया। बाद में उन्होंने बैंक को किस्त देनी बंद कर दी। बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत एडीएम मोहाली के पास केस दायर कर दिया। बैंक जब इन फ्लैट्स का कब्जा लेने गया तो पता चला कि वहां तो कोई और लोग रह रहे थे। उन लोगों का दावा था कि ये फ्लैट्स तो उन्होंने राधे सोनी से खरीदे थे। तब बैंक को पता चला कि आरोपितों ने बैंक से धोखाधड़ी की है। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी।
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बचाव पक्ष के वकील सजल शर्मा ने अदालत में बहस के दौरान कहा कि उनके मुवक्किलों को झूठे केस में फंसाया गया है। बैंक ने केवल अपने अधिकारियों को बचाने के लिए आरोप बिल्डर, विजेंद्र व सोनी पर लगा दिए जबकि विजेंद्र और आशा सोनी ने तो फ्लैट्स का कब्जा तक नहीं लिया। पीएनबी हाउसिंग ने शिकायत में जिन फ्लैट्स को बेचने का जिक्र किया है, वह फ्लैट्स अलग हैं। ये वो फ्लैट्स नहीं हैं जिन पर विजेंद्र और आशा ने बैंक से लोन लिया था। एडवोकेट शर्मा ने कहा कि ये आपराधिक शिकायत नहीं बनती थी और कंपनी को इसके लिए सिविल केस दायर करना चाहिए था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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