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Chandigarh News: नाजायज असला मामले में तीन दोषियों को तीन-तीन साल की कैद

Tue, 06 Oct 2026 02:21 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:21 AM IST
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Three convicts sentenced to three years' imprisonment in illegal arms case
सौरव, कुशार और शिवराज पर 10-10 हजार रुपये का लगाया जुर्माना; जग्गू भगवानपुरिया और भूपी राणा बरी
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माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। नाजायज हथियार बरामदगी के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवदीप कौर की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने सौरव कुमार उर्फ अजय, कुशार आशीष राम स्वरूप और शिवराज सोनी पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने पर आरोपियों को दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। हालांकि, अदालत ने तीनों आरोपियों को धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं 406, 420 और 120-बी के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष इन धाराओं के तहत लगाए गए आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर साबित नहीं कर सका। इसका लाभ तीनों आरोपियों को दिया गया। मामले में नामजद गैंगस्टर जगदीप सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया और भूपिंदर सिंह उर्फ भूपी राणा को भी अदालत ने बरी कर दिया। अदालत के अनुसार अभियोजन पक्ष दोनों के अन्य आरोपियों से संबंध या आपराधिक लिंक को पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर साबित करने में विफल रहा। वहीं, मामले में नामजद चौथे आरोपी रणजीत सिंह उर्फ काका की अदालती कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी।


अलीगढ़ से हथियार लाकर सप्लाई करने का था आरोप
पुलिस के अनुसार 18 अक्टूबर 2023 को एएसआई गुरदीप सिंह पुलिस टीम के साथ बलौंगी के टी-प्वाइंट के पास जांच कर रहे थे। इसी दौरान सूचना मिली कि सौरव, रणजीत और शिवराज ने गिरोह बनाया हुआ है और अलीगढ़ से हथियार व गोला-बारूद खरीदकर पंजाब के अलग-अलग जिलों में गैंगस्टरों और अपने साथियों को सप्लाई करते हैं। पुलिस ने सूचना के आधार पर गंदे पानी के नाले के पुल के पास कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हथियार और गोला-बारूद समेत गिरफ्तार करने का दावा किया था। इसके बाद आरोपियों को अदालत में पेश कर चार दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया। पुलिस के मुताबिक, 20 अक्टूबर को सौरव और शिवराज के खुलासे के आधार पर कुशार आशीष राम स्वरूप को मामले में नामजद कर गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से भी हथियार बरामद किए जाने का दावा किया गया था।
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निजी लोन दिलाने के नाम पर ठगी का भी लगा था आरोप
पुलिस का दावा था कि शिवराज और कुशार से पूछताछ के दौरान सामने आया कि कुशार लोगों को निजी लोन दिलाने का झांसा देकर ठगी करता था। इसके बाद मामले में धारा 406 और 420 जोड़ी गईं। जांच के दौरान पुलिस ने शिवराज के खुलासे के आधार पर जग्गू भगवानपुरिया और बाद में भूपी राणा को भी मामले में नामजद किया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने हथियार संबंधी आरोपों में सौरव, कुशार और शिवराज को दोषी ठहराया, जबकि धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोप साबित न होने पर उन्हें इन धाराओं से बरी कर दिया।
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