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आधार कार्ड में मामूली गलतियों का खामियाजा भुगत रहे पंजाब के हजारों किसान

Sun, 07 Jan 2018 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा(पंजाब) Updated Sun, 07 Jan 2018 09:31 AM IST
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Thousands of farmers in Punjab out from debt forgiveness list
aadhar card - फोटो : Demo Pics
राज्य सरकार की किसान कर्ज माफी योजना के लिए आधार कार्ड में नाममात्र की गलती के कारण सूबे के हजारों किसानों का नाम पहली सूची से गायब हो गया है। इससे किसानों में काफी रोष है। अकेले मोगा में पांच हजार से अधिक किसान आधार कार्ड में गलती का शिकार हैं। 
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डीसी दिलराज सिंह ने बताया कि ढाई एकड़ तक वाले जिन किसानों का नाम कर्ज माफी लिस्ट में किसी गलती के कारण नहीं आया, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके नाम भी गलतियां दूर होने के बाद जल्द लिस्ट में डाल दिए जाएंगे। जिन छोटे और ढाई एकड़ जमीन वाले किसानों ने सहकारी बैंकों से कर्ज लिया था, राज्य सरकार की ओर से पहले पड़ाव में उन किसानों का ही कर्ज माफ किया जा रहा है।
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मोगा जिले में कुल 173 सहकारी समितियों में से 170 सहकारी समितियों का डाटा कंप्यूटर में डाला गया है। यहां कर्ज माफी की पहली किश्त की सूचियां सहकारी समितियों में लग गई हैं। इन समितियों से लेनदेन करने वाले मोगा के कुल 54 हजार किसानों में से लगभग पांच हजार के नाम आधार कार्ड में नाममात्र की गलती के कारण सूची से गायब हैं। वहीं सहकारी विभाग के अधिकारी 2.5 एकड़ के बाद पांच एकड़ तक के योग्य किसानों को भी इस योजना का लाभ मिलने का भरोसा दे रहे हैं। 
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कर्ज माफी की सूची में नाम न आने पर किसान ने निगला जहर

Thousands of farmers in Punjab out from debt forgiveness list
किसान सिकंदर सिंह की फाइल फोटो। - फोटो : File Photo
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से मानसा में 7 जनवरी को कर्ज माफी योजना की शुरुआत की जा रही है। सहकारी विभाग की ओर से समागम में किसानों को ले जाने के लिए विशेष बस का प्रबंध किया गया है। इस समागम में मालवा क्षेत्र के पांच जिले मानसा, मोगा, बठिंडा, मुक्तसर और फरीदकोट के किसानों को कर्ज माफी के सर्टिफिकेट देने की योजना है।

राज्य सरकार की ओर से जारी कर्ज माफी की सूची में नाम न आने से परेशान गांव रोड़ेवाला के एक किसान ने बुधवार रात जहर खाकर खुदकुशी कर ली। गांव रोड़ेवाल के सरपंच जसपाल सिंह ने बताया कि उनके गांव के किसान सिकंदर सिंह (43) पर करीब सात-आठ लाख रुपये का कर्ज था। महज दो एकड़ का मालिक सिकंदर सिंह कम जमीन और आर्थिक तंगी के कारण कर्ज लौटाने में असमर्थ था।

राज्य सरकार की ओर से किसानों के कर्ज माफी के वादे के बाद सिकंदर सिंह को कुछ उम्मीद बंधी थी। जब सूची जारी की गई तो उसमें उसका नाम नहीं था। इसका पता चलने पर सिकंदर सिंह इतना परेशान हो गया कि उसने बुधवार रात जहर निगल लिया। 

भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहां के नेता गुरदीप सिंह ने कहा कि राज्य सरकार चुनाव के समय किए वादे से भाग रही है। ऐसे में किसानों के आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति बन गई है। उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार मृत किसान का सारा कर्ज माफ करे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।
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