फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Those lamps which have no fear of winds should be protected from the winds: High Court

जिन चरागों को हवाओं का कोई खौफ नहीं, उन चरागों को हवाओं से बचाया जाए : हाईकोर्ट

Thu, 26 Dec 2024 02:20 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 26 Dec 2024 02:20 AM IST
विज्ञापन
Those lamps which have no fear of winds should be protected from the winds: High Court
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नाबालिग पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड चंडीगढ़ के आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने इस दौरान प्रसिद्ध कवि निदा फाजली की कविता उद्धृत करते हुए कहा कि ‘जिन चरागों को हवाओं का कोई खौफ नहीं, उन चरागों को हवाओं से बचाया जाए।’ जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अपने फैसले में कहा कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2015 का उद्देश्य बच्चों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने और समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करना है।
विज्ञापन




इस मामले में अपराध करने वाले नाबालिग पर धारा 377 आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने धारा 15 के तहत जांच कर यह निष्कर्ष निकाला कि 16 वर्ष से अधिक उम्र का यह नाबालिग मानसिक और शारीरिक रूप से इतना सक्षम है कि उसे वयस्क के रूप में मुकदमे का सामना करना चाहिए।
विज्ञापन




हाईकोर्ट ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा प्रारंभिक आकलन का निर्णय बच्चे के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है। अगर नाबालिग को वयस्क के रूप में मुकदमे का सामना करना पड़ता है तो उसे वयस्क के रूप में मुकदमे में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है, जबकि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के तहत सुनवाई में अधिकतम तीन साल की सजा होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन




जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के तहत सुनवाई होने पर अपराध से जुड़ी अयोग्यता नाबालिग पर लागू नहीं होगी, लेकिन वयस्क के रूप में सुनवाई होने पर यह छूट नहीं मिलेगी। कोर्ट ने पाया कि सामाजिक जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट था कि नाबालिग को अपने कार्य के परिणामों की जानकारी नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि नाबालिग पारिवारिक उपेक्षा का शिकार था और उसका व्यक्तित्व अंतर्मुखी था। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने इन पहलुओं को नजरअंदाज कर दिया।




हाईकोर्ट ने मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को पुन: सौंपते हुए कहा कि प्रारंभिक आकलन करते समय कानूनी सिद्धांतों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जाए। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रारंभिक आकलन के लिए विशेषज्ञों जैसे मनोवैज्ञानिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद ली जानी चाहिए।

24jjrp15- बेरी। कार्यक्रम को संबोधित करते इंद्रेश कुमार। स्त्रोत- आयोजक

24jjrp15- बेरी। कार्यक्रम को संबोधित करते इंद्रेश कुमार। स्त्रोत- आयोजक- फोटो : udhampur

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed