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Chandigarh News: इस बार 144 साल बाद मकर संक्रांति पर बन रहा है अमृत महा संयोग
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चंडीगढ़। सूर्यदेव 14 जनवरी दिन मंगलवार को सुबह 8 बजकर 55 मिनट पर उत्तरायण होंगे। इसी दिन इसी समय मकर राशि में भी सूर्य प्रवेश करेंगे। इसी को मकर संक्रांति कहा जाता है। मकर राशि से लेकर मिथुन राशि तक सूर्य उत्तरायण होते हैं और कर्क राशि से लेकर धनु राशि तक सूर्य दक्षिणायन होते हैं। सनातन धर्म में उत्तरायण में ही शुभ कार्य करने का अधिक महत्व दिया गया है। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर में भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही है। खास बात यह है कि मकर संक्रांति पर 144 साल के बाद अमृत महा संयोग बन रहा है। जो बहुत ही बेहतर है।
उन्होंने कहा कि मकर राशि में जब सूर्य प्रवेश करते हैं तो देवताओं का दिन होता है। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर प्रयाग में मकर संक्रांति के पर्व के दिन सभी देवता अपने स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं।
ऐसा संयोग 144 साल के बाद आ रहा है जब बृहस्पति वृष राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में होंगे। उन्होंने कहा कि सूर्य उत्तराषाढ़ा के नक्षत्र के प्रथम चरण में हैं जो कि यह सूर्य का नक्षत्र है। उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है और राशि मकर है। चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में विराजमान है। पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति हैं। और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान हों। बृहस्पति रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में विराजमान हैं। जो कि चंद्रमा का नक्षत्र हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर सूर्य अपने और चंद्रमा बृहस्पति के नक्षत्र में हों तो तब यह महाअमृत संयाेग बनता है। ऐसे संयोग में प्रयाग के महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति निरोग होता है। मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर पूरा दिन रहेगा। यदि सूर्योदय के बाद उत्तरायण प्रारंभ होता है तो उसके छह घंटे पहले अमृत वेला से पुण्यकाल शुरू होता है।
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि मकर संक्रांति पर तिल, चावल, दाल, गुड़ और गरम वस्त्र कंबल आदि दान करने का विधान है। उन्होंने कहा कि सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। इसके अधिक देर चमकने से प्राणी जगत में चेतनता और उसकी कार्यशक्ति में बढ़ोतरी हो जाती है। इसलिए सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति मनाने का विशेष महत्व है। संवाद
इस रंग की वस्तु करें दान
राशि- वस्तु
मेष - लाल
बृष - सफेद
मिथुन- हरा
कर्क - सफेद
सिंह- लाल
कन्या- हरा
तुला - सफेद
बृश्चिक- लाल
धनु- पीला
मकर- काला
कुंभ - काला
मीन - पीला वस्तुओं का दान करें।
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उन्होंने कहा कि मकर राशि में जब सूर्य प्रवेश करते हैं तो देवताओं का दिन होता है। इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर प्रयाग में मकर संक्रांति के पर्व के दिन सभी देवता अपने स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं।
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ऐसा संयोग 144 साल के बाद आ रहा है जब बृहस्पति वृष राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में होंगे। उन्होंने कहा कि सूर्य उत्तराषाढ़ा के नक्षत्र के प्रथम चरण में हैं जो कि यह सूर्य का नक्षत्र है। उत्तराषाढ़ा का स्वामी सूर्य है और राशि मकर है। चंद्रमा पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे चरण में विराजमान है। पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति हैं। और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान हों। बृहस्पति रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में विराजमान हैं। जो कि चंद्रमा का नक्षत्र हैं।
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उन्होंने कहा कि अगर सूर्य अपने और चंद्रमा बृहस्पति के नक्षत्र में हों तो तब यह महाअमृत संयाेग बनता है। ऐसे संयोग में प्रयाग के महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति निरोग होता है। मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 8 बजकर 56 मिनट से शुरू होकर पूरा दिन रहेगा। यदि सूर्योदय के बाद उत्तरायण प्रारंभ होता है तो उसके छह घंटे पहले अमृत वेला से पुण्यकाल शुरू होता है।
श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि मकर संक्रांति पर तिल, चावल, दाल, गुड़ और गरम वस्त्र कंबल आदि दान करने का विधान है। उन्होंने कहा कि सूर्य ऊर्जा का स्रोत है। इसके अधिक देर चमकने से प्राणी जगत में चेतनता और उसकी कार्यशक्ति में बढ़ोतरी हो जाती है। इसलिए सनातन संस्कृति में मकर संक्रांति मनाने का विशेष महत्व है। संवाद
इस रंग की वस्तु करें दान
राशि- वस्तु
मेष - लाल
बृष - सफेद
मिथुन- हरा
कर्क - सफेद
सिंह- लाल
कन्या- हरा
तुला - सफेद
बृश्चिक- लाल
धनु- पीला
मकर- काला
कुंभ - काला
मीन - पीला वस्तुओं का दान करें।