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ये कैसी जांच... एंटीजन टेस्ट में कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट आ रही निगेटिव और बिगड़ रही तबीयत
Sat, 10 Oct 2020 01:24 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2020 01:24 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
एक तरफ लोग कोरोना संक्रमण के डर से तनाव में हैं, वहीं दूसरी तरफ आरटीपीसीआर और रैपिड एंटीजन टेस्ट की अलग-अलग रिपोर्ट उनकी स्थिति को और भी खराब कर रही है। स्क्रीनिंग के लिए शुरू की गई रैपिड एंटीजन टेस्ट की निगेटिव जांच रिपोर्ट आरटीपीसीआर में पॉजिटिव आ रही है। इससे लोग काफी परेशान हैं।
ज्यादातर लोगों का कहना है कि जीएमएसएच- 16, जीएमसीएच- 32 और अन्य मान्यता प्राप्त निजी लैब में की जा रही रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट गड़बड़ आ रही है। टेस्ट कराने वाले 20 से 30 प्रतिशत लोगों की दोबारा आरटीपीसीआर जांच कराने में कोरोना की पुष्टि हो रही है।
ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों जांच रिपोर्ट अपनी क्षमता के अनुसार सही है। रैपिड में 40 प्रतिशत और आरटीपीसीआर में 70 प्रतिशत तक संक्रमण को ट्रेस करने की क्षमता होती है।
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केस- 1: सेक्टर- 15 की आभा शर्मा (बदला हुआ नाम) को गले में खराश था। उन्होंने जीएमएसएच 16 में एंटीजन टेस्ट कराया उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन 3 दिन के बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आरटीपीसीआर टेस्ट की जांच कराने पर पता चला कि उन्हें कोरोना हुआ है।
केस- 2: मलोया निवासी संदीप कुमार (बदला हुआ नाम) को लगातार खाने में स्वाद नहीं आ रहा था। उन्हें हल्की खांसी भी थी। उन्होंने निजी लैब में एंटीजन टेस्ट कराया था। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई । लेकिन 24 घंटे के अंदर ही उनकी तबियत बिगड़ गई और आरटीपीसीआर टेस्ट कराने पर उनमें भी कोरोना की पुष्टि हुई।
रैपिड एंटीजन टेस्ट सिर्फ स्क्रीनिंग का माध्यम
कोरोना महामारी में आबादी के बीच स्क्रीनिंग के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट का प्रयोग किया जाता है। जिसे इस बीमारी के होने का शक हो वह उसकी शत-प्रतिशत पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर जांच कराएं। उसकी रिपोर्ट बिल्कुल सटीक आती है। बस इस बात का ध्यान रहे कि उसे मान्यता प्राप्त लैब में ही कराया जाना चाहिए। -डॉ. गंगाराम वर्मा, पूर्व गेस्ट्रोइंसटेस्टाइनल सर्जन, पीजीआई
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ज्यादातर लोगों का कहना है कि जीएमएसएच- 16, जीएमसीएच- 32 और अन्य मान्यता प्राप्त निजी लैब में की जा रही रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट गड़बड़ आ रही है। टेस्ट कराने वाले 20 से 30 प्रतिशत लोगों की दोबारा आरटीपीसीआर जांच कराने में कोरोना की पुष्टि हो रही है।
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ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों जांच रिपोर्ट अपनी क्षमता के अनुसार सही है। रैपिड में 40 प्रतिशत और आरटीपीसीआर में 70 प्रतिशत तक संक्रमण को ट्रेस करने की क्षमता होती है।
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केस- 1: सेक्टर- 15 की आभा शर्मा (बदला हुआ नाम) को गले में खराश था। उन्होंने जीएमएसएच 16 में एंटीजन टेस्ट कराया उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई। लेकिन 3 दिन के बाद उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी। आरटीपीसीआर टेस्ट की जांच कराने पर पता चला कि उन्हें कोरोना हुआ है।
केस- 2: मलोया निवासी संदीप कुमार (बदला हुआ नाम) को लगातार खाने में स्वाद नहीं आ रहा था। उन्हें हल्की खांसी भी थी। उन्होंने निजी लैब में एंटीजन टेस्ट कराया था। उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई । लेकिन 24 घंटे के अंदर ही उनकी तबियत बिगड़ गई और आरटीपीसीआर टेस्ट कराने पर उनमें भी कोरोना की पुष्टि हुई।
रैपिड एंटीजन टेस्ट सिर्फ स्क्रीनिंग का माध्यम
कोरोना महामारी में आबादी के बीच स्क्रीनिंग के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट का प्रयोग किया जाता है। जिसे इस बीमारी के होने का शक हो वह उसकी शत-प्रतिशत पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर जांच कराएं। उसकी रिपोर्ट बिल्कुल सटीक आती है। बस इस बात का ध्यान रहे कि उसे मान्यता प्राप्त लैब में ही कराया जाना चाहिए। -डॉ. गंगाराम वर्मा, पूर्व गेस्ट्रोइंसटेस्टाइनल सर्जन, पीजीआई