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थोड़े से मनमौजी और बिंदास हैं ये धरती के भगवान
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चंडीगढ़। डॉक्टर का नाम लेते ही आंखों के सामने आला लटकाए और सफेद कोट पहने व्यक्ति की छवि आ जाती है। लेकिन यह परिभाषा अब धीरे धीरे बदलने लगी है। हर वक्त मरीज, अस्पताल, इंजेक्शन और दवा के बीच घिरा रहने वाला डॉक्टर तनाव को दूर करने के लिए अपने शौक को माध्यम बनाने लगा है। अगर बात युवा डॉक्टरों की जाए तो वह अपने फुर्सत के लम्हों को यादगार बनाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। कोई बाइक लेकर शिमला की वादियों में निकल जा रहा है तो कोई अपना कैमरा लेकर प्रकृति की जीवंत फोटो कैद करने। इतना ही नहीं किसी को अपने संगीत की दुनिया से बेहद लगाव है तो कोई लिखने का शौकीन है। इन युवा डॉक्टरों का मानना है कि दिनोंदिन बढ़ते काम के दबाव के बीच अगर उन्होंने अपने शौक को तवज्जो नहीं दिया तो फिर कल को खुद को संभालना मुश्किल होगा।
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केमेस्ट्री की शौकीन डॉ. पीयूष पाठक बन गईं बाइक राइडर
बचपन में जब भइया को बाइक चलाते हुए देखती थी तो सोचती थी कि मैं भी बड़ी होकर बाइक राइडर बनूंगी। यह कहना है पीजीआई बायो केमेस्ट्री विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. पीयूष पाठक का। बनारस की डॉ. पीयूष को एमबीबीएस के दौरान ही बाइक राइडिंग का शौक लग गया। इसके बाद धीरे धीरे यह शौक कब परवाज चढ़ गया पता ही नहीं चला। अब काम से खाली होते ही डॉ. पीयूष अपनी KTM 390 DUKE लेकर निकल पड़ती है हसीन वादियों में। कभी पराठा खाने का बहाना तो कभी कसौली की कड़क चाय का चस्का उन्हें बाइक राइडिंग के लिए उत्साहित कर देता है। बाइक राइडिंग के अलावा डॉ. पीयूष को मार्शल आर्ट और ताइक्वांडो का भी शौक है। ताइक्वांडो में वे ब्लू बेल्ट है।
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मनोदशा पढ़ने माहिर शतरंज के हैं मंझे हुए खिलाड़ी
भीड़ में खुद को अकेला महसूस करने पर डिजिटल ड्रम बजाने वाले पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. वेल प्रशांत वेंकेटेशन के शौक बेहद खास है। ड्रम के साथ ही डॉ. प्रशांत शतरंज के भी मंझे हुए खिलाड़ी हैं। अपने शौक को पूरा करने के लिए वे साथी ना मिलने पर ऑनलाइन चेस खेलना पसंद करते हैं। डॉ. प्रशांत का कहना है कि शौक को पूरा करने के लिए न तो किसी के साथ की जरूरत है ना ही बहुत लंबे अवकाश की। छोटे छोटे पलों में हम अपने शौक पूरा कर खुद को नई ऊर्जा दे सकते हैं।
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव
पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव को फोटोग्राफी के साथ ही गिटार बजाने का शौक है। प्रकृति की जीवंत तस्वीरें अपने कैमरे में कैद करने वाले प्रतीक गिटार बजाकर अपने आसपास के माहौल को संगीतमय बनाने का गुर जानते हैं। वहीं स्वीमिंग के लिए भी वक्त निकालना उन्हें बेहद पसंद है। संगीत तो इन पर इस कदर हावी है कि पिछले दिनों हुए ऑल इंडिया वीडियो मेकिंग कंपीटीशन में वे तीसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं। कैलीग्राफी में तो इन्हें इतनी महारत हासिल है कि इनकी सुंदर लिखावट के कारण जो इनसे एक बार मिल ले वह इन्हें फिर भूल नहीं पाता।
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मां सरस्वती की विशेष कृपा है डॉ. परमिता कर्मकार पर
पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. परमिता कर्मकार पर मां सरस्वती की विशेष कृपा है। कोलकाता की डॉ. परमिता को एक्टिंग और सिंगिंग का शौक है। पीजीआई ज्वाइन करने से पहले परमिता थिएटर भी करती थीं। मौजूदा समय में खाली वक्त मिलने पर वे तानपुरा लेकर रियाज करती हैं। डॉ. परमिता का कहना है कि संगीत तनाव दूर करने का ऐसा माध्यम है जिसका प्रयोग कर खुद के साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी प्रसन्नचित किया जा सकता है। डॉ. परमिता के दर्जनों यूट्यूब वीडियो संगीत को चाहने वालों के तनाव को दूर करने में मददगार साबित हो रहे हैं।
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दोस्तों के बीच ग्राफिक डिजाइनिंग के लिए हैं खासा प्रसिद्ध
इतने शौक रखिए कि तनाव के लिए एक मिनट का भी समय ना बचे। यह कहना है पीजीआई एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के डॉ. विनायक देव का। उन्हें फिल्म फेस्टिवल देखने और शार्ट फिल्म बनाने के साथ ही स्टील फोटोग्राफी का शौक है। वहीं डॉ. विनायक तात्कालिक विषयों पर ब्लॉक भी लिखते हैं। नई चीजें सीखने के शौकीन विनायक को पांच भाषाओं का भी ज्ञान है। वहीं अपनी ग्राफिक डिजाइनिंग के कारण वे अपने दोस्तों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं। तभी तो पीजीआई में होने वाले किसी भी समारोह के लिए ग्राफिक डिजाइनिंग विनायक से ही करवाई जाती है।
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डॉक्टरी के साथ लिखने का भी है शौक
नेशनल स्किन हॉस्पिटल डायरेक्टर और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि तनाव भरे इस दौर में शौक ही एक ऐसा माध्यम है जिससे हम खुद को नई ऊर्जा दे सकते हैं। क्रिकेट खेलने और लिखने का शौक रखने वाले डॉ. विकास 10 से 12 घंटे काम करने के बाद रात को नियमित रूप से कुछ पन्ने जरूर लिखते हैं। पढ़ने- लिखने की आदत के कारण के कारण ही डॉक्टर विकास अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के फेलो भी हैं। मौजूदा समय में डॉक्टर विकास त्वचा रोग से संबंधित एक पत्रिका लिख रहे हैं। जिसका कुछ ही समय में प्रकाशन होने वाला है।
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शौक लगा ऐसा कि तमिल बोलने वाला पंजाबी बोलने लगा
तमिलनाडु के डॉ. बसंत कुमार गौंडर पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में सीनियर रेजिडेंट हैं। पीजीआई ज्वाइन करने के बाद शुरुआती दौर में इन्हें तमिल के अलावा कोई भाषा नहीं आती थी लेकिन पंजाबी संस्कृति ने इनको इतना प्रभावित किया कि चंद दिनों में ही इन्होंने पंजाबी बोलना सीखने के साथ ही भंगड़ा में भी महारत हासिल कर ली। डॉ. बसंत का कहना है कि यह उनके सीखने की शौक की बदौलत ही संभव हो पाया है। अब वे तमिल और पंजाबी का मिश्रण यानी तंजाबी बोलते हैं। उनका भंगड़ा पीजीआई रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन में खासा प्रसिद्ध है। कुछ दिनों पहले उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के सामने भी पंजाबी लोक नृत्य भंगड़ा की प्रस्तुति दी थी।
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केमेस्ट्री की शौकीन डॉ. पीयूष पाठक बन गईं बाइक राइडर
बचपन में जब भइया को बाइक चलाते हुए देखती थी तो सोचती थी कि मैं भी बड़ी होकर बाइक राइडर बनूंगी। यह कहना है पीजीआई बायो केमेस्ट्री विभाग की सीनियर रेजिडेंट डॉ. पीयूष पाठक का। बनारस की डॉ. पीयूष को एमबीबीएस के दौरान ही बाइक राइडिंग का शौक लग गया। इसके बाद धीरे धीरे यह शौक कब परवाज चढ़ गया पता ही नहीं चला। अब काम से खाली होते ही डॉ. पीयूष अपनी KTM 390 DUKE लेकर निकल पड़ती है हसीन वादियों में। कभी पराठा खाने का बहाना तो कभी कसौली की कड़क चाय का चस्का उन्हें बाइक राइडिंग के लिए उत्साहित कर देता है। बाइक राइडिंग के अलावा डॉ. पीयूष को मार्शल आर्ट और ताइक्वांडो का भी शौक है। ताइक्वांडो में वे ब्लू बेल्ट है।
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मनोदशा पढ़ने माहिर शतरंज के हैं मंझे हुए खिलाड़ी
भीड़ में खुद को अकेला महसूस करने पर डिजिटल ड्रम बजाने वाले पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के सीनियर रेजिडेंट डॉ. वेल प्रशांत वेंकेटेशन के शौक बेहद खास है। ड्रम के साथ ही डॉ. प्रशांत शतरंज के भी मंझे हुए खिलाड़ी हैं। अपने शौक को पूरा करने के लिए वे साथी ना मिलने पर ऑनलाइन चेस खेलना पसंद करते हैं। डॉ. प्रशांत का कहना है कि शौक को पूरा करने के लिए न तो किसी के साथ की जरूरत है ना ही बहुत लंबे अवकाश की। छोटे छोटे पलों में हम अपने शौक पूरा कर खुद को नई ऊर्जा दे सकते हैं।
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव
पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के डॉ. प्रतीक श्रीवास्तव को फोटोग्राफी के साथ ही गिटार बजाने का शौक है। प्रकृति की जीवंत तस्वीरें अपने कैमरे में कैद करने वाले प्रतीक गिटार बजाकर अपने आसपास के माहौल को संगीतमय बनाने का गुर जानते हैं। वहीं स्वीमिंग के लिए भी वक्त निकालना उन्हें बेहद पसंद है। संगीत तो इन पर इस कदर हावी है कि पिछले दिनों हुए ऑल इंडिया वीडियो मेकिंग कंपीटीशन में वे तीसरा स्थान प्राप्त कर चुके हैं। कैलीग्राफी में तो इन्हें इतनी महारत हासिल है कि इनकी सुंदर लिखावट के कारण जो इनसे एक बार मिल ले वह इन्हें फिर भूल नहीं पाता।
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मां सरस्वती की विशेष कृपा है डॉ. परमिता कर्मकार पर
पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. परमिता कर्मकार पर मां सरस्वती की विशेष कृपा है। कोलकाता की डॉ. परमिता को एक्टिंग और सिंगिंग का शौक है। पीजीआई ज्वाइन करने से पहले परमिता थिएटर भी करती थीं। मौजूदा समय में खाली वक्त मिलने पर वे तानपुरा लेकर रियाज करती हैं। डॉ. परमिता का कहना है कि संगीत तनाव दूर करने का ऐसा माध्यम है जिसका प्रयोग कर खुद के साथ ही अपने आसपास के लोगों को भी प्रसन्नचित किया जा सकता है। डॉ. परमिता के दर्जनों यूट्यूब वीडियो संगीत को चाहने वालों के तनाव को दूर करने में मददगार साबित हो रहे हैं।
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दोस्तों के बीच ग्राफिक डिजाइनिंग के लिए हैं खासा प्रसिद्ध
इतने शौक रखिए कि तनाव के लिए एक मिनट का भी समय ना बचे। यह कहना है पीजीआई एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के डॉ. विनायक देव का। उन्हें फिल्म फेस्टिवल देखने और शार्ट फिल्म बनाने के साथ ही स्टील फोटोग्राफी का शौक है। वहीं डॉ. विनायक तात्कालिक विषयों पर ब्लॉक भी लिखते हैं। नई चीजें सीखने के शौकीन विनायक को पांच भाषाओं का भी ज्ञान है। वहीं अपनी ग्राफिक डिजाइनिंग के कारण वे अपने दोस्तों के बीच खासा प्रसिद्ध हैं। तभी तो पीजीआई में होने वाले किसी भी समारोह के लिए ग्राफिक डिजाइनिंग विनायक से ही करवाई जाती है।
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डॉक्टरी के साथ लिखने का भी है शौक
नेशनल स्किन हॉस्पिटल डायरेक्टर और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. विकास शर्मा का कहना है कि तनाव भरे इस दौर में शौक ही एक ऐसा माध्यम है जिससे हम खुद को नई ऊर्जा दे सकते हैं। क्रिकेट खेलने और लिखने का शौक रखने वाले डॉ. विकास 10 से 12 घंटे काम करने के बाद रात को नियमित रूप से कुछ पन्ने जरूर लिखते हैं। पढ़ने- लिखने की आदत के कारण के कारण ही डॉक्टर विकास अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के फेलो भी हैं। मौजूदा समय में डॉक्टर विकास त्वचा रोग से संबंधित एक पत्रिका लिख रहे हैं। जिसका कुछ ही समय में प्रकाशन होने वाला है।
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शौक लगा ऐसा कि तमिल बोलने वाला पंजाबी बोलने लगा
तमिलनाडु के डॉ. बसंत कुमार गौंडर पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन में सीनियर रेजिडेंट हैं। पीजीआई ज्वाइन करने के बाद शुरुआती दौर में इन्हें तमिल के अलावा कोई भाषा नहीं आती थी लेकिन पंजाबी संस्कृति ने इनको इतना प्रभावित किया कि चंद दिनों में ही इन्होंने पंजाबी बोलना सीखने के साथ ही भंगड़ा में भी महारत हासिल कर ली। डॉ. बसंत का कहना है कि यह उनके सीखने की शौक की बदौलत ही संभव हो पाया है। अब वे तमिल और पंजाबी का मिश्रण यानी तंजाबी बोलते हैं। उनका भंगड़ा पीजीआई रेजिडेंट्स डॉक्टर एसोसिएशन में खासा प्रसिद्ध है। कुछ दिनों पहले उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के सामने भी पंजाबी लोक नृत्य भंगड़ा की प्रस्तुति दी थी।