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Chandigarh News: 8 घंटे तक चली बैठक में हंगामा और बहस, सुनवाई न होने पर पार्षद बैठे धरने पर

Wed, 30 Jul 2025 12:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 12:06 AM IST
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There was uproar and debate in the meeting that lasted for 8 hours, councillors sat on dharna when there was no hearing
चंडीगढ़। नगर निगम सदन की बैठक मंगलवार को सुबह 11 बजे से शाम लगभग 7 बजे तक चली। आठ घंटे की बैठक में अधिकांश समय पार्षद हंगामा और बहस करते नजर आए। जब उनकी बात सुनी गई तो अधिकांश पार्षद बैठक समाप्त होने से पहले ही सदन छोड़कर चले गए। इससे सदन की कार्रवाई के लिए कोरम भी पूरा नहीं हो पाया। इस पर मेयर और नगर आयुक्त ने नाराजगी जताई। इसके बाद आनन-फानन में पार्षदों को फोन कर वापस बुलाया गया। जब चार पार्षद लौटे तब जाकर एजेंडों पर बहस हो सकी।
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बैठक की शुरुआत में पार्षदों को अपनी बात रखने के लिए दोपहर 12:30 बजे तक शून्यकाल निर्धारित किया गया था। हालांकि यह काफी ज्यादा समय तक चलता रहा। इस दौरान पार्षदों ने सीवर कर्मचारियों की हड़ताल से उत्पन्न समस्याओं पर चर्चा की। नगर आयुक्त को बताया गया कि कर्मचारियों को वेतन न मिलने के कारण वे पिछले एक सप्ताह से काम बंद किए हैं जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। इस पर नगर आयुक्त ने एक्सईएन और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। जिसमें बताया कि एक डिवीजन के कर्मचारियों को संस्था ने वेतन नहीं दिया है। इस पर नगर आयुक्त ने अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
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गुड़, तेल और साबुन न मिलने का मुद्दा उठा
पार्षद गुरुप्रीत गाबी ने सदन के शुरुआत में ही कहा कि सेक्टर-31 से लेकर सेक्टर-56 और 61 से 63 तक सफाई कर्मचारियों को पिछले 25 महीनों से गुड़, तेल और साबुन नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि संबंधित कंपनी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और 1.50 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला लंबित है। इस पर मेयर और नगर आयुक्त ने सहमति जताई और कहा कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर भुगतान कराएंगी।
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आप और कांग्रेस पार्षद धरने पर बैठे
आप और कांग्रेस के पार्षदों ने सेक्टर-25 स्थित सॉलिड वेस्ट प्लांट के संचालन पर चर्चा की मांग की। पार्षद प्रेमलता, जसबीर सिंह बंटी, तरुणा मेहता और सचिन गालब ने आरोप लगाया कि प्लांट का संचालन ठीक से नहीं हो रहा। हाल ही में उन्होंने दौरा कर वहां की स्थिति देखी थी। जबकि नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा का कहना था कि प्लांट में कार्य जारी है और जितना कचरा पहुंचा था उसका निस्तारण भी किया गया है। इसके बाद बहस तेज हो गई। मेयर और भाजपा पार्षदों ने बहस समाप्त करने की मांग की जबकि विपक्ष जवाब की मांग पर अड़ा रहा। उसके बाद आप और कांग्रेस पार्षद धरने पर बैठ गए। उनके धरने के चलते मेयर ने सदन की कार्रवाई 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी।


सुधार नहीं हुआ तो सफाई में 100 वें स्थान पर होंगे

पार्षद प्रेमलता और अन्य सदस्यों ने शहर में सफाई, जलभराव और सड़क की समस्याओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर की स्थिति खराब है। मेयर ने जवाब दिया कि हमें राष्ट्रपति की ओर से 2 स्थानों के लिए सम्मानित किया गया है और नगर निगम अच्छा कार्य कर रहा है। इस पर बहस और तीव्र हो गई। पार्षदों ने कहा कि कोई काम नहीं हो रहा है। इसके बाद नगर आयुक्त ने कहा कि यदि आय और व्यय के बीच का अंतर नहीं घटाया तो भविष्य में सफाई जैसे कार्यों में चंडीगढ़ 100वें स्थान पर जा सकता है। खर्च अगर 12 फीसदी बढ़ रहा है तो आमदनी 1 फीसदी की है। इसको बढ़ाने की जरूरत है। अगर इसको नहीं बढ़ाया तो आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होगी।

पेन ड्राइव से गायब मिला वीडियो
पार्षद सौरभ जोशी ने बताया कि ट्यूबवेल ऑपरेटरों की छंटनी के दौरान बचे पदों पर पुराने कर्मचारियों को रखने का वादा किया गया था लेकिन नियुक्त किए लोग प्रशिक्षित नहीं हैं। इसको लेकर एक स्थानीय मीडिया स्थान का हवाला दिया गया। जिसमें एक कर्मचारी बता रहा है कि वह नया कर्मचारी है और काम भी नहीं जानता है। पार्षद सौरभ जोशी ने बताया कि उनके पास वह वीडियो है। उसको सदन में चलाने की बात हुई। जब वीडियो चलाने की कोशिश की गई तो पाया गया कि दी गई पेन ड्राइव खाली थी। वहीं एक्सईएन का कहना था कि सभी पुराने कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं।

बिस्कुट खिलाकर जताया आभार
जब नगर आयुक्त ने सामुदायिक केंद्रों की दरें पार्षदों के सुझाव के अनुसार बढ़ाने की बात मान ली तो पार्षदों ने ताली बजाकर स्वागत किया। यहां तक कि कांग्रेस पार्षद ने बिस्कुट खिलाकर धन्यवाद किया। इस दौरान सदन में ठहाके गूंजने लगे।


तीन माह में बड़े बकाएदारों से वसूली
एक सवाल के जवाब में बताया गया कि नगर निगम के लगभग 20 बड़े डिफॉल्टरों पर 200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इसमें पंजाब यूनिवर्सिटी पर 68.85 करोड़, पीजीआई पर 23 करोड़, आईटी पार्क पर 45 करोड़ और गोल्फ क्लब पर 12.20 करोड़ रुपये बकाया हैं। नगर आयुक्त ने बताया कि तीन महीनों के भीतर वसूली अभियान चलाया जाएगा।


प्रमुख बिंदु:

- औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 स्थित निर्माण एवं ध्वस्तीकरण वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन के लिए निजी एजेंसी के चयन के लिए आरएफपी प्रस्ताव पर मेयर ने पहले मंजूरी दी फिर इसे अगली बैठक में लाने की बात कही।


- एंलांते मॉल पर आरोप लगा कि वह कंपनियों से विज्ञापन के नाम पर पैसे ले रहा है परंतु निगम को उचित भुगतान नहीं किया गया।

- स्ट्रीट लाइट बंद होने का मुद्दा उठा। चीफ इंजीनियर ने बताया कि अगले छह महीनों में नई लाइटें लगाई जाएंगी और खराब लाइटों की मरम्मत की जाएगी।

- कॉलेज व स्कूलों के पास सिगरेट और तंबाकू की बिक्री पर सवाल उठाया गया। बताया गया कि अवैध वेंडर खुलेआम तंबाकू उत्पाद बेचते हैं। नगर निगम ने इसके खिलाफ अभियान चलाने का आश्वासन दिया।
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