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Chandigarh News: शहीद उमेद सिंह की न उम्मीद रही न मिला पार्थिव शरीर

Sun, 17 Mar 2024 03:04 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Mar 2024 03:04 AM IST
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There was no hope for martyr Umed Singh and his body was not found.
वीरनारी लक्ष्मी देवी। 
चंडीगढ़। वतन की मिट्टी पर मर मिटने वाले देश में ऐसे भी वीर सैनिक हुए, जिनकी वापसी की न तो काई उम्मीद रही और न ही उनके पार्थिव देह को देश की मिट्टी नसीब हो सकी। हरियाणा के दादरी जिले के डलावास गांव के वीरचक्र विजेता शहीद नायक उमेद सिंह उन्हीं वीर सैनिकों में से एक थे। अब बुजुर्ग हो चुकीं शहीद की पत्नी लक्ष्मी देवी लगभग 20 साल की उम्र में उस वक्त विधवा हो गई थीं, जब उमेद सिंह 1971 में बंगलादेश के साथ युद्ध में शहीद हो गए। उनकी वीरता को देखते हुए भारत सरकार ने मरणोपरांत वीर चक्र के सैन्य सम्मान से अलंकृत किया। लक्ष्मी देवी ने बताया कि उनके पति वीरगति को प्राप्त हो गए, इसे लेकर एक टेलीग्राम आया। उसके बाद उनका कुछ अता-पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि उनकी पहली तैनाती पंजाब पुलिस में थी। पंजाब सरकार की ओर से उन्हें एक लाख 25 हजार रुपये सालाना मिलते हैं। सरकार की ओर से गैस एजेंसी आदि देने की घोषणाएं आज भी अधूरी हैं।
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