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चंडीगढ़ की मार्केटों में जगह नहीं: व्यापारी दुकान के लिए तरस रहे, प्रशासन ने 300 बूथों पर जड़ा ताला
Mon, 10 Mar 2025 01:45 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Mar 2025 01:45 AM IST
सार
विभिन्न सेक्टरों में लगभग 300 बूथ तीन दशकों से खाली पड़े हैं। प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बार वर्ष 2012 में सेक्टर-24 की कृष्णा मार्केट में बूथों का आवंटन हुआ था। इसके बाद से अब तक कोई नई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
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चंडीगढ़ सेक्टर 11 मार्केट में खाली पड़े बूथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ के कई मार्केटों में पिछले तीन दशकों से सैकड़ों बूथ खाली पड़े हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक इनकी सुध नहीं ली। आखिरी बार 2012 में कुछ बूथों का आवंटन हुआ था, लेकिन उसके बाद से न ही नए आवंटन की प्रक्रिया हुई और न ही इन बंद पड़े बूथों की देखरेख। नतीजतन, राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है और कई स्थानों पर अवैध कब्जे बढ़ रहे हैं। कई बंद पड़े बूथों के अब ताले भी टूट चुके हैं।
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विभिन्न सेक्टरों में लगभग 300 बूथ तीन दशकों से खाली पड़े हैं। प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आखिरी बार वर्ष 2012 में सेक्टर-24 की कृष्णा मार्केट में बूथों का आवंटन हुआ था। इसके बाद से अब तक कोई नई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। प्रशासन यदि खाली बूथों का सही तरीके से अलॉटमेंट करता, तो प्रत्येक बूथ से हर महीने हजारों रुपये की आमदनी हो सकती थी।
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यदि एक बूथ का औसत किराया 10,000 रुपये प्रति माह भी माना जाए तो 300 बूथों से प्रशासन को हर महीने करीब 30 लाख रुपये और सालभर में 3.6 करोड़ रुपये की आय हो सकती थी। अगर इन बूथों का किराया बीते 30 वर्षों से आ रहा होता, तो प्रशासन को अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो सकता था, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण यह सरकारी संपत्ति न सिर्फ बेकार पड़ी है, बल्कि कई स्थानों पर इन पर अवैध कब्जे भी हो चुके हैं।
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कई स्थानों पर इन्हें अस्थायी गोदाम बना दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बाजारों में दुकानदारों और व्यापारियों को जगह की जरूरत है तो इतने बूथ खाली क्यों पड़े हैं।
इन मार्केटों में खाली हैं बूथ
- सेक्टर-11 मिनी मार्केट: 53 बूथ खाली- सेक्टर-27 जनता मार्केट: 23 बूथ खाली
- सेक्टर-46: 28 बूथ खाली
- सेक्टर-7, 8, 9, 15, 18, 22, 23, 37, 40, 42, 43 और 47 में भी कई बूथ खाली
प्रशासन ने डेथ ट्रांसफर पर भी लगाई रोक
वर्ष 2004-05 के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने डेथ ट्रांसफर पर भी रोक लगा दी, जिससे सैकड़ों परिवार परेशान हैं। करीब 250 से 300 ऐसे केस हैं, जहां परिवार का सदस्य गुजर चुका है, लेकिन प्रशासन ने बूथ उनके उत्तराधिकारियों को ट्रांसफर नहीं किया। पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब घर और अन्य संपत्तियों का उत्तराधिकार संभव है तो बूथों का ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा।34 साल से बूथ के इंतजार में तीन मार्केट के दुकानदार
रेहड़ी मार्केट के दुकानदारों के लिए पक्के बूथ बनाकर देने की स्कीम 1990-91 में आई थी। 1991 में रजिस्ट्रेशन हुए और बाद में बूथ के लिए तीन हजार रुपये एडवांस लिए गए। सभी को कार्ड भी बना कर दिए गए। लगभग 3900 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से अधिकतर को बूथ अलॉट कर दिए गए हैं, लेकिन सेक्टर-28, 29 और रामदरबार के करीब 209 रेहड़ी मार्केट के दुकानदार को आज तक बूथ अलॉट नहीं किए गए हैं। ये अभी भी कच्ची मार्केट में ही हैं।सेक्टर-29 मार्केट के दुकानदार हरीश चंदर ने कहा कि पहले हर साल 350 रुपये लाइसेंस फीस जाती थी। विभाग 15 साल से वह भी नहीं ले रहा है। कह रहे हैं कि बूथ अलॉट होंगे तो इकट्ठे ले लेंगे। दुकानदार चिंतित हैं कि इकट्ठे कहां से देंगे।