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युवक फंदे से लटका मिला, पिता को हत्या का शक 12 साल से काट रहा थाने के चक्कर
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चंडीगढ़। सेक्टर-51 की ईएसआई सोसाइटी में 12 साल पहले युवक करण गोयल का शव पंखे से लटकता मिला था। जांच में पुलिस ने आत्महत्या करार दिया था। वहीं, बेटे का पैर जमीन से छूने के कारण पिता को शक है कि आत्महत्या नहीं, हत्या की गई है। पिता चंद्रमोहन गोयल पिछले 12 साल से थानों के चक्कर व अधिकारियों से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं।
वीरवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान चंद्रमोहन गोयल ने बताया कि साल वह 2009 में सेक्टर-34 में रहते थे। उनका बेटा करण गोयल उनसे अलग सेक्टर-51 ईएसआई सोसाइटी में एक युवती के साथ रह रहा था। 3 मई 2009 को उनके बेटे का शव पंखे के हुक से लटकता मिला था, लेकिन करण का पैर जमीन से छू रहा था। उनका कहना है कि इस तरह बेटा कभी आत्महत्या नहीं कर सकता था। उनका बेटा युवती से शादी करना चाहता था, लेकिन युवती उससे पीछा छुड़ा रही थी। पिता का आरोप है कि युवती और उसके घरवालों ने करण से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर शव फंदे से लटका दिया, ताकि इससे आत्महत्या करार दिया जाए। उधर, पुलिस 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई कर केस से पल्ला झाड़ रही है।
चंद्रमोहन गोयल ने बताया कि उन्होंने जून 2015 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने तत्कालीन डीजीपी को एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद से वह तकरीबन 200 से ज्यादा बार थाने व उच्च अधिकारियों के पास इंसाफ के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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वीरवार को सेक्टर-27 स्थित प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान चंद्रमोहन गोयल ने बताया कि साल वह 2009 में सेक्टर-34 में रहते थे। उनका बेटा करण गोयल उनसे अलग सेक्टर-51 ईएसआई सोसाइटी में एक युवती के साथ रह रहा था। 3 मई 2009 को उनके बेटे का शव पंखे के हुक से लटकता मिला था, लेकिन करण का पैर जमीन से छू रहा था। उनका कहना है कि इस तरह बेटा कभी आत्महत्या नहीं कर सकता था। उनका बेटा युवती से शादी करना चाहता था, लेकिन युवती उससे पीछा छुड़ा रही थी। पिता का आरोप है कि युवती और उसके घरवालों ने करण से पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर शव फंदे से लटका दिया, ताकि इससे आत्महत्या करार दिया जाए। उधर, पुलिस 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई कर केस से पल्ला झाड़ रही है।
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चंद्रमोहन गोयल ने बताया कि उन्होंने जून 2015 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने तत्कालीन डीजीपी को एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद से वह तकरीबन 200 से ज्यादा बार थाने व उच्च अधिकारियों के पास इंसाफ के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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