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भूख से तड़प रहे कबाड़ी मार्केट के मजदूर

Sun, 10 May 2020 02:21 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 10 May 2020 02:21 AM IST
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The workers of the flea market are suffering from hunger
चंडीगढ़। कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन और कर्फ्यू ने हर वर्ग की कमर तोड़ दी है। सबसे अधिक परेशान है तो वह हैं दिहाड़ी मजदूर। अब मजदूरों को देखनेवाला कोई नहीं। जो उनके पास कमाया हुआ धन था वह सब खर्च हो गया।
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हम बात कर रहे हैं इंडस्ट्रियल एरिया फेज- एक स्थित एमडबल्यू के कबाड़ी मार्केट के मजदूरों के हालतों की। कबाड़ी मार्केट में करीब डेढ़ सौ दिहाड़ी मजदूर हैं। कबाड़ी मार्केट में बावन दुकानें हैं। कुछ दुकानों में काम करते हैं और कुछ अपनी खुद की दिहाड़ी पर। हर रोज तीन सौ से लेकर साढ़े तीन सौ रुपये की दिहाड़ी मिलती थी।
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लॉकडाउन के कारण मार्केट बंद होने से रोजगार भी बंद हो गया। उनके पास पैसे भी नहीं हैं और न अन्न के दाने। पहले कुछ एनजीओ खाना लेकर पहुंच जाते थे लेकिन अब सभी ने अपना अपना मुंह मोड़ लिया है। मजदूरों का एक एक पल परेशान कर रहा है।
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घर जाने के लिए पैदल निकले थे रास्ते से लौटा दिए गए
भूख से परेशान मजदूरों ने सोचा कि अब चंडीगढ़ में खाना नहीं मिल रहा है तो घर चला जाए। मीलों पैदल चलने के बाद यमुनानगर से पुलिस ने वापस कर दिया। करीब सताइस मजदूर यूपी के कुशीनगर जिले में अपने घर के लिए चले थे। कुछ मजदूरों को बरवाला के पास मौली से वापस भेज दिया गया। मजदूरों में बिहार के जिला बेतिया के सुरेश, मोतीहारी के प्रभु, कमलेश और गोपालगंज के हीरा का कहना है कि अब घर जाना चाहते हैं। घर पर भी खाने के लिए कुछ भी नहीं है। कम से कम परिवार के साथ तो भूखे रहेंगे। ये सभी मजदूर पच्चीस वर्ष से लेकर पैंतालीस वर्ष के उम्र के हैं। सभी दो वर्ष से लेकर आठ वर्ष से कबाड़ी मार्केट में काम कर रहे हैं।

भूखे मजदूूरों का चेहरा देखा नहीं जाता : दिनेश कुमार
सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि वे प्रयास करते हैं कि मजदूरों को खाना मिल जाए। अब मजदूरों की परेशानी देखा नहीं जाता। दिल कांप जाता है। प्रशासन के अधिकारी इस पर ध्यान दें। कोरोना से भी अधिक परेशानी भूख ने डाल दिया है।
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