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Chandigarh News: मोरनी के 40 हजार किसानों के मालिकाना हक तय होने का रास्ता साफ

Tue, 09 Jun 2026 02:48 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2026 02:48 AM IST
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The way is clear for the ownership rights of 40,000 farmers of Morni
चंडीगढ़। ट्राइसिटी की आबोहवा के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले मोरनी हिल्स के 40 हजार किसानों के मालिकाना हक तय करने का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रास्ता साफ कर दिया है। वन भूमि के सर्वे और सीमांकन कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक सप्ताह के भीतर 60 सेवानिवृत्त पटवारी और चार कानूनगो वन बंदोबस्त अधिकारी (फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर) के पास तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
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अदालत ने कहा कि कर्मचारियों की कमी को बहाना बनाकर इतने महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कार्य को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। मोरनी हिल्स केवल हरियाणा का एकमात्र पर्वतीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि ट्राइसिटी के लिए प्राकृतिक ऑक्सीजन बैंक की भूमिका भी निभाता है। ऐसे में इसके संरक्षण से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जा सकती। जंगलों को संरक्षित करने और भू मालिकों के मालिकाना हक को तय करने की दिशा में हाईकोर्ट ने अब बड़ा कदम उठाया है।
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मामले की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सजल बंसल और अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने बताया कि सर्वे और सेटलमेंट की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन राजस्व विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने 12 मई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के मिनट्स भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। बैठक में निर्णय लिया गया था कि वन भूमि के सीमांकन और रिकॉर्ड तैयार करने के कार्य में तेजी लाने के लिए 60 सेवानिवृत्त पटवारी और चार कानूनगो उपलब्ध कराए जाएंगे।
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खंडपीठ ने कहा कि अब यह प्रस्ताव केवल सरकारी फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सभी कर्मचारियों की तैनाती एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित की जाए ताकि सर्वेक्षण, सीमांकन और रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जा सके। 20 जून 2025 को विजय बंसल मामले में हाईकोर्ट ने मोरनी हिल्स को ट्राइसिटी के फेफड़े बताते हुए निर्देश दिया था कि अधिसूचित वन भूमि को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा-20 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया जाए। इसके लिए फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर को सर्वे, डिमार्केशन, नक्शा तैयार करने, भूमि संबंधी विवादों के निपटारे और सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों के साथ पूरी प्रक्रिया संपन्न करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने तब तक क्षेत्र में सभी गैर-वन गतिविधियों पर रोक जारी रखने के भी निर्देश दिए थे जब तक रिजर्व फॉरेस्ट की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो जाती।
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