फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   The Sunday Notbandi major impact on the car market, recession fears

नोटबंदी से संडे कार बाजार पर बड़ा असर, मंदी की आशंका 

Sat, 19 Nov 2016 11:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 19 Nov 2016 11:00 PM IST
विज्ञापन
The Sunday Notbandi major impact on the car market, recession fears
नोटबंदी का असर - फोटो : social media

500 और एक हजार रुपये के नोट बंद का होने का असर संडे कार बाजार पर बुरी तरह से पड़ा है। पिछले संडे को मुश्किल से सिर्फ दो कारे ही बिकी है, वहीं आज फिर से कार बाजार लगने जा रहा है।  

विज्ञापन


नोटबंदी से पहले बाजार में जहां हर रविवार को 150 से 200 कारें बिक जाया करती थी वहीं सरकार के फैसले के बाद पिछले संडे को दो कारें भी बड़ी मुश्किल से बिकीं है। जिक्रयोग है कि संडे कार बाजार में 80 प्रतिशत कारोबार नगद लेनदेन से होता है।
विज्ञापन


विमुद्रीकरण के कारण लोगों के पास कैश की कमी हो गई है। इससे गाड़ियों की खरीद-फरोख्त पर बुरा असर पड़ा है। वहीं कार डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुलशन कुमार का कहना है कि सेक्टर-7 मध्य मार्ग पर बाजार लगाने के लिए प्रति कार डीलर को 17 से 20 हजार रुपये का खर्चा पड़ता है। डीलर्स ने नगर निगम को एडवांस राशि दी हुई है, इसलिए कार बाजार लगाना मजबूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हल्लोमाजरा के लिए आई सिर्फ तीन बिड 
नगर निगम ने कार बाजार को हल्लोमाजरा में शिफ्ट करने की योजना बनाई है, लेकिन इसकी नीलामी के लिए सिर्फ तीन डीलर्स ने ही बिड दी है। डीलर्स यहां पर बाजार शिफ्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं, जबकि हाईकोर्ट के आदेश पर निगम ने हल्लोमाजरा में 500 कारें पार्क करने के लिए जगह तैयार की है। 

नोटबंदी के बाद नहीं हुई कोई रजिस्ट्री 

The Sunday Notbandi major impact on the car market, recession fears
note

इस समय जो मध्य मार्ग पर कार बाजार लगता है उसमें पंजाब व हरियाणा से भी डीलर्स आकर कारोबार करते है। इस समय नगर निगम हर सप्ताह के लिए एक साइट का 2810 रुपये चार्ज करता है, जबकि नीलामी होने से हर सप्ताह पैसा जमा करने का झझंट से छुटकारा मिल जाएगा।

सेब का कारोबार भी ठंडा हुआ : 
हालांकि सेब का सीजन 70 प्रतिशत समाप्त हो गया है, लेकिन पुराने 500 और एक हजार के नोट बंद होने का भी असर इस पर पड़ा है। कई आढ़तियों ने अपनी दुकानें भी बंद कर दी है। 

मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन एवं आढ़ती दिनेश महाजन का कहना है कि किन्नौर और कश्मीर से सेब की फसल आ रही है, लेकिन खरीदारों के पास 100 के नोट न होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है।

नोटबंदी के बाद नहीं हुई कोई रजिस्ट्री 
शहर के प्रॉपर्टी बाजार में भारी मंदी छाई हुई है। आठ नवंबर के बाद से शहर में एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed