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Chandigarh News: स्थिति गंभीर... सात में से एक व्यक्ति मानसिक विकार का शिकार

Tue, 10 Oct 2023 02:30 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Oct 2023 02:30 AM IST
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The situation is serious...one in seven people is a victim of mental disorder.
चंडीगढ़। कोविड के बाद मनोरोग तेजी से बढ़ रहा है। देश में पहले 10 में से एक व्यक्ति मानसिक विकार से ग्रस्त था लेकिन अब यह संख्या 7 में एक पर आ गई है। यह स्थिति बेहद गंभीर है। ऐसे में जरूरी है कि बचाव पर खुलकर बात की जाए। यह कहना है पीजीआई मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख देवाशीष बासु का। डॉ. देवाशीष ने बताया कि यूएसए में यह आंकड़ा 40/60 का है। डॉ. देवाशीष का कहना है कि अब जरूरत मानसिक विकार उत्पन्न होने से पहले उस पर काबू पाने के उपाय करने की है। इलाज के साथ बचाव पर व्यापक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले लोगों में अवसाद, चिंता और ब्रेन फॉग जैसे विकारों और नकारात्मक भावनाओं के विकसित होने का जोखिम अधिक होता है। मनोरोग विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सोशल मीडिया से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए क्योंकि बार-बार दिखने वाले नकारात्मक कंटेंट्स का मानसिक स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव हो सकता है।
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बायाे साइको सोशल मॉडल है महत्वपूर्ण
पीजीआई मनोरोग विभाग के डॉ. राहुल चक्रवर्ती का कहना है कि मनाेरोग के लिए बायाे साइको सोशल मॉडल महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से ही लोगों में मानसिक विकार होने या न होने का पता चलता है। जैसे बायोलॉजिकल फैक्टर के कारण व्यक्ति में अलग-अलग क्षमता उत्पन्न होती है जो बाकियों से कम या ज्यादा हो सकती है। इसके साथ ही साइकोलॉजिकल फैक्टर के कारण भी अलग-अलग व्यक्ति विषम परस्थिति में अलग-अलग स्तर पर निर्णय लेते हैं। वहीं, सोशल फैक्टर के कारण किसी सामाजिक समस्या को लेकर भी व्यक्तियों की सोच अलग-अलग हो सकती है। इस तीनों के आधार पर ही मानसिक विकार का आकलन किया जा सकता है।
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बचाव में इनकी भूमिका अहम
डॉ. राहुल का कहना है कि इन स्थितियों के कारण मानसिक विकार का शिकार होने वाले बच्चे, युवा या बुजुर्ग को घर में बड़े-बुजुर्ग, स्कूल में टीचर और दोस्त आसानी से पता लगा सकते हैं। बच्चा अगर स्कूल में अचानक आगे वाली सीट के बजाय पीछे बैठने लगे, उसके ड्रेस की स्थिति अचानक खराब हो जाए। वह होम वर्क न करे। पाठ याद न करें। टिफिन खत्म न करें, बाकी बच्चों से अलग-थलग रहे, आंखें मिलाकर बात न करे तो समझिए कुछ गड़बड़ी है। ठीक ऐसे ही युवा अगर दोस्तों से कटने लगे, घर में अकेले समय बिताए, ज्यादा समय स्क्रीन पर गुजारे, खाना-पीना अचानक कम कर दे, घरवालों के साथ बैठना बंद कर दे, अकेले रहे तो सचेत हो जाइए।
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इसका भी रखें ध्यान
-मानसिक तनाव को कम करने के लिए अपनी समस्याओं के बारे में परिजनों और दोस्तों से बातें शेयर करें।
-स्ट्रेस से निजात पाने के लिए एक्सरसाइज करें, साथ ही खानपान पर ध्यान दें।
-लोगों के साथ घूम फिरें और बातें करें।
-सकारात्मक विचारों को अपनाएं।
-अच्छी पुस्तकें पढ़ें।
-नींद पूरी लें, इससे काफी अच्छा असर पड़ेगा।
-इसके अलावा सोशल मीडिया और कंप्यूटर पर काम कम करें।
-छोटे बच्चों के साथ समय बिताएं।
-यदि समस्या ज्यादा बढ़े तो डॉक्टर के सुझाव लें।

पीजीआई में बाल मनोरोगियों की बढ़ रही संख्या
ओपीडी 2021 2020 2019 2018
नए मरीज 13956 13599 14887 20809
पुराने रोगी 84621 75004 103074 72802
भर्ती मरीज 325 305 309 2484

बाल एवं किशोर मनोरोग क्लीनिक
ओपीडी 2021 2020 2019 2018
नए रोगी 12425 1171 1226 1069
पुराने रोगी 3752 3494 2577 1777
भर्ती मरीज 152 103 72 49
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