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Chandigarh News: नाटक ने दो पीढ़ियों के आपसी तनाव और पारिवारिक संघर्ष को दर्शाया
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में शुक्रवार को विश्व रंगमंच दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान फिल्म राइटर जगदीप ने अपने अनुभव साझा किए और लेखक बनने की यात्रा बताई। उन्होंने कहा कि “हमें करामात की नहीं, मुलाकात की जरूरत है, क्योंकि यह संवाद को जन्म देती है।”
कार्यक्रम की शुरुआत विश्व रंगमंच दिवस के संदेश के पंजाबी अनुवाद से हुई, जिसे शब्दीस ने साझा किया। यह संदेश फिल्म अभिनेता विलियम डिफोय का था, जिसमें उन्होंने रंगमंच की सोच को चुनौती देने वाली शक्ति और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता को बताया।
इसके बाद सार्थक रंगमंच पटियाला की टीम ने डॉ. लक्खा लहरी के निर्देशन में नाटक पीढ़ी दर पीढ़ी का मंचन किया। यह कामता नाथ की कहानी का नाटकीय रूपांतरण है और दो पीढ़ियों के आपसी तनाव व पिता-पुत्र संबंधों को दर्शाता है।
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नाटक की विशेषता यह रही कि कलाकार दर्शकों के सामने ही कपड़े बदलते हुए नए रोल में ढलते थे। पिता, पुत्र और पत्नी की भूमिकाओं में कर्मन सिद्धू ने शानदार अभिनय किया। कार्यक्रम ने दर्शकों को नाट्य कला और संवाद की महत्ता का अनुभव कराया। इस मौके पर डॉ. आत्मजीत, अते सिंह, जगजीत सरीन और महिंदर डोगरा भी उपस्थित रहे।
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कार्यक्रम की शुरुआत विश्व रंगमंच दिवस के संदेश के पंजाबी अनुवाद से हुई, जिसे शब्दीस ने साझा किया। यह संदेश फिल्म अभिनेता विलियम डिफोय का था, जिसमें उन्होंने रंगमंच की सोच को चुनौती देने वाली शक्ति और उसकी वैश्विक प्रासंगिकता को बताया।
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इसके बाद सार्थक रंगमंच पटियाला की टीम ने डॉ. लक्खा लहरी के निर्देशन में नाटक पीढ़ी दर पीढ़ी का मंचन किया। यह कामता नाथ की कहानी का नाटकीय रूपांतरण है और दो पीढ़ियों के आपसी तनाव व पिता-पुत्र संबंधों को दर्शाता है।
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नाटक की विशेषता यह रही कि कलाकार दर्शकों के सामने ही कपड़े बदलते हुए नए रोल में ढलते थे। पिता, पुत्र और पत्नी की भूमिकाओं में कर्मन सिद्धू ने शानदार अभिनय किया। कार्यक्रम ने दर्शकों को नाट्य कला और संवाद की महत्ता का अनुभव कराया। इस मौके पर डॉ. आत्मजीत, अते सिंह, जगजीत सरीन और महिंदर डोगरा भी उपस्थित रहे।