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नाटक बिच्छू : दो कंजूस व्यापारी बेटों के प्रेम संबंधों से रहते हैं नाराज
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चंडीगढ़। टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में बुधवार को नाटक बिच्छू का मंचन हुआ। यह मंचन थिएटर फॉर थिएटर और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और हरियाणा कला परिषद के सहयोग से 20वें विंटर नेशनल थिएटर फेस्टिवल के चौथे दिन हुआ। केहर सिंह ठाकुर के निर्देशन में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। नाटककार मोलियर की इस नाट्य रचना के उर्दू अनुवाद का हिमाचली रूपांतरण रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर द्वारा किया गया है। नाट्य प्रस्तुति में मूल भाषा हिंदी रखते हुए हिमाचली बोलियों के बहुत से शब्दों भरपूर इस्तेमाल किया गया है। नाटक की कहानी पारिवारिक सीधी सादी एवं मनोरंजक है।
नाटक में दिखाया गया है कि सेब के दो व्यापारी, लाला राम दास और लाला शाम दास बड़े कंजूस हैं। उनके दो बेटे, अजू और मुनीश अपने नौकर गोपू के साथ मिलकर अपने पिता से पैसे निकालने की कोशिश करते हैं। लाला शाम दास का बेटा अजू पैसे इसलिए चाहता है क्योंकि वह अपनी प्रेमिका नीलो को खानाबदोशों से छुड़ाना चाहता है। वहीं लाला राम दास का बेटा मुनीश अपनी प्रेमिका रोशनी की मदद के लिए पैसे की तलाश में है।
लाला शाम दास का नौकर हमेश भी अपने मालिक से पैसे निकालने में अजू की मदद करता है। दोनों के पिता नीलो और रोशनी नाम लड़कियों से नाराज होते हैं। उन्हें उनके खानदान का पता नहीं होता। वह अपने बेटों के प्रेम संबंधों को लेकर असंतुष्ट रहते हैं। कहानी का मोड़ तब आता है जब खुलासा होता है कि नीलो वास्तव में लाला शाम दास की बचपन में खोयी हुई बेटी है जबकि रोशनी लाला राम दास की बेटी निकलती है जो किसी दूसरी महिला के साथ लाला राम दास के दक्षिण भारत में हुए संबंध से पैदा हुई थी। नाटक में केहर सिंह ठाकुर, रेवत राम विक्की, परमानंद पिंकू, जीवानंद चौहान, सूरज, श्याम लाल, आंचल, गीतांजलि, सेजल, अन्यथा, जीया और पूनम ने अभिनय किया।
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नाटक में दिखाया गया है कि सेब के दो व्यापारी, लाला राम दास और लाला शाम दास बड़े कंजूस हैं। उनके दो बेटे, अजू और मुनीश अपने नौकर गोपू के साथ मिलकर अपने पिता से पैसे निकालने की कोशिश करते हैं। लाला शाम दास का बेटा अजू पैसे इसलिए चाहता है क्योंकि वह अपनी प्रेमिका नीलो को खानाबदोशों से छुड़ाना चाहता है। वहीं लाला राम दास का बेटा मुनीश अपनी प्रेमिका रोशनी की मदद के लिए पैसे की तलाश में है।
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लाला शाम दास का नौकर हमेश भी अपने मालिक से पैसे निकालने में अजू की मदद करता है। दोनों के पिता नीलो और रोशनी नाम लड़कियों से नाराज होते हैं। उन्हें उनके खानदान का पता नहीं होता। वह अपने बेटों के प्रेम संबंधों को लेकर असंतुष्ट रहते हैं। कहानी का मोड़ तब आता है जब खुलासा होता है कि नीलो वास्तव में लाला शाम दास की बचपन में खोयी हुई बेटी है जबकि रोशनी लाला राम दास की बेटी निकलती है जो किसी दूसरी महिला के साथ लाला राम दास के दक्षिण भारत में हुए संबंध से पैदा हुई थी। नाटक में केहर सिंह ठाकुर, रेवत राम विक्की, परमानंद पिंकू, जीवानंद चौहान, सूरज, श्याम लाल, आंचल, गीतांजलि, सेजल, अन्यथा, जीया और पूनम ने अभिनय किया।
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