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Chandigarh News: फतेहगढ़ साहिब कोर्ट परिसर में पेड़ों की कटाई का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फतेहगढ़ साहिब स्थित जिला न्यायिक परिसर में पूरी तरह से विकसित पेड़ों की अंधाधुंध और अवैध कटाई को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
फतेहगढ़ साहिब निवासी हर्षप्रीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए दावा किया कि लगभग 50 हरे पेड़ जिनमें से कुछ 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, बिना किसी कानूनी मंजूरी, पर्यावरणीय मंजूरी या पंजाब सरकार की ओर से बनाई गई गैर-वन सरकारी और सार्वजनिक भूमि के लिए वृक्ष संरक्षण नीति-2024 का पालन किए काटे जा रहे हैं। यह वृक्ष पक्षियों की कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं। 10 से ज्यादा पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं और अधिकारियों से बार-बार अपील करने के बावजूद पेड़ों की कटाई जारी है। बार-बार अपील के बावजूद, प्रतिवादियों ने पेड़ों की और कटाई रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।
याचिकाकर्ता ने वनों की कटाई को प्राकृतिक आपदाओं से जोड़ते हुए कहा है कि पंजाब पहले से ही व्यापक बाढ़ का सामना कर रहा है। कटाई से पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसी पर्यावरणीय संस्थाओं से अनुमति नहीं ली गई और क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की कोई योजना नहीं है। याचिकाकर्ता ने पेड़ों की और कटाई रोकने, पहले से हटाए गए पेड़ों के लिए मुआवजा देने और पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है।
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चंडीगढ़। फतेहगढ़ साहिब स्थित जिला न्यायिक परिसर में पूरी तरह से विकसित पेड़ों की अंधाधुंध और अवैध कटाई को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
फतेहगढ़ साहिब निवासी हर्षप्रीत सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए दावा किया कि लगभग 50 हरे पेड़ जिनमें से कुछ 50 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं, बिना किसी कानूनी मंजूरी, पर्यावरणीय मंजूरी या पंजाब सरकार की ओर से बनाई गई गैर-वन सरकारी और सार्वजनिक भूमि के लिए वृक्ष संरक्षण नीति-2024 का पालन किए काटे जा रहे हैं। यह वृक्ष पक्षियों की कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास हैं। 10 से ज्यादा पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं और अधिकारियों से बार-बार अपील करने के बावजूद पेड़ों की कटाई जारी है। बार-बार अपील के बावजूद, प्रतिवादियों ने पेड़ों की और कटाई रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है।
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याचिकाकर्ता ने वनों की कटाई को प्राकृतिक आपदाओं से जोड़ते हुए कहा है कि पंजाब पहले से ही व्यापक बाढ़ का सामना कर रहा है। कटाई से पहले राष्ट्रीय हरित अधिकरण जैसी पर्यावरणीय संस्थाओं से अनुमति नहीं ली गई और क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण की कोई योजना नहीं है। याचिकाकर्ता ने पेड़ों की और कटाई रोकने, पहले से हटाए गए पेड़ों के लिए मुआवजा देने और पर्यावरणीय मानदंडों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है।
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