फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   The long wait is over 20 years, chandigarh news

20 साल का लंबा इंतजार खत्म, शहर की हुई इरानी नागरिक 'सहर'

Sat, 24 Dec 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 24 Dec 2016 01:11 AM IST
विज्ञापन
The long wait is over 20 years, chandigarh news
- फोटो : Demo Pic
पिछले 20 साल से शहर में रह रही ईरानी नागरिक सहर लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिर शहर की हो गई हैं। भारत सरकार ने उन्हें देश की नागरिकता प्रदान कर दी है। यह जानकारी असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया चेतन मित्तल ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को शुक्रवार को दी। जस्टिस महेश ग्रोवर एवं जस्टिस शेखर धवन की खंडपीठ ने इस जानकारी के बाद याचिका का निपटारा कर दिया है। 
विज्ञापन


शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि इस मामले को हाईकोर्ट के आदेशों के तहत सहर के मामले को स्पेशल केस के तौर पर डील किया। इस दौरान सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा कर केंद्र सरकार ने सहर को भारत की नागरिकता दे दी है, हालांकि अभी तक ईरान सरकार ने सहर की ओर से वहां की नागरिकता छोड़ने के लिए दिए गए आवेदन पर फैसला नहीं लिया है। बावजूद इसके केंद्र सरकार ने इसे एक स्पेशल केस मानते हुए सहर को नागरिकता दे दी है। 
विज्ञापन


हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 30 जून को अपने फैसले में कहा था कि जब तक ईरान सरकार सहर को ईरान की नागरिकता छोड़े जाने की इजाजत नहीं दे देती तब तक उसे भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती। सिंगल जज के इसी फैसले के खिलाफ सहर ने डबल बेंच में अपील की थी। अपनी अपील में सहर ने कहा था कि उसने ईरान दूतावास में वर्ष 2013 में ही ईरान की नागरिकता छोड़े जाने की अर्जी दे दी थी। भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी अर्जी देकर भारत की नागरिकता का आवेदन कर दिया था, लेकिन अब तक ईरान सरकार ने इस पर कोई भी कार्यवाही नहीं है। ऐसे में अब उसने मांग की है की उसे भारत की नागरिकता दी जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

यह है मामला

The long wait is over 20 years, chandigarh news
सहर वर्ष 1996 में शिक्षा हासिल करने के लिए ईरान से भारत आई थी। वर्ष 2004 में चंडीगढ़ के विक्रम से उसने सेक्टर-46 के गुरुद्वारे में विवाह किया था। वर्ष 2005 में उसने मुस्लिम कानून के तहत भी उसी युवक से विवाह किया। लिहाजा, इस विवाह के आधार पर उसे वर्ष 2006 में 15 वर्ष की अवधि का पीआईओ कार्ड यानी की पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन कार्ड जारी कर दिया गया था।

पीआईओ कार्ड जारी होने के बाद सहर के वीजा को नियमित तौर एक्सटेंशन मिलती चली गई, लेकिन सहर के लिए परेशानी तब शुरू हुई, जब उसके पति ने उसे शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उससे दबाव में एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। बाद में सामने आया कि वह दस्तावेज तलाकनामा था। इसके खिलाफ सहर ने चंडीगढ़ की जिला अदालत में याचिका दायर कर इसे चुनौती दे दी थी। यह मामला अभी चंडीगढ़ की जिला अदालत में विचाराधीन है। इसके बाद सहर ने वर्ष 2010 में भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन कर दिया था।

इसके तीन वर्ष बाद 2013 में उसे बताया गया कि उसकी भारत की नागरिकता हासिल करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन शर्त लगा दी गई कि पहले उसे ईरान की नागरिकता छोड़नी होगी। इसके बाद सहर ने वर्ष 2013 में ईरान के दूतावास में ईरान की नागरिकता छोड़ने अर्जी दे दी थी, जिस पर अब तक ईरान सरकार ने कोई कार्यवाही ही नहीं की है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed