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Chandigarh News: बिजली सब्सिडी का बढ़ता बोझ, 2028-29 तक 25 हजार करोड़ के पार पहुंचेगा खर्च
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-समय पर भुगतान न होने से पावरकाम की माली हालत बिगड़ी, 10 हजार करोड़ बकाया
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रिंपी गुप्ता
पटियाला। पहले से कर्ज के दबाव में चल रहे पंजाब पर आने वाले वर्षों में बिजली सब्सिडी का आर्थिक बोझ और भारी होने जा रहा है। पावरकाम (पीएसपीसीएल) की ताजा आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2028-29 तक राज्य की बिजली सब्सिडी 25,227 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह सब्सिडी करीब 20,433 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। इस तरह चार साल में सब्सिडी राशि में 4,794 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 में बिजली सब्सिडी 20,324 करोड़ रुपये रही, जबकि 2023-24 में यह 17,744 करोड़ रुपये थी। लगातार बढ़ती सब्सिडी और सरकार की ओर से समय पर भुगतान न होने के कारण पावरकाम की आर्थिक मुश्किलें गहराती जा रही हैं। मौजूदा समय में राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के करीब 10,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। बताया जा रहा है कि सितंबर 2025 के बाद से नियमित भुगतान नहीं किया गया, जबकि पिछली अवधि की सब्सिडी भी लंबित है।
घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली बना बड़ी
वजह
पंजाब में पहले केवल खेतीबाड़ी क्षेत्र को बिजली सब्सिडी दी जाती थी। बाद में इसे औद्योगिक क्षेत्र तक बढ़ाया गया। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा दी गई। इसके चलते बिजली खपत में भारी इजाफा हुआ है। कई मामलों में एक ही घर में दो-दो कनेक्शन लेने की प्रवृत्ति भी सामने आई है। परिणामस्वरूप सर्दियों के मौसम में भी रिकॉर्ड बिजली खपत दर्ज की जा रही है। वर्तमान में राज्य के 90 फीसदी से अधिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं, जिसे सब्सिडी बढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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आने वाले वर्षों का अनुमान
पावरकाम की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में बिजली सब्सिडी बढ़कर 22,250 करोड़ रुपये हो जाएगी, जो मौजूदा अनुमान से 1,817 करोड़ अधिक है। वहीं 2027-28 में यह 23,691 करोड़ और 2028-29 में 25,227 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसमें खेतीबाड़ी और घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी।
सेक्टरवार अनुमानित बिजली सब्सिडी (करोड़ रुपये)
सेक्टर- साल 2026-27 2027-28 2028-29
घरेलू- 8253- 8830- 9447
इंडस्ट्री- 2747- 2937- 3141
खेतीबाड़़ी- 11249- 11924- 12640
इंजीनियर्स एसोसिएशन की चेतावनी
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि सब्सिडी पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते उसका भुगतान नियमित हो। भुगतान में देरी से कोयले और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद प्रभावित होती है। मरम्मत कार्यों, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में भी रुकावट आती है। पावरकाम को महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। उन्होंने बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।
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रिंपी गुप्ता
पटियाला। पहले से कर्ज के दबाव में चल रहे पंजाब पर आने वाले वर्षों में बिजली सब्सिडी का आर्थिक बोझ और भारी होने जा रहा है। पावरकाम (पीएसपीसीएल) की ताजा आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2028-29 तक राज्य की बिजली सब्सिडी 25,227 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह सब्सिडी करीब 20,433 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। इस तरह चार साल में सब्सिडी राशि में 4,794 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2024-25 में बिजली सब्सिडी 20,324 करोड़ रुपये रही, जबकि 2023-24 में यह 17,744 करोड़ रुपये थी। लगातार बढ़ती सब्सिडी और सरकार की ओर से समय पर भुगतान न होने के कारण पावरकाम की आर्थिक मुश्किलें गहराती जा रही हैं। मौजूदा समय में राज्य सरकार पर बिजली सब्सिडी के करीब 10,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। बताया जा रहा है कि सितंबर 2025 के बाद से नियमित भुगतान नहीं किया गया, जबकि पिछली अवधि की सब्सिडी भी लंबित है।
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घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली बना बड़ी
वजह
पंजाब में पहले केवल खेतीबाड़ी क्षेत्र को बिजली सब्सिडी दी जाती थी। बाद में इसे औद्योगिक क्षेत्र तक बढ़ाया गया। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद घरेलू उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली की सुविधा दी गई। इसके चलते बिजली खपत में भारी इजाफा हुआ है। कई मामलों में एक ही घर में दो-दो कनेक्शन लेने की प्रवृत्ति भी सामने आई है। परिणामस्वरूप सर्दियों के मौसम में भी रिकॉर्ड बिजली खपत दर्ज की जा रही है। वर्तमान में राज्य के 90 फीसदी से अधिक उपभोक्ताओं के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं, जिसे सब्सिडी बढ़ने का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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आने वाले वर्षों का अनुमान
पावरकाम की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 में बिजली सब्सिडी बढ़कर 22,250 करोड़ रुपये हो जाएगी, जो मौजूदा अनुमान से 1,817 करोड़ अधिक है। वहीं 2027-28 में यह 23,691 करोड़ और 2028-29 में 25,227 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसमें खेतीबाड़ी और घरेलू क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक रहेगी।
सेक्टरवार अनुमानित बिजली सब्सिडी (करोड़ रुपये)
सेक्टर- साल 2026-27 2027-28 2028-29
घरेलू- 8253- 8830- 9447
इंडस्ट्री- 2747- 2937- 3141
खेतीबाड़़ी- 11249- 11924- 12640
इंजीनियर्स एसोसिएशन की चेतावनी
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि सब्सिडी पर कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते उसका भुगतान नियमित हो। भुगतान में देरी से कोयले और बाहरी स्रोतों से बिजली खरीद प्रभावित होती है। मरम्मत कार्यों, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में भी रुकावट आती है। पावरकाम को महंगे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। उन्होंने बढ़ती समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।