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Chandigarh News: ड्रोन से हेरोइन तस्करी मामले में हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से किया इन्कार
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-नशा तस्करी समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
-- -
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। तरनतारन जिले के सराय अमानत खान थाना क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से गिराई गई 510 ग्राम हेरोइन के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि नशा सीधे तौर पर देश के युवाओं के जीवन और भविष्य पर हमला है। कोर्ट ने तर्क दिया कि नशीले पदार्थ समाज की जड़ों को खोखला करते हैं, अवैध धन आतंकवाद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और व्यक्ति के मानवीय व नैतिक गुणों को प्रभावित करता है।
अदालत ने कहा कि याची से बरामद मात्रा वाणिज्यिक स्तर की थी और उसके नाम जांच के दौरान सामने आए। इसके अलावा आरोपी के कथित रूप से दोबारा संलिप्त होने के आरोप भी हैं। ऐसे मामलों में हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत नशीले पदार्थों के अपराधों पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। न्यायपालिका का रुख निर्णायक और सख्त होना चाहिए ताकि देश के युवाओं और समाज को सुरक्षित रखा जा सके। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे अपराधियों को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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हाईकोर्ट का संदेश
-नशा तस्करी समाज और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
-अवैध धन आतंकवाद और संगठित अपराध को बढ़ावा देता है।
-युवा पीढ़ी का जीवन और भविष्य दांव पर है।
-मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी सामान्य अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। तरनतारन जिले के सराय अमानत खान थाना क्षेत्र में ड्रोन के माध्यम से गिराई गई 510 ग्राम हेरोइन के मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा कि नशा सीधे तौर पर देश के युवाओं के जीवन और भविष्य पर हमला है। कोर्ट ने तर्क दिया कि नशीले पदार्थ समाज की जड़ों को खोखला करते हैं, अवैध धन आतंकवाद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है और व्यक्ति के मानवीय व नैतिक गुणों को प्रभावित करता है।
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अदालत ने कहा कि याची से बरामद मात्रा वाणिज्यिक स्तर की थी और उसके नाम जांच के दौरान सामने आए। इसके अलावा आरोपी के कथित रूप से दोबारा संलिप्त होने के आरोप भी हैं। ऐसे मामलों में हिरासत में पूछताछ अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट के तहत नशीले पदार्थों के अपराधों पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। न्यायपालिका का रुख निर्णायक और सख्त होना चाहिए ताकि देश के युवाओं और समाज को सुरक्षित रखा जा सके। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे अपराधियों को अग्रिम जमानत नहीं दी जाएगी और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना न्यायपालिका की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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हाईकोर्ट का संदेश
-नशा तस्करी समाज और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाती है।
-अवैध धन आतंकवाद और संगठित अपराध को बढ़ावा देता है।
-युवा पीढ़ी का जीवन और भविष्य दांव पर है।
-मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं।