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Chandigarh News: संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी पर दर्ज एफआईआर हाईकोर्ट ने की रद्द
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-कोरोना के दौरान संक्रमण फैलाने के आरोप में दर्ज हुई थी एफआईआर
-2021 में दक्षिण अफ्रीका से भारत यात्रा पर आई थी मनमीत कौर
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी मनमीत कौर के खिलाफ कोविड-19 संक्रमण फैलाने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। याची 2021 में दक्षिण अफ्रीका से चंडीगढ़ यात्रा पर आई थीं।
जस्टिस एनएस शेखावत ने कहा कि धारा 269 आईपीसी के तहत मामला तब दर्ज होता है जब आरोपी ने ऐसा लापरवाह कृत्य किया हो, जिससे जानलेवा बीमारी फैलने की संभावना हो। याचिकाकर्ता ने यात्रा के दौरान आरटी-पीसीआर परीक्षण कराया था और किसी भी देश की स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा उन्हें कोविड-19 पॉजिटिव घोषित नहीं किया गया। भारत में भी उनके परीक्षण की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत आरोपों को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत आता है, लेकिन धारा 195 (सीआरपीसी) के अनुसार, इस प्रकार के मामले में केवल संबंधित अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत के आधार पर ही मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने पाया कि इस मामले में कलेक्टर या उनके अधीनस्थ अधिकारी द्वारा कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। इसके अलावा चंडीगढ़ पुलिस की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट इस मामले में कानूनी आधार पर कमजोर पाई गई। सभी तथ्यों और कानून के अवलोकन के बाद, हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द कर दिया।
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-2021 में दक्षिण अफ्रीका से भारत यात्रा पर आई थी मनमीत कौर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी मनमीत कौर के खिलाफ कोविड-19 संक्रमण फैलाने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। याची 2021 में दक्षिण अफ्रीका से चंडीगढ़ यात्रा पर आई थीं।
जस्टिस एनएस शेखावत ने कहा कि धारा 269 आईपीसी के तहत मामला तब दर्ज होता है जब आरोपी ने ऐसा लापरवाह कृत्य किया हो, जिससे जानलेवा बीमारी फैलने की संभावना हो। याचिकाकर्ता ने यात्रा के दौरान आरटी-पीसीआर परीक्षण कराया था और किसी भी देश की स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा उन्हें कोविड-19 पॉजिटिव घोषित नहीं किया गया। भारत में भी उनके परीक्षण की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी। आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत आरोपों को देखते हुए अदालत ने कहा कि यह अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत आता है, लेकिन धारा 195 (सीआरपीसी) के अनुसार, इस प्रकार के मामले में केवल संबंधित अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत के आधार पर ही मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने पाया कि इस मामले में कलेक्टर या उनके अधीनस्थ अधिकारी द्वारा कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। इसके अलावा चंडीगढ़ पुलिस की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट इस मामले में कानूनी आधार पर कमजोर पाई गई। सभी तथ्यों और कानून के अवलोकन के बाद, हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द कर दिया।
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