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Chandigarh News: ईयू के साथ एफटीए ऐतिहासिक, टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गेम चेंजर

Wed, 28 Jan 2026 08:42 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 08:42 PM IST
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The FTA with the EU is historic and a game-changer for the textile sector.
-निटमा ने दी प्रधानमंत्री मोदी की सराहना, एफटीए से टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत बढ़त
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारतीय टेक्सटाइल और परिधान उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में घोषित यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजारों के दरवाजे पूरी तरह खोलने वाला है।
नाॅर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (निटमा) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह करार भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। करीब दो दशक की लंबी बातचीत के बाद भारत को यूरोपीय संघ में अपने निर्यात के लिए शून्य शुल्क का लाभ मिला है।
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ईयू भारत का दूसरा सबसे बड़ा टेक्सटाइल और परिधान निर्यात गंतव्य है। कुल वैश्विक आयात 263.5 अरब डॉलर के इस बाजार में 12 प्रतिशत तक के शुल्क समाप्त होने से भारत को बांग्लादेश, पाकिस्तान और तुर्किये जैसी प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलेगी। निटमा के अध्यक्ष सिद्धार्थ खन्ना ने कहा कि एफटीए भारतीय टेक्सटाइल वैल्यू चेन के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसका वास्तविक लाभ सतत उत्पादन, नवाचार और यूरोपीय बाजार की मांगों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
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प्रमुख लाभ और क्षेत्रीय प्रभाव
इस समझौते से गारमेंट्स, कपास और मैन-मेड फाइबर (एमएमएफ) पर शून्य शुल्क लागू होगा। इससे देश के 342 जिलों और टेक्सटाइल क्लस्टरों को मजबूती मिलेगी और लगभग 4.5 करोड़ लोगों की आजीविका सुरक्षित होगी। इसके साथ ही गैर-शुल्क बाधाओं में कमी, निवेश, तकनीक हस्तांतरण और हरित विनिर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा। सिद्धार्थ खन्ना ने भारत-आसियान एफटीए में मौजूद शुल्क असंतुलन की ओर भी ध्यान दिलाया, ताकि घरेलू मिलों को नुकसान से बचाया जा सके। निटमा का मानना है कि भारत-ईयू एफटीए से विकसित भारत का लक्ष्य और वैश्विक टेक्सटाइल हब बनने का सपना और मजबूत होगा।
खास बातें
-ब्रिटेन, ओमान और न्यूजीलैंड के हालिया समझौते भारत को भरोसेमंद वैश्विक सोर्सिंग हब बनाते हैं।
-भारत-आसियान एफटीए में कच्चे पॉलिएस्टर पर असमान शुल्क समस्या भी समाधान का विषय है।
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