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Chandigarh News: बाढ़ ने सरहद पार कराई, पाक जेल ने ढाई साल तक दी यातनाएं

Mon, 02 Feb 2026 09:17 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 09:17 PM IST
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The floods carried him across the border, and a Pakistani prison subjected him to torture for two and a half years.
–नहर में बहते ही गिरफ्तार, आंखों पर पट्टी बांधकर शुरू हुआ जीवन-मरण का संघर्ष
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–सजा पूरी होने के बाद भी भारत सुप्रीम कोर्ट से अनुमति तक बंद रखा गया

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अतुल मल्होत्रा
जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ ने सिधवां बेट क्षेत्र के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी हरविंदर पाल सिंह की जिंदगी बदल दी। अपने दोस्त रतनपाल सिंह के साथ बहन के घर मदद के लिए जाते समय तेज बहाव ने उन्हें गलती से पाकिस्तान में पहुंचा दिया। पाकिस्तानी सेना ने इसे जासूसी मानते हुए दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया।
हरविंदर बताते हैं कि उन्हें नहर से निकालते ही आंखों पर पट्टी बांध दी गई। 28 दिनों तक रोज़ पीटा गया, रातभर चलाने और चौकड़ी बैठाने की सज़ा दी गई और पैर सीधा करने पर लाठी मारी जाती थी। खाने के लिए केवल सूखी रोटी और कभी-कभार दाल या सब्ज़ी मिलती थी।
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लाहौर सेंट्रल जेल की बैरक में 20 से अधिक भारतीय कैदी बंद थे। हरविंदर और रतनपाल को कसूर सत्र न्यायालय ने 12 महीने की सज़ा और 10 हजार रुपये जुर्माना सुनाया। पैसे न होने पर सज़ा बढ़ाकर 13 महीने की गई, जिसे उन्होंने पूरा किया लेकिन सज़ा पूरी होने के बाद भी उन्हें 7 महीने और जेल में रखा गया, क्योंकि पाकिस्तान को भारत सुप्रीम कोर्ट से उनकी सौंपने की अनुमति चाहिए थी। हरविंदर को कोई वकील नहीं दिया गया। हरविंदर को हफ्ते में सिर्फ 10 मिनट फोन की अनुमति थी। परिवार की मेहनत के बाद, 31 जनवरी की रात वाघा बॉर्डर पर भारत को सौंपा गया।
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जेल का सदमा और वर्तमान स्थिति
ढाई साल की कैद ने हरविंदर से पिता मुख्तियार सिंह का अंतिम संस्कार तक छीन लिया। अब भी पाकिस्तान की जेलों में सैकड़ों भारतीय कैदी बंद हैं। उन्होंने भारत-पाक सरकारों से बुजुर्ग कैदियों की हर साल अदला-बदली की मांग की। मेडिकल जांच के बाद उन्हें गुरु नानक मेडिकल कॉलेज, अमृतसर भेजा गया और फिर परिवार के हवाले किया गया।
पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदियों की स्थिति
-कई कैदी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं
-जबरन काम कराया जाता है
-अदला-बदली के लिए भारत-पाक नियमित समझौता नहीं
-बुजुर्ग कैदियों को परिवार के साथ अंतिम दिन बिताने का अधिकार नहीं
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