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सुमेध सैनी मामले के एफआईआर रिकॉर्ड पर सीबीआई कोर्ट में आज होगी बहस
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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आईएएस अधिकारी के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के लापता होने के लगभग 29 साल पुराने मामले में पंजाब पुलिस ने सीबीआई का दरवाजा खटखटाया है। पंजाब पुलिस ने चंडीगढ़ सीबीआई से इस मामले की एफआईआर का रिकॉर्ड मांगा था, जिसके जवाब में सीबीआई ने पंजाब पुलिस से कहा है कि उनके पास 29 साल पुराने इस मामले का कोई रिकॉर्ड नहीं है। पॉलिसी के अनुसार उन्होंने रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया था। अब इस मामले में 8 जून को सीबीआई अदालत में बहस होगी।
दरअसल, पिछले महीने इस मामले में दोबारा पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत चंडीगढ़ पुलिस के आठ पूर्व मुलाजिमों पर किडनैपिंग का केस दर्ज किया गया है। इन आरोपियों में कई तो रिटायर्ड हो चुके हैं जबकि एक का देहांत हो चुका है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ मोहाली के मटौर थाने में केस दर्ज किया गया है। हालांकि सुमेध सैनी को मोहाली अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
पंजाब पुलिस ने अपनी याचिका में उल्लेख किया कि सीबीआई को मामले की एफआईआर का रिकॉर्ड उन्हें सौंप देना चाहिए, क्योंकि वह दोबारा मामले की जांच कर रहे हैं। अपने जवाब में सीबीआई ने कहा कि 2008 में हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद सीबीआई ने संबंधित विभागों से जानकारी और दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर एफआईआर को खारिज कर दिया था।
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यह है मामला
1991 में सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ में एसएसपी के पद पर तैनात थे। इस दौरान सैनी पर एक जानलेवा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात चार मुलाजिम मारे गए थे। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस के दो अधिकारियों ने बलवंत सिंह मुल्तानी को 11 दिसंबर, 1991 को मोहाली स्थित उसके घर से उठा लिया था। उन्होंने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी थी। सीबीआई द्वारा 2008 में दर्ज किए मामले में बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन एसएसपी चंडीगढ़ सुमेध सिंह के आदेश पर उसके भाई को सेक्टर-17 पुलिस थाने ले जाया गया था। इस पर उन्होंने मुल्तानी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर प्राथमिक जांच की गई थी। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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दरअसल, पिछले महीने इस मामले में दोबारा पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत चंडीगढ़ पुलिस के आठ पूर्व मुलाजिमों पर किडनैपिंग का केस दर्ज किया गया है। इन आरोपियों में कई तो रिटायर्ड हो चुके हैं जबकि एक का देहांत हो चुका है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ मोहाली के मटौर थाने में केस दर्ज किया गया है। हालांकि सुमेध सैनी को मोहाली अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी।
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पंजाब पुलिस ने अपनी याचिका में उल्लेख किया कि सीबीआई को मामले की एफआईआर का रिकॉर्ड उन्हें सौंप देना चाहिए, क्योंकि वह दोबारा मामले की जांच कर रहे हैं। अपने जवाब में सीबीआई ने कहा कि 2008 में हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद सीबीआई ने संबंधित विभागों से जानकारी और दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी आधार पर एफआईआर को खारिज कर दिया था।
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यह है मामला
1991 में सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ में एसएसपी के पद पर तैनात थे। इस दौरान सैनी पर एक जानलेवा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात चार मुलाजिम मारे गए थे। इस दौरान चंडीगढ़ पुलिस के दो अधिकारियों ने बलवंत सिंह मुल्तानी को 11 दिसंबर, 1991 को मोहाली स्थित उसके घर से उठा लिया था। उन्होंने इसकी जानकारी किसी को नहीं दी थी। सीबीआई द्वारा 2008 में दर्ज किए मामले में बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तत्कालीन एसएसपी चंडीगढ़ सुमेध सिंह के आदेश पर उसके भाई को सेक्टर-17 पुलिस थाने ले जाया गया था। इस पर उन्होंने मुल्तानी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर प्राथमिक जांच की गई थी। शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।