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Chandigarh News: गिरते भूजल को बढ़ाएगा विभाग, 66 लाख से सुधरेगी तालाबों की हालत

Sun, 02 Jul 2023 01:52 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jul 2023 01:52 AM IST
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The department will increase the falling groundwater, the condition of the ponds will improve by 66 lakh
मोहाली। दिन-प्रतिदिन भूजल का स्तर घटता जा रहा है। पंजाब में जलस्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। बीते कुछ सालों में 23 जिलों में से 20 जिलों का भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है। आने वाले समय में और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
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सेंट्रल ग्राउंड वाटर की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब की धरती से 2037 तक 300 मीटर तक पानी खत्म हो जाएगा। इसी स्थिति से निपटने के लिए और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मृदा एवं जल सरंक्षण विभाग जल निकायों और तालाबों की सफाई करेगा जिससे न सिर्फ ग्राउंड वाटर रिचार्ज होगा बल्कि तालाबों के पानी को खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाएगा। वाटरशेड विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के तहत शिवालिक के मैदानी जिले मोहाली, रोपड़, नवांशहर, गुरदासपुर, होशियारपुर, पठानकोट जिलों में शुरू किया जा रहा है। इसमें सिर्फ मोहाली के ग्रामीण इलाकों के तालाबों को 66 लाख रुपये की लागत से साफ कर इसका पानी ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने में लगाया जाएगा।
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खेती में कम इस्तेमाल हो भूजलमृदा एवं जल सरंक्षण विभाग के एक्सईएन गुरविंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि ग्राउंड वाटर कम से कम निकाला जाए और तालाबों का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल हो, इसका प्रयास किया जा रहा है। समय के साथ तालाबों में गंदगी भर जाती है जिससे यह पानी तालाब में खड़ा रह जाता है और जमीन तक नहीं पहुंच पाता। इसके लिए अब विभाग तालाब में से गाद को निकालेगा जिससे बारिश का पानी जमीन में जा सके। पानी जो तालाब में जमा होगा उसे सिंचाई के लिए खेतों में भेजा जाएगा ताकि कम से कम उस तालाब के आसपास के इलाकों से किसान भूजल न निकालें।
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एक किलो धान उगाने में लगता है तीन से चार हजार लीटर पानीडीएससीओ (डिवीजनल सॉयल कनजरवेशन अफसर) हरजिंदर सिंह बताते हैं कि पंजाब का 90 प्रतिशत पानी सिर्फ खेतीबाड़ी में ही इस्तेमाल होता है। विभाग का मकसद खेतीबाड़ी में भूजल का कम इस्तेमाल हो। पंजाब की मुख्य खेती चावल की है। एक किलो चावल उगाने के लिए करीब तीन से चार हजार लीटर पानी लग जाता है इसलिए सरकार धान की सीधी बिजाई (डीएसआर-डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस) पर भी जोर दे रही है। पिछली बार 17 लाख हेक्टेयर में सीधी बिजाई की गई थी। इस बार इस लक्ष्य को दोगुना करने की कोशिश है। इतना ही नहीं खेतों में स्प्रिंकलर लगाने के लिए सब्सिडी भी दी जा रही है।



भूजल सही तरीके से इस्तेमाल न किया तो 15 साल में हो जाएगा खत्मः रिपोर्ट

पंजाब में पानी की जरूरत 63-64 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) है। अभी हालत यह है कि अगर 100 लीटर पानी धरती में गया है तो 120 लीटर निकाला जा रहा है। जितना पानी बारिश से जा रहा है, उससे ज्यादा पानी धरती से निकाला जा रहा है। जिस हिसाब से पानी निकाल रहे हैं, उस हिसाब से आने वाले 15 साल में भूजल खत्म हो जाएगा। एक हजार फुट नीचे से पानी निकालना वैसे भी मुश्किल है। इसके लिए 100 हॉर्स पावर का ट्यूबवेल लगाना पड़ेगा। इसके लिए खर्च न राज्य कर पाएगा और न किसान।
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