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Chandigarh News: बेटी के फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और पॉलीग्राफ टेस्ट से पुलिस को मिली लीड
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बीबी गोयल की पत्नी सीमा की हत्या मामले में पुलिस ने प्रोफेसर और उनकी बेटी पारुल के कई स्तरों पर परीक्षण करवाए थे। इसी वर्ष पुलिस ने दोनों का ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराया। इससे पहले पारुल का दिल्ली के रोहिणी में फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया था। पुलिस प्रो. बीबी गोयल का पॉलिग्राफी टेस्ट भी करवा चुकी थी, हालांकि आरोपी नार्को टेस्ट के लिए अनफिट था। सूत्रों ने बताया कि पुलिस को बेटी के फॉरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट और पॉलीग्राफ टेस्ट में लीड़ मिली थी।
सूत्रों की मानें तो बेटी कुछ छिपाने की कोशिश कर रही थी। इस केस की जांच के दौरान चार से पांच जांच अधिकारी बदले गए। पुलिस ने प्रोफेसर से कई बार पूछताछ भी की लेकिन लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी। एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि घटनास्थल की जांच के अलावा बीईओएस और पॉलिग्राफी टेस्ट की रिपोर्ट में आरोपी की भूमिका पाई जाने के बाद प्रोफेसर की गिरफ्तारी की गई। इस केस में अब तक चार से पांच जांच अधिकारी बदले गए लेकिन वर्तमान में बुडै़ल चौकी के इंचार्ज एसआई नवीन कुमार ने इस मामले को सुलझाया।
चार साल पहले हो सकती थी गिरफ्तारी
इस केस में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लग चुके थे बावजूद इसके लगभग चार साल तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। उस समय के चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप चहल ने खुद आरोपी से करीब चार घंटे पूछताछ की थी और फिर सेक्टर-11 थाने के तत्कालीन एसएचओ को गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। लेकिन एसएचओ ने पुख्ता सबूतों की कमी बताकर कार्रवाई टाल दी थी। इस बीच एसएसपी कुलदीप चहल का चंडीगढ़ से ट्रांसफर हो गया। सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों पर लगातार दबाव था, कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने के बावजूद भी आरोपी को समय रहते गिरफ्तार नहीं किया गया।
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सूत्रों की मानें तो बेटी कुछ छिपाने की कोशिश कर रही थी। इस केस की जांच के दौरान चार से पांच जांच अधिकारी बदले गए। पुलिस ने प्रोफेसर से कई बार पूछताछ भी की लेकिन लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी। एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि घटनास्थल की जांच के अलावा बीईओएस और पॉलिग्राफी टेस्ट की रिपोर्ट में आरोपी की भूमिका पाई जाने के बाद प्रोफेसर की गिरफ्तारी की गई। इस केस में अब तक चार से पांच जांच अधिकारी बदले गए लेकिन वर्तमान में बुडै़ल चौकी के इंचार्ज एसआई नवीन कुमार ने इस मामले को सुलझाया।
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चार साल पहले हो सकती थी गिरफ्तारी
इस केस में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लग चुके थे बावजूद इसके लगभग चार साल तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। उस समय के चंडीगढ़ के एसएसपी कुलदीप चहल ने खुद आरोपी से करीब चार घंटे पूछताछ की थी और फिर सेक्टर-11 थाने के तत्कालीन एसएचओ को गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। लेकिन एसएचओ ने पुख्ता सबूतों की कमी बताकर कार्रवाई टाल दी थी। इस बीच एसएसपी कुलदीप चहल का चंडीगढ़ से ट्रांसफर हो गया। सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों पर लगातार दबाव था, कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने के बावजूद भी आरोपी को समय रहते गिरफ्तार नहीं किया गया।
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