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चंडीगढ़ नगर निगम के इतिहास में पहली बार बैठक से सत्ता पक्ष के ही पार्षद ‘गायब’, जानिए मामला

Wed, 21 Oct 2020 12:34 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 21 Oct 2020 12:34 PM IST
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The councilor of the ruling party 'disappeared' from the meeting of the nagar nigam chandigarh
नगर निगम की बैठक - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ नगर निगम सदन की ऑनलाइन बैठक का मंगलवार को सत्ता पक्ष भाजपा के पार्षदों ने ही बहिष्कार कर दिया। भाजपा के 20 पार्षदों में से केवल एक पार्षद महेश इंदर सिंह ही बैठक में ऑनलाइन जुड़े। बताया जा रहा है कि भाजपा पार्षद सदन की बैठक शारीरिक रूप से बुलाना चाहते थे लेकिन मेयर राजबाला मलिक इसके लिए तैयार नहीं थीं।
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ऐसे में भाजपा पार्षदों ने नाराजगी जाहिर करने के लिए ऑनलाइन बैठक का ही बहिष्कार कर दिया। वहीं, नौ मनोनीत पार्षद भी बैठक में नहीं जुड़े। भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह के अलावा कांग्रेस के चार और अकाली दल का एक पार्षद बैठक में शामिल हुआ। ऐसे में कोरम पूरा न होने के कारण सचिव अनिल गर्ग ने सदन की बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी।
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बता दें कि भाजपा पार्षदों ने कुछ दिन पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अरुण सूद के साथ एक बैठक कर निगम में सदन की बैठक शारीरिक रूप से बुलाने की बात कही। इस पर प्रदेश अध्यक्ष ने पार्षदों की पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी को महापौर से मिलकर बैठक के बारे में चर्चा करनी थी लेकिन कमेटी के महापौर से मिलने से पहले ही निगम की ओर से 20 अक्तूबर को सदन की बैठक बुलाने का आदेश जारी कर दिया गया।
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चूंकि पहले यह तय था कि बैठक 30 अक्तूबर तक बुलाई जाएगी। इस कारण निगम ने एजेंडा भी आनन-फानन में तैयार किया। इसके बाद भाजपा पार्षदों ने महापौर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बता दें कि कांग्रेस पार्षद भी लगातार महापौर से सदन की बैठक नगर निगम में ही बुलाने की मांग कर रहे थे।

बैठक में एकतिहाई पार्षदों का होना जरूरी

पंजाब नगर निगम एक्ट के अनुसार, बैठक में एकतिहाई पार्षदों का होना जरूरी है। नगर निगम में 26 चुने गए जबकि 9 मनोनीत पार्षद हैं। वहीं एक सीट सांसद किरण खेर की है। इस तरह सदन में 12 पार्षदों का होना जरूरी था। बैठक स्थगित होने पर कांग्रेस और अकाली पार्षदों ने रोष प्रकट किया।

निगम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ
चंडीगढ़ नगर निगम 1996 में बना था। पिछले 24 सालों के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि सत्ता में रहते हुए कोई पार्टी कोरम पूरा नहीं कर सकी। इस कारण बैठक स्थगित करनी पड़ी हो। वर्तमान में नगर निगम में भाजपा के 20, कांग्रेस के 5 व अकाली दल का एक पार्षद है। ऐसे में भाजपा की गुटबाजी के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका।

पानी की बढ़ी दरों की समीक्षा करने का प्रस्ताव भी धरा रह गया
अकाली पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि वे वाटर सप्लाई और सीवरेज डिस्पोजल कमेटी के सदस्य हैं। पिछले समय में जब कमेटी की बैठक हुई तो उन्होंने पानी की दरें कम करने के लिए प्रस्ताव लाने की मांग की थी। भाजपा पार्षदों ने भी इस पर सहमति जताई थी, लेकिन यह प्रस्ताव धरा का धरा रह गया।

चार माह से नहीं सुन रहे थे अफसर: भाजपा
सदन की बैठक का मामला जब गरमाया तो भाजपा के प्रदेश महासचिव रामबीर भट्टी ने एक प्रेस नोट जारी कर पूरे मामले पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले चार माह से सदन की बैठक ऑनलाइन हो रही है। शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं। अफसर जबाव देने से बच रहे हैं इसलिए वह सदन की बैठक निगम में नहीं बुलाना चाह रहे हैं। इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में कमेटी बनाई गई।

17 अक्तूबर को महापौर को भी इस फैसले से अवगत कराया गया था। आशा थी कि 20 अक्तूबर की बैठक पार्षदों की मांग के अनुसार निगम सदन में ही बुलाई जायेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पार्टी महासचिव ने मांग की है कि भारतीय जनता पार्टी, अन्य दलों तथा मनोनीत पार्षदों की मांग के अनुसार शीघ्र पार्षदों की बैठक निगम सदन में बुलाकर शहर की लंबित समस्याओं पर चर्चा कर उचित समाधान किया जाए।

विपक्षी बोले- सबसे असफल महापौर, इस्तीफा दें

महापौर अफसल साबित हो रही है। उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। महापौर की नहीं चल रही है। यह सोची-समझी साजिश है ताकि भाजपा पार्षदों को जवाब न देना पड़े। सदन में पानी की बढ़ी दरों और करों पर चर्चा होनी थी। कांग्रेस के प्रश्नों का जवाब नहीं था, इसलिए भाजपा और महापौर की मिलीभगत से बैठक नहीं हो पाई।
- दवेंद्र सिंह बबला, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम

शहर के साथ धोखा हुआ है
महापौर अपनी ड्यूटी सही से नहीं निभा रही है। नगर निगम के लिए काला दिन है। शहर के साथ धोखा हुआ है। शहर की जनता जबाव मांग रही है। सत्ताधारी मैदान छोड़कर भाग रहे हैं।
- सतीश कैंथ, पार्षद, कांग्रेस

शहर के विकास के बारे में नहीं सोच रहे
यह गलत हुआ है। शहर के बारे में भाजपा नहीं सोच रही है। पानी के मसले पर बात करने से भाजपा भाग रही है। यह भाजपा के लिए आने वाले चुनाव में भारी पड़ेगा। गांव का बिल्डिंग बायलॉज महत्वपूर्ण एजेंडा था।
- हरदीप सिंह, शिअद अध्यक्ष और पार्षद

पार्षदों के बैठक में शामिल होने का पता नहीं था
मेरी जानकारी में नहीं था कि भाजपा पार्षद बैठक में शामिल नहीं होंगे। यह सदन मेरे साथ भाजपा पार्षदों का भी है। सभी पार्षद शामिल होते तो मुझे अच्छा लगता।
- राजबाला मलिक, महापौर, नगर निगम चंडीगढ़

महापौर को सदन में बैठक होने के बारे में बताया था
महापौर राजबाला मलिक को बैठक में बताया गया था कि इस बार बैठक सदन में ही बुलाई जाएगी क्योंकि ऑनलाइन बैठक में विषय पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाती है। संगठन व पार्टी ने जो तय किया है, महापौर को उस पर अमल करना चाहिए था।
- दिनेश शर्मा, संगठन मंत्री, भाजपा
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