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Chandigarh: प्रशासन ने विभागों को अतिरिक्त बजट सरेंडर करने को कहा, निगम को मिल सकती है आर्थिक मदद

Thu, 27 Feb 2025 01:56 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 27 Feb 2025 01:56 AM IST
सार

चंडीगढ़ निगम गंभीर आर्थिक संकट में है। प्रशासन के अधिकारी निगम की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं। प्रशासन के अधिकारियों को लगता है कि निगम बहुत ज्यादा फिजूलखर्ची कर रहा है। जरूरत से ज्यादा कर्मचारी रखे गए हैं। अधिकारी कई बार कह चुके हैं कि निगम को जितना भी अतिरिक्त फंड दे दिया जाए, वह कम ही पड़ेगा।

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The corporation facing severe financial crisis may get relief
चंडीगढ़ नगर निगम - फोटो : फाइल

विस्तार

गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे चंडीगढ़ नगर निगम को राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन ने अपने विभिन्न विभागों को अतिरिक्त बजट सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं। विभागों के बचे हुए बजट को वापस लेकर प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) से मंजूरी लेगा। अगर मंजूरी मिलती है तो 15 मार्च के बाद निगम को मदद मिल सकती है।

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सैलरी के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं

निगम की हालत ऐसी हो चुकी है कि उसके पास फरवरी महीने की सैलरी देने के लिए भी पर्याप्त फंड नहीं है। निगम को तत्काल करीब 170 करोड़ रुपये की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने सभी विभागों को पत्र जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जिन विभागों के पास ज्यादा फंड उपलब्ध है और वह 31 मार्च तक खर्च नहीं कर पाएंगे, उसे सरेंडर कर दें। 

प्रशासन की योजना है कि उन्हीं अतिरिक्त रुपयों को विभिन्न विभागों से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद निगम को दिया जाए। निगम को इस संबंध में जानकारी भी दे दी गई है। हाल ही में प्रशासक के साथ हुई बैठक में मेयर को भी इस संबंध में सूचित किया गया है। यदि मंत्रालय से अनुमति मिल जाती है तो 15 मार्च के बाद निगम को आर्थिक सहायता मिल सकती है। इससे न केवल कर्मचारियों का वेतन समय पर दिया जा सकेगा बल्कि अन्य विकास कार्यों के लिए भी धन उपलब्ध हो सकेगा।
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बिजली विभाग के पास अतिरिक्त फंड

हाल ही में यूटी प्रशासन के बिजली विभाग का निजीकरण हुआ है। ऐसे में बिजली विभाग के पास काफी फंड उपलब्ध है, क्योंकि एक फरवरी से विभाग की पूरी 100 फीसदी जिम्मेदारी निजी कंपनी की हो गई है। सूत्रों के अनुसार बिजली विभाग की तरफ से भी काफी रुपये सरेंडर किए जा सकते हैं। इसके अलावा अन्य कुछ विभागों ने भी अपने बजट का 75-85 फीसदी ही खर्च किया है। 

हाल ही में गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने भी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, गृह सचिव मनदीप सिंह बराड़, वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा समेत कई अधिकारियों ने प्रेजेंटेशन देकर निगम के लिए अतिरिक्त फंड की मांग की है। कहा गया है कि निगम कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिसके लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है।

पैसों को लोन की तरह दे सकता है प्रशासन

निगम को प्रशासन यह रुपये लोन की तरह भी दे सकता है। इसका अंदेशा इस बात से लगाया जा रहा है कि 21 जून को जब मेयर हरप्रीत कौर बबला के नेतृत्व में सभी पार्टियों के पार्षद राजभवन में प्रशासक गुलाबचंद कटारिया से मिले थे तो प्रशासक ने पूछा था कि अगर निगम को पैसे लोन पर दिए जाएं तो वह कैसे लौटाएंगे। इसे लेकर प्रशासक ने एक विस्तृत प्लान बनाने के निर्देश दिए हैं। 
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