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Chandigarh News: खरड़ सिविल अस्पताल का हाल... लेबर रूम के बाहर दो घंटे खड़े रहने के बाद भी गर्भवती को नहीं मिला इलाज
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खरड़। पंजाब सरकार की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों में बड़े सुधार किए गए हैं। वहीं खरड़ के सिविल अस्पताल से ऐसा मामला आया है कि लेबर रूम के बाहर दो घंटे खड़े रहने के बाद भी गर्भवती को भर्ती नहीं किया गया। बाद में मरीज को जीएमसीएच-32 रेफर कर दिया गया। गांव चोलता कलां निवासी शिकायतकर्ता सुखविंदर कौर ने बताया कि अस्पताल में सीधे पैसा लेने के बजाय निजी प्रयोगशालाओं से महंगे टेस्ट कराए जा रहे हैं। अगर मरीज इसका विरोध करता है तो उसके साथ गलत व्यवहार किया जाता है या फिर उसे मोहाली फेज-6, चंडीगढ़ सेक्टर-32 रेफर कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि उनके मरीज को प्रसव पीड़ा के दौरान दो घंटे तक लेबर रूम के बाहर खड़े रहने के बाद भी बिना इलाज के सिविल अस्पताल खरड़ से रेफर कर दिया। इससे दुखी होकर उन्होंने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है।
घटना के बारे में उन्होंंने बताया कि अमनदीप कौर वासी रतनगढ़ जिला रोपड़ को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर सिविल अस्पताल खरड़ लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नर्स ने उन्हें कहा कि डॉक्टर (महिला विशेषज्ञ) कमलप्रीत कौर ने आपके मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया है। आप मोरिंडा के सिविल अस्पताल में अपने मरीज का प्राथमिक इलाज कराती रही हैं, इसलिए मरीज को यहां भर्ती नहीं कर सकते। आप अपने मरीज को मोहाली फेज-6 सरकारी अस्पताल या चंडीगढ़ के किसी भी अस्पताल में ले जाएं।
उन्होंने शिकायत में कथित तौर पर डॉक्टर पर आरोप लगाया कि बाहर से उक्त डॉक्टर द्वारा निजी तौर पर महंगे टेस्ट कराए जाते हैं जिसके लिए उन्हें कमीशन भी मिलता है। उन्होंने बताया कि उस दिन वे इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के पास पहुंचे और उन्हें सारा मामला बताया तो डॉक्टर ने कहा कि वह इस बारे में महिला विशेषज्ञ से बात करेंगे। आप थोड़ी देर बाद वापस आए। जब वे फिर से डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने अस्पताल में ही टेस्ट करा लिए। इतना सबकुछ होने के बाद उनके मरीज को जीएमसीएच-32 रेफर कर दिया गया। जहां सामान्य प्रसव हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी स्टाफ व डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाए।
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शिकायतकर्ता की मांग, दूसरे सरकारी अस्पताल के डॉक्टर करें मामले की जांच
इस बारे में शिकायतकर्ता ने कहा कि एक जांच कमेटी बनाई गई है जिसके पास वे कल बयान दर्ज कराने आए थे। वे इस जांच कमेटी से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि जिस डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की गई है, वह खुद खरड़ में पदस्थ हैं और उनके साथी डॉक्टर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कैसे लिख सकते हैं। वह स्वास्थ्य विभाग से मांग करती हैं कि मामले की जांच दूसरे सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की टीम से कराई जाए।
कोट
इस मामले में पीड़ित के बयान दर्ज कर लिए हैं। केस की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। इसकी रिपोर्ट बनाकर सीएमओ को भेज दी है। -डॉ. सुखविंदर देयोल, एसएमओ
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घटना के बारे में उन्होंंने बताया कि अमनदीप कौर वासी रतनगढ़ जिला रोपड़ को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर सिविल अस्पताल खरड़ लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि नर्स ने उन्हें कहा कि डॉक्टर (महिला विशेषज्ञ) कमलप्रीत कौर ने आपके मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया है। आप मोरिंडा के सिविल अस्पताल में अपने मरीज का प्राथमिक इलाज कराती रही हैं, इसलिए मरीज को यहां भर्ती नहीं कर सकते। आप अपने मरीज को मोहाली फेज-6 सरकारी अस्पताल या चंडीगढ़ के किसी भी अस्पताल में ले जाएं।
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उन्होंने शिकायत में कथित तौर पर डॉक्टर पर आरोप लगाया कि बाहर से उक्त डॉक्टर द्वारा निजी तौर पर महंगे टेस्ट कराए जाते हैं जिसके लिए उन्हें कमीशन भी मिलता है। उन्होंने बताया कि उस दिन वे इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के पास पहुंचे और उन्हें सारा मामला बताया तो डॉक्टर ने कहा कि वह इस बारे में महिला विशेषज्ञ से बात करेंगे। आप थोड़ी देर बाद वापस आए। जब वे फिर से डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने अस्पताल में ही टेस्ट करा लिए। इतना सबकुछ होने के बाद उनके मरीज को जीएमसीएच-32 रेफर कर दिया गया। जहां सामान्य प्रसव हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों ठीक हैं। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी स्टाफ व डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाए।
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शिकायतकर्ता की मांग, दूसरे सरकारी अस्पताल के डॉक्टर करें मामले की जांच
इस बारे में शिकायतकर्ता ने कहा कि एक जांच कमेटी बनाई गई है जिसके पास वे कल बयान दर्ज कराने आए थे। वे इस जांच कमेटी से संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि जिस डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की गई है, वह खुद खरड़ में पदस्थ हैं और उनके साथी डॉक्टर उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कैसे लिख सकते हैं। वह स्वास्थ्य विभाग से मांग करती हैं कि मामले की जांच दूसरे सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की टीम से कराई जाए।
कोट
इस मामले में पीड़ित के बयान दर्ज कर लिए हैं। केस की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। इसकी रिपोर्ट बनाकर सीएमओ को भेज दी है। -डॉ. सुखविंदर देयोल, एसएमओ