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Chandigarh News: खाड़ी देशों व पश्चिमी देशों तक फैले मानव तस्करी के जाल का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क को उजागर करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका रंजन लखनपाल और सतनाम की ओर से दाखिल की गई है। इसमें दावा किया गया है कि पंजाब की कई युवतियों को नौकरी और बेहतर जीवन का झांसा देकर विदेश भेजा जा रहा है। वहां पहुंचने पर उन्हें जबरन घरेलू नौकरानी बनाया जा रहा है या देह व्यापार में धकेला जा रहा है।
याचिका में जालंधर की एक युवती का उदाहरण दिया गया। आरोप है कि वर्ष 2015 में उसे नौकरी दिलाने के बहाने ले जाया गया और पहले एक परिवार के यहां घरेलू काम पर लगाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे उसे दुबई के एक शेख के महल में बेच दिया गया, जहां से अब तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
इससे पहले भी युवती के परिजनों ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उस समय पुलिस ने केवल औपचारिक कार्रवाई की और वास्तविक जांच नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह रैकेट इतना बड़ा है कि इसमें स्थानीय पुलिस और राजनीतिक प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इतने बड़े नेटवर्क के कारण शिकायत दबा दी जाती हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता।
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उन्होंने कहा कि मानव तस्करी का यह धंधा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य राज्यों से भी युवतियों को बहला-फुसलाकर दुबई, कतर, सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड जैसे देशों में भेजा जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़िताओं को न्याय मिल सके। युवती के भाई ने हाईकोर्ट से अपील की है कि उसकी बहन और अन्य पीड़िताओं को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें प्रभावी कार्रवाई करें। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब व केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब तलब किया है।
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चंडीगढ़। मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क को उजागर करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार व केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका रंजन लखनपाल और सतनाम की ओर से दाखिल की गई है। इसमें दावा किया गया है कि पंजाब की कई युवतियों को नौकरी और बेहतर जीवन का झांसा देकर विदेश भेजा जा रहा है। वहां पहुंचने पर उन्हें जबरन घरेलू नौकरानी बनाया जा रहा है या देह व्यापार में धकेला जा रहा है।
याचिका में जालंधर की एक युवती का उदाहरण दिया गया। आरोप है कि वर्ष 2015 में उसे नौकरी दिलाने के बहाने ले जाया गया और पहले एक परिवार के यहां घरेलू काम पर लगाया गया। इसके बाद धीरे-धीरे उसे दुबई के एक शेख के महल में बेच दिया गया, जहां से अब तक उसकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
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इससे पहले भी युवती के परिजनों ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उस समय पुलिस ने केवल औपचारिक कार्रवाई की और वास्तविक जांच नहीं हुई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह रैकेट इतना बड़ा है कि इसमें स्थानीय पुलिस और राजनीतिक प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। इतने बड़े नेटवर्क के कारण शिकायत दबा दी जाती हैं और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता।
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उन्होंने कहा कि मानव तस्करी का यह धंधा केवल पंजाब तक सीमित नहीं है बल्कि अन्य राज्यों से भी युवतियों को बहला-फुसलाकर दुबई, कतर, सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा और इंग्लैंड जैसे देशों में भेजा जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़िताओं को न्याय मिल सके। युवती के भाई ने हाईकोर्ट से अपील की है कि उसकी बहन और अन्य पीड़िताओं को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें प्रभावी कार्रवाई करें। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब व केंद्रीय गृह सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब तलब किया है।