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चंडीगढ़ में इंजीनियरों की किल्लत: पानी-सीवर के काम ठप, जेई बने एसडीओ और एसडीओ संभाल रहे एक्सईएन का काम
Mon, 21 Sep 2026 01:45 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 21 Sep 2026 01:45 AM IST
सार
इंजीनियरों की कमी का असर शहर के जमीनी कामों में भी नजर आ रहा है। सेक्टर-28 में 18 अगस्त को ब्रिक स्टॉर्म वाटर ड्रेन टूटने से सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। करीब एक महीने बाद भी इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है।
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सेक्टर 28 में अधूरा पड़ा काम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
चंडीगढ़ की पानी-सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम के पब्लिक हेल्थ विभाग में इंजीनियरों की कमी अब जमीनी काम पर भारी पड़ने लगी है। छह एक्सईएन पदों में चार एडिशनल चार्ज पर हैं।
इनमें से एक एडिशनल चार्ज वाले एक्सईएन को निगम कमिश्नर ने हाल ही में सस्पेंड कर दिया। इसके बाद रेगुलर एक्सईएन अमित शर्मा के पास तीन डिवीजन-1, 3 और 4 की जिम्मेदारी आ गई है। इन डिवीजनों में पानी की सप्लाई, वॉटर स्टोरेज, स्टॉर्म वाटर, सीवर और टर्शियरी से जुड़े काम आते हैं।
एक अधिकारी के पास तीन डिवीजनों की जिम्मेदारी होने से फील्ड निरीक्षण, शिकायतों के निपटारे और तकनीकी फाइलों की निगरानी प्रभावित हो रही है। वहीं रेगुलर एक्सईएन योगेश अग्रवाल के पास एक्सईएन पब्लिक हेल्थ के साथ एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पब्लिक हेल्थ का अतिरिक्त कार्यभार भी है।
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जेई बने एसडीओ, एसडीओ संभाल रहे एक्सईएन का काम
विभाग में तीन एसडीओ गौरव पाल, राजबीर सिंह और यशपाल शर्मा को एडिशनल चार्ज देकर एक्सईएन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं तीन जेई अनुराग, अमित जांगड़ा और पराग को एसडीओ का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। यानी कई अधिकारियों को अपने मूल पद के साथ दूसरे पद की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है।
18 अगस्त से सड़क बंद, ड्रेन मरम्मत का इंतजार
इंजीनियरों की कमी का असर शहर के जमीनी कामों में भी नजर आ रहा है। सेक्टर-28 में 18 अगस्त को ब्रिक स्टॉर्म वाटर ड्रेन टूटने से सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। करीब एक महीने बाद भी इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। स्टॉर्म वाटर ड्रेन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी पर अतिरिक्त काम का बोझ होने से फील्ड मॉनिटरिंग और मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होने का असर यहां दिखाई दे रहा है।
डेपुटेशन पर चार एक्सईएन और एक एसई मांगा
विभाग में इंजीनियरों की कमी दूर करने के लिए निगम ने अब प्रशासन से डेपुटेशन पर चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इनमें तीन एक्सईएन पब्लिक हेल्थ और एक एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट के लिए मांगा गया है। इसके अलावा एक एसई पब्लिक हेल्थ के लिए मांगा गया है।
अधिकारियों के आने से अतिरिक्त चार्ज कम करने और अलग-अलग डिवीजनों की नियमित मॉनिटरिंग मजबूत होने की उम्मीद है। जॉइंट कमिश्नर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने कहा कि पब्लिक हेल्थ में चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर डेपुटेशन पर भरे जाने हैं। इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।
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इनमें से एक एडिशनल चार्ज वाले एक्सईएन को निगम कमिश्नर ने हाल ही में सस्पेंड कर दिया। इसके बाद रेगुलर एक्सईएन अमित शर्मा के पास तीन डिवीजन-1, 3 और 4 की जिम्मेदारी आ गई है। इन डिवीजनों में पानी की सप्लाई, वॉटर स्टोरेज, स्टॉर्म वाटर, सीवर और टर्शियरी से जुड़े काम आते हैं।
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एक अधिकारी के पास तीन डिवीजनों की जिम्मेदारी होने से फील्ड निरीक्षण, शिकायतों के निपटारे और तकनीकी फाइलों की निगरानी प्रभावित हो रही है। वहीं रेगुलर एक्सईएन योगेश अग्रवाल के पास एक्सईएन पब्लिक हेल्थ के साथ एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट और सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर पब्लिक हेल्थ का अतिरिक्त कार्यभार भी है।
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जेई बने एसडीओ, एसडीओ संभाल रहे एक्सईएन का काम
विभाग में तीन एसडीओ गौरव पाल, राजबीर सिंह और यशपाल शर्मा को एडिशनल चार्ज देकर एक्सईएन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं तीन जेई अनुराग, अमित जांगड़ा और पराग को एसडीओ का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। यानी कई अधिकारियों को अपने मूल पद के साथ दूसरे पद की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है।
18 अगस्त से सड़क बंद, ड्रेन मरम्मत का इंतजार
इंजीनियरों की कमी का असर शहर के जमीनी कामों में भी नजर आ रहा है। सेक्टर-28 में 18 अगस्त को ब्रिक स्टॉर्म वाटर ड्रेन टूटने से सड़क का एक हिस्सा धंस गया था। करीब एक महीने बाद भी इसकी मरम्मत नहीं हो सकी है। स्टॉर्म वाटर ड्रेन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी पर अतिरिक्त काम का बोझ होने से फील्ड मॉनिटरिंग और मरम्मत की प्रक्रिया प्रभावित होने का असर यहां दिखाई दे रहा है।
डेपुटेशन पर चार एक्सईएन और एक एसई मांगा
विभाग में इंजीनियरों की कमी दूर करने के लिए निगम ने अब प्रशासन से डेपुटेशन पर चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। इनमें तीन एक्सईएन पब्लिक हेल्थ और एक एक्सईएन वर्क्स एंड एस्टेब्लिशमेंट के लिए मांगा गया है। इसके अलावा एक एसई पब्लिक हेल्थ के लिए मांगा गया है।
अधिकारियों के आने से अतिरिक्त चार्ज कम करने और अलग-अलग डिवीजनों की नियमित मॉनिटरिंग मजबूत होने की उम्मीद है। जॉइंट कमिश्नर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने कहा कि पब्लिक हेल्थ में चार एक्सईएन और एक सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर डेपुटेशन पर भरे जाने हैं। इसके लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है।