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Chandigarh News: पंजाब में यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज लागू, प्लॉटों में 10 प्रतिशत ग्रांउड कवरेज की सुविधा
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-आवासीय और व्यावसायिक भवनों को मिलेगी नई सुविधाएं, राज्यपाल की मूंजूरी के बाद अधिसूचना जारी
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राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने राज्य में यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज लागू कर दिए हैं, जिससे आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण में बड़े बदलाव होंगे। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई है।
नए नियमों के तहत 300 से 500 वर्ग मीटर के आवासीय प्लॉट में अब 10 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की सुविधा मिलेगी। सेल्फ सर्टिफिकेशन स्कीम से नक्शा पास होगा, जिससे निर्माण में देरी नहीं होगी। स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर बनाने की अनुमति दी गई है, जिससे बड़े परिवारों को लाभ मिलेगा।
वॉल्ड सिटी और कोर एरिया में 100 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की अनुमति दी गई है। इससे अवैध निर्माण नियमित होगा और होटलों, रेस्टोरेंट, दुकानों सहित अन्य संस्थानों को फायदा मिलेगा। व्यावसायिक भवनों में पहले पांच मीटर में सीढ़ी बनाने की शर्त अब घटाकर 1-1.5 मीटर कर दी गई है। नए बायलॉज में फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी की बिक्री और रजिस्ट्री की सुविधा भी दी गई है। ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग अनिवार्य होगी और फायर एनओसी जरूरी होगी। स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। जरूरत पड़ने पर बिल्डर और विक्रेता को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से अनुमति लेनी होगी।
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मंजूरी आसान, पोर्टल पर पारदर्शिता
21 मीटर तक ऊंची इमारतों के नक्श पास के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन स्कीम लागू की गई है। इससे लोगों को कमेटियों और विकास प्राधिकरणों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अलग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी होगी।
वॉल्ड
सिटी व कोर एरिया में अधिक अवैध निर्माण
वॉल्ड सिटी में अधिकांश भवनों ने 100 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज कर लिया है। इसे हटाना चुनौतीपूर्ण होने के कारण सरकार ने कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है। इसके जरिए राजस्व भी बढ़ेगा।
व्यावसायिक भवनों में राहत
125 से 250 गज तक के भवनों में बड़ी सीढ़ियों की शर्त हटाई गई है। छोटे भवनों में अब 1-1.5 मीटर में सीढ़ी बनाई जा सकेगी। इससे नियमों का उल्लंघन करने की बाध्यता खत्म होगी।
फायदा किसे होगा
नए बायलॉज से मोहाली, न्यू चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, जीरकपुर, डेराबस्सी, बनूड़, खरड़, नयागांव, लालड़ू और अन्य शहरों के लोगों को फायदा मिलेगा। इन क्षेत्रों में लंबे समय से अधिक ग्राउंड कवरेज वाले अवैध निर्माण हैं, जिन्हें अब नियमित किया जा सकेगा।
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राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने राज्य में यूनिफाइड बिल्डिंग बायलॉज लागू कर दिए हैं, जिससे आवासीय और व्यावसायिक भवनों के निर्माण में बड़े बदलाव होंगे। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी कर दी गई है।
नए नियमों के तहत 300 से 500 वर्ग मीटर के आवासीय प्लॉट में अब 10 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की सुविधा मिलेगी। सेल्फ सर्टिफिकेशन स्कीम से नक्शा पास होगा, जिससे निर्माण में देरी नहीं होगी। स्टिल्ट प्लस चार फ्लोर बनाने की अनुमति दी गई है, जिससे बड़े परिवारों को लाभ मिलेगा।
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वॉल्ड सिटी और कोर एरिया में 100 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की अनुमति दी गई है। इससे अवैध निर्माण नियमित होगा और होटलों, रेस्टोरेंट, दुकानों सहित अन्य संस्थानों को फायदा मिलेगा। व्यावसायिक भवनों में पहले पांच मीटर में सीढ़ी बनाने की शर्त अब घटाकर 1-1.5 मीटर कर दी गई है। नए बायलॉज में फ्लोर वाइज प्रॉपर्टी की बिक्री और रजिस्ट्री की सुविधा भी दी गई है। ग्राउंड फ्लोर पर पार्किंग अनिवार्य होगी और फायर एनओसी जरूरी होगी। स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। जरूरत पड़ने पर बिल्डर और विक्रेता को रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) से अनुमति लेनी होगी।
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मंजूरी आसान, पोर्टल पर पारदर्शिता
21 मीटर तक ऊंची इमारतों के नक्श पास के लिए सेल्फ सर्टिफिकेशन स्कीम लागू की गई है। इससे लोगों को कमेटियों और विकास प्राधिकरणों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अलग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी होगी।
वॉल्ड
सिटी व कोर एरिया में अधिक अवैध निर्माण
वॉल्ड सिटी में अधिकांश भवनों ने 100 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज कर लिया है। इसे हटाना चुनौतीपूर्ण होने के कारण सरकार ने कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है। इसके जरिए राजस्व भी बढ़ेगा।
व्यावसायिक भवनों में राहत
125 से 250 गज तक के भवनों में बड़ी सीढ़ियों की शर्त हटाई गई है। छोटे भवनों में अब 1-1.5 मीटर में सीढ़ी बनाई जा सकेगी। इससे नियमों का उल्लंघन करने की बाध्यता खत्म होगी।
फायदा किसे होगा
नए बायलॉज से मोहाली, न्यू चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, जीरकपुर, डेराबस्सी, बनूड़, खरड़, नयागांव, लालड़ू और अन्य शहरों के लोगों को फायदा मिलेगा। इन क्षेत्रों में लंबे समय से अधिक ग्राउंड कवरेज वाले अवैध निर्माण हैं, जिन्हें अब नियमित किया जा सकेगा।