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आतंकियों ने पूछताछ में किया खुलासा: सात महीने से पंजाब को दहलाने की फिराक में, बस हैंडलर से आदेश का था इंतजार

Tue, 27 Dec 2022 10:05 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 27 Dec 2022 10:05 PM IST
सार

पंजाब में आतंक मचाने के लिए आतंकियों ने अपनी रणनीति में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद से ही बदलाव किया क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को काफी जलील होना पड़ा था।

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Terrorists revealed during interrogation trying to terrorize Punjab for seven months
तरनतारन में आरपीजी बरामद। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब में आतंकी वारदात को अंजाम देने और खुशहाल माहौल को बिगाड़ने में पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसी आईएसआई और विदेशों में बैठे हैंडलर लंडा और अन्य सात महीने से जुटे हुए हैं, लेकिन अभी तक इसमें कामयाब नहीं हो पाए हैं। मंगलवार को तरनतारन में लोडेड रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) के साथ पकडे़ गए आतंकियों ने पूछताछ में साफ कहा है कि उन्होंने किसी बड़े हमले को अंजाम देना था। वे अपने हैंडलर के आदेश का इंतजार कर रहे थे। तरनतारन के एसएसपी गुरमीत सिंह चौहान ने बताया कि पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है।

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पंजाब में आतंक मचाने के लिए आतंकियों ने अपनी रणनीति में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद से ही बदलाव किया क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को काफी जलील होना पड़ा था। यूएनओ में भी मुद्दा उठा था। इसके बाद वे सरहद पार से आतंकी भेजने के बजाय लोकल नेटवर्क के माध्यम से वारदात को अंजाम दे रहे हैं। इस दौरान वे केवल उन युवाओं को चुनते हैं, जिन्हें पैसे की जरूरत होती थी। यह चीज पिछले दोनों आरपीजी हमलों के हमलावरों से पूछताछ में भी साफ हो चुकी है।

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मई 2022 में मोहाली स्थित पंजाब पुलिस के खुफिया मुख्यालय पर आरपीजी हमला हुआ था। इसमें जानी नुकसान होने से बच गया था लेकिन जांच में सामने आया था कि हमलावर मात्र 17 साल का था, उसे और उसके साथी को साढे़ नौ लाख रुपये का भुगतान किया गया। उसने पूछताछ में बताया था कि उसे पैसे की जरूरत थी। कुछ पैसे उसने घरवालों को दिए थे, जबकि बाकी मौज-मस्ती में उड़ दिए थे। इसी तरह सहराली थाने के दोनों हमलावर भी नाबालिग थे। दोनों 10वीं और 12वीं फेल थे। दोनों छोटी-मोटे झगड़ों में शामिल थे। उनका साढ़े आठ लाख रुपये में सौदा हुआ था।

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नाबालिगों पर दांव खेलने की यह है वजह
पिछले कुछ समय से आरोपी नाबालिगों को वारदातों में प्रयोग कर रहे है। आरपीजी हमला हो या सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड समेत कोई अन्य वारदात सब में नाबालिग प्रयोग किए गए हैं। माहिरों की माने तो इसके पीछे वजह यह है कि नाबालिगों से पुलिस उतनी सख्ती से पूछताछ नहीं कर पाती है, जितनी कि बालिगों से की जाती है। इसके अलावा ऐसे आरोपियों को दोष साबित होने पर सजा भी कम होती है।

उचित ट्रेनिंग न होने से आतंकी नहीं हुए कामयाब
पहले आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देते थे तो उसके लिए विदेशों में ट्रेनिंग का इंतजाम किया जाता था। टारगेट कीलिंग से लेकर कई वारदात के आरोपियों की विदेशों में ट्रेनिंग हुई थी लेकिन कुछ साल पहले कोरोना आ गया था। साथ ही इंटरनेट का चलन बढ़ गया था। इसके बाद अब यूट्यूब पर ही हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है। अधिकारियों की मानें तो अगर आरोपियों को फिजिकल ट्रेनिंग दी गई होती तो दोनों आरपीजी हमलों में नुकसान अधिक हो सकता था।

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