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मिर्चपुर में फिर दो समुदायों में विवाद, युवक से मारपीट के बाद गांव में तनाव, पहले भी हो चुका है दंगा

Thu, 01 Aug 2019 12:41 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारनौंद (हिसार)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नारनौंद (हिसार) Published by: ajay kumar Updated Thu, 01 Aug 2019 12:41 AM IST
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Tension in Mirchpur village Of Hissar district
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

उपमंडल के गांव मिर्चपुर में एक बार फिर दो समुदायों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। मंगलवार रात एक समुदाय के युवक के साथ गांव के दूसरे समुदाय के कुछ युवकों ने मारपीट कर दी। युवक दुकान पर मुर्गा लेने आया था। आरोप है कि इस दौरान एक समुदाय के कुछ युवकों ने उसकी पिटाई कर दी। पुलिस ने 6 युवकों पर एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। 

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घटना की सूचना मिलते ही नारनौंद के डीएसपी जोगेंद्र राठी, थाना प्रभारी राजसविंद्र भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बुधवार को पूरे दिन गांव में तनाव की स्थिति रही। भारी पुलिस बल तैनात रहा। घायल युवक तेजभान ने पुलिस को बताया कि मंगलवार रात मिर्चपुर के एक फार्म हाउस पर मुर्गी देखने के लिए गया था। 
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फार्म हाउस के मालिक मिर्चपुर निवासी सुरेंद्र का पार्टनर सतीश भी वहां मौजूद था। उस समय फार्म हाउस पर कुछ युवक शराब पी रहे थे, जिनमें सतीश, विक्रम उर्फ बबली, सुनील उर्फ तुनि व तीन अन्य थे। पीड़ित ने शिकायत में कहा कि जिस समय वह सतीश से बातचीत कर रहा था उसी समय सभी युवक झगड़े के इरादे से उसकी तरफ बढ़े और गाली-गलौज करने लगे। 

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विरोध करने पर उन्होंने लाठी-डंडों से पिटाई शुरू कर दी। किसी तरह वह भाग निकला और चचेरे भाई कुलदीप को फोन कर बुला लिया। इसके बाद उनकी बस्ती के काफी लोग बाइकों से वहां पहुंच गए, जिनको देखकर सभी आरोपी भाग गए। पुलिस ने तेजभान के बयान पर तीन नामजद सहित तीन अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 323, 506 व 3 एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

गांव में फिलहाल शांति है। आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। - जोगेंद्र राठी, डीएसपी नारनौंद। 

गांव में पूर्ण रूप से शांति है। जिन युवकों के साथ झगड़ा हुआ था उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। - श्रीभगवान, नायब तहसीलदार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट। 

गांव में पहले भी हो चुका है दंगा
वर्ष 2010 में गांव में एक समुदाय के बुजुर्ग व एक दिव्यांग लड़की की घर में संदिग्ध परिस्थितियों में आग लगने के कारण जलने से मौत हो गई थी। समुदाय के लोगों ने इसका आरोप दूसरे समुदाय के लोगों पर लगाया था, जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच दंगा भड़क गया था। इस मामले में 113 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिसमें 10 लोग जांच में निकाल दिए गए थे और 103 लोगों के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चला था। 

इनमें पांच नाबालिग थे। बाकी 98 में से अदालत ने तीन लोगों को उम्रकैद, 5 लोगों को 5-5 साल की और 7 लोगों को 2-2 साल कैद की सजा हुई थी। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इसकी अपील दिल्ली के रोहिणी अदालत में की थी। इस पर 24 अगस्त 2018 को रोहिणी कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के तहत 33 लोगों को दोषी करार दिया था। इनमें से 12 को उम्रकैद, 12 को 2-2 साल की कैद, बाकी को अंडरगोन की सजा सुनाई थी।

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