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पाक सीमा से सटे गांव सिंबल स्कोल का देश से संपर्क कटा, तरनाह दरिया में बना अस्थाई पुल हटाया गया

Thu, 25 Jun 2020 06:59 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट/बमियाल (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट/बमियाल (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 25 Jun 2020 06:59 PM IST
सार

  • लोक निर्माण विभाग ने उठाया अस्थाई पुल, पैदल दरिया पार करने को मजबूर ग्रामीण
  • नाव भी खस्ताहाल, मरम्मत के बाद ही नदी में उतारी जा सकेंगी, बढ़ीं लोगों की दिक्कतें

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Temporary bridge removed from a village adjacent to Indo-Pak border
अस्थाई पुल हटाला गया।

विस्तार

भारत-पाक सीमा जीरो लाइन से सटे देश के अंतिम गांव सिंबल स्कोल का अस्थाई पुल बरसात के मौसम की वजह से हटा लिया गया है। इसके बाद उक्त गांव का देश से संपर्क कट गया है। लोक निर्माण विभाग ने रावी नदी से निकलने वाले तरनाह दरिया पर बना अस्थाई पुल हटा लिया है। इससे लगभग 400 लोगों की आबादी वाले गांव की दिक्कतें बढ़ गई हैं। वहीं, सिंबल पोस्ट पर तैनात बीएसएफ को भी आवागमन में परेशानी होगी। 

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नदी पार करने लिए रखी नाव भी खस्ताहाल है। फिलहाल जलस्तर कम होने के कारण लोग पैदल ही नदी पार कर रहे हैं। लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद गांव सिंबल स्कोल टापू में तब्दील हो जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारत को आजाद होने के सात दशक बाद भी गांव में विकास की लौ नहीं जल सकी है। 
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जीरो लाइन पर स्थित है गांव सिंबल स्कोल
पठानकोट के बमियाल सेक्टर में भारत-पाकिस्तान सीमा की जीरो लाइन पर स्थित गांव सिंबल-स्कोल ऐसा गांव है कि इसके तीन तरफ भारत-पाकिस्तान सीमा और एक तरफ गांव से बाहर निकलने के रास्ते में तरनाह दरिया है। आज भी बरसात में ग्रामीणों को या तो गांव में ही कैद होकर रहना पड़ेगा या फिर अपना घर छोड़कर दरिया के पार डेरा लगाना पड़ेगा। बरसात में हर बार यह गांव पूरे देश से कट जाता है। 

समय पर स्वास्थ्य सुविधा न मिलने से दम तोड़ चुके कई लोग

Temporary bridge removed from a village adjacent to Indo-Pak border

ग्रामीणों में इंदर कुमार, सुरेंद्र कुमार, प्रेम कुमार, रवीश कुमार, अजय कुमार व विक्रम सिंह ने बताया कि आजादी के बाद हर बरसात के मौसम में लोगों को दंश झेलना पड़ता है। जिंदगी कैद होकर रह जाती है। नदी का बहाव अधिक होने से कई बार बीमार लोग समय पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने से दम तोड़ देते हैं।

लोग लगातार पक्के पुल की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हुई। हर बरसात के मौसम में नदी से पुल हटा लिए जाने के बाद ग्रामीणों को घरेलू सामान और पशु चारे की किल्लत का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को अपने दोपहिया वाहन नदी के उस पार ही खड़े करने पड़ते हैं। सरपंच परमजीत कौर ने बताया कि नई नाव के लिए प्रशासन को अवगत करवा दिया गया है।

बैली ब्रिज बनाने के लिए सामान मुहैया करवाया गया था। अब जिला प्रशासन एवं बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) को पुल बनाने की अनुमति मिल गई है। जल्द लोगों को सुविधा मिलेगी। वहीं बीआरओ के अधिकारी महावीर प्रसाद ने बताया कि बैली ब्रिज निर्माण की अनुमति अंतिम चरण में है। उम्मीद है अगले सप्ताह काम शुरू हो जाएगा। 

पक्के पुल का निर्माण होने में अभी समय लगेगा। विभागीय प्रक्रिया चल रही है। जोगिंदरपाल, विधायक।

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