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Chandigarh News: पीटीएम में अभिभावकों को गैजेट-फ्री संडे के लिए प्रेरित करेंगे शिक्षक
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चंडीगढ़। बच्चों को मोबाइल नहीं, अपना वक्त दें। रविवार स्क्रीन के नाम नहीं, परिवार के नाम करें।
नगर निगम के मेयर सौरभ जोशी ने ट्राइसिटी के शिक्षकों से गैजेट-फ्री संडे के लिए अभिभावकों को प्रेरित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की पीटीएम में अभिभावकों तक यह संदेश पहुंचाया जाए ताकि बच्चे सप्ताह में एक दिन मोबाइल-टैबलेट से दूर रहकर माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताएं और रिश्तों की गर्माहट महसूस करें।
सेक्टर-10 के होटल माउंट व्यू में आयोजित अमर उजाला स्कूल एक्सीलेंस अवॉर्ड-2026 के मुख्य अतिथि मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि डिजिटल दौर में मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप ने जीवन आसान किया है, लेकिन एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवारों के बीच संवाद और अपनापन कम हुआ है।
पहले रविवार परिवार के साथ बैठने, बातचीत करने, पिकनिक जाने और एक-दूसरे को समय देने का दिन होता था। अब कई घरों में परिवार साथ होता है, लेकिन हर सदस्य अपनी स्क्रीन में व्यस्त रहता है।
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संस्कार स्क्रीन से नहीं, व्यवहार से मिलते हैं: मेयर ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार किताबों या मोबाइल स्क्रीन से नहीं, परिवार के सदस्यों के व्यवहार से आते हैं। रविवार को बच्चे माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताएंगे तो उन्हें पारिवारिक परंपराओं को समझने के साथ सम्मान, धैर्य और साझा करने की भावना सीखने का अवसर मिलेगा। परिवार साथ बैठकर भोजन कर सकता है, बोर्ड गेम खेल सकता है या पार्क में घूम सकता है। इससे एक-दूसरे के सुख-दुख और विचारों को समझने का मौका मिलेगा। परिवार के साथ बिताया गया यह समय बच्चों में आत्मीयता, जिम्मेदारी और रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता की भावना मजबूत करने में भी मदद करेगा।
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नगर निगम के मेयर सौरभ जोशी ने ट्राइसिटी के शिक्षकों से गैजेट-फ्री संडे के लिए अभिभावकों को प्रेरित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों की पीटीएम में अभिभावकों तक यह संदेश पहुंचाया जाए ताकि बच्चे सप्ताह में एक दिन मोबाइल-टैबलेट से दूर रहकर माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताएं और रिश्तों की गर्माहट महसूस करें।
सेक्टर-10 के होटल माउंट व्यू में आयोजित अमर उजाला स्कूल एक्सीलेंस अवॉर्ड-2026 के मुख्य अतिथि मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि डिजिटल दौर में मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप ने जीवन आसान किया है, लेकिन एक ही छत के नीचे रहने वाले परिवारों के बीच संवाद और अपनापन कम हुआ है।
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पहले रविवार परिवार के साथ बैठने, बातचीत करने, पिकनिक जाने और एक-दूसरे को समय देने का दिन होता था। अब कई घरों में परिवार साथ होता है, लेकिन हर सदस्य अपनी स्क्रीन में व्यस्त रहता है।
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संस्कार स्क्रीन से नहीं, व्यवहार से मिलते हैं: मेयर ने कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार किताबों या मोबाइल स्क्रीन से नहीं, परिवार के सदस्यों के व्यवहार से आते हैं। रविवार को बच्चे माता-पिता और दादा-दादी के साथ समय बिताएंगे तो उन्हें पारिवारिक परंपराओं को समझने के साथ सम्मान, धैर्य और साझा करने की भावना सीखने का अवसर मिलेगा। परिवार साथ बैठकर भोजन कर सकता है, बोर्ड गेम खेल सकता है या पार्क में घूम सकता है। इससे एक-दूसरे के सुख-दुख और विचारों को समझने का मौका मिलेगा। परिवार के साथ बिताया गया यह समय बच्चों में आत्मीयता, जिम्मेदारी और रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता की भावना मजबूत करने में भी मदद करेगा।