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हरियाणा में 9455 टीचर्स की भर्ती को हाईकोर्ट का बड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 12 May 2016 12:35 PM IST
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supreme court
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हरियाणा में अब तक की जेबीटी शिक्षकों की दो बड़ी भर्तियां उलझन में हैं। चौटाला साशनकाल की रद्द हुई भर्ती के 3206 शिक्षक जहां नौकरी बचाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं हुड्डा सरकार के वक्त चयनित 9455 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर फिर से हाईकोर्ट की रोक लग गई है। इन दोनों मामलों में बुधवार को अलग-अलग बेंच के समक्ष सुनवाई हुई।
चौटाला भर्ती पर बहस जारी है तो हुड्डा की भर्ती के परिणाम का समूचा रिकार्ड एक बार फिर से मंगवाया गया है।चौटाला भर्ती-हाईकोर्ट केजस्टिस के कानन ने भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाते हुए यह भर्ती रद्द कर दी थी। शिक्षकों को नौकरी से बाहर करने का निर्देश दिया था, लेकिन उन्हें दिए जा चुके वेतन की रिकवरी नहीं करने को कहा था। इस फैसले को शिक्षकों ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी तो चयन से वंचित उम्मीदवारों ने भी भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार रखने की मांग की थी।
डिवीजन बेंच न एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। इस मामले में संयुक्त निदेशक एलिमेंटरी एजुकेशन बुधवार को सुनवाई के दौरान पेश हुए और भर्ती से जुड़ा सारा रिकार्ड हाईकोर्ट को सौंपा। शिक्षकों के वकील ने दलील दी कि इन्हें नौकरी में बने हुए हैं और ऐसे में अब वह कहां जाएं। वह नौकरी के लिए आवेदन करने लायक भी नहीं रहे और भर्ती की शर्तें भी बदल चुकी हैं।
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साथ ही यह दलील भी दी कि उस वक्त स्टेट टीचर इलिजिब्लिटी टेस्ट भी नहीं था, जो अब अनिवार्य है। यह भी दलील दी कि चयन से वंचित उम्मीदवारों की उम्र सीमा भी निकल चुकी है, लिहाजा भर्ती रद्द करने का फैसला खारिज करके शिक्षकों की नौकरी बरकारर रखी जाए। अभी सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष रखना है, जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की डिवीजन बेंच ने वीरवार को भी बहस जारी रखने का निर्देश दिया है।
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चौटाला भर्ती पर बहस जारी है तो हुड्डा की भर्ती के परिणाम का समूचा रिकार्ड एक बार फिर से मंगवाया गया है।चौटाला भर्ती-हाईकोर्ट केजस्टिस के कानन ने भर्ती में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाते हुए यह भर्ती रद्द कर दी थी। शिक्षकों को नौकरी से बाहर करने का निर्देश दिया था, लेकिन उन्हें दिए जा चुके वेतन की रिकवरी नहीं करने को कहा था। इस फैसले को शिक्षकों ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी तो चयन से वंचित उम्मीदवारों ने भी भर्ती रद्द करने का फैसला बरकरार रखने की मांग की थी।
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डिवीजन बेंच न एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी थी। इस मामले में संयुक्त निदेशक एलिमेंटरी एजुकेशन बुधवार को सुनवाई के दौरान पेश हुए और भर्ती से जुड़ा सारा रिकार्ड हाईकोर्ट को सौंपा। शिक्षकों के वकील ने दलील दी कि इन्हें नौकरी में बने हुए हैं और ऐसे में अब वह कहां जाएं। वह नौकरी के लिए आवेदन करने लायक भी नहीं रहे और भर्ती की शर्तें भी बदल चुकी हैं।
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साथ ही यह दलील भी दी कि उस वक्त स्टेट टीचर इलिजिब्लिटी टेस्ट भी नहीं था, जो अब अनिवार्य है। यह भी दलील दी कि चयन से वंचित उम्मीदवारों की उम्र सीमा भी निकल चुकी है, लिहाजा भर्ती रद्द करने का फैसला खारिज करके शिक्षकों की नौकरी बरकारर रखी जाए। अभी सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष रखना है, जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस हरिंदर सिंह सिद्धू की डिवीजन बेंच ने वीरवार को भी बहस जारी रखने का निर्देश दिया है।
कुछ उम्मीदवारों ने लगाया अतिरिक्त अंक न देने का आरोप
11 साल से न्याय के लिए भटक रही है पीड़िता
- फोटो : Demo
हुड्डा भर्ती-सरकार ने 9455 जेबीटी शिक्षकों का चयन किया था। इस भर्ती में उच्चतर शिक्षा वालों को अतिरिक्त अंक देने का प्रावधान था, लेकिन जैसे ही मेरिट लिस्ट आई, कुछ उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें अतिरिक्त अंक नहीं दिए गए। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर पहले परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई थी और बाद में नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी थी।
परिणाम से जुड़ा रिकार्ड तलब किया गया था और सीएफएसएल से उन कंप्यूटरों की जांच कराई गई थी, जिनमें परिणाम तैयार करने की बात कही गई थी। पहले सीएफएसएल ने कहा था कि इन कंप्यूटरों में वह सॉफ्टवेयर नहीं है, जिस सॉफ्टवेयर में एचएसएससी परिणाम तैयार करने की बात कह रही है। इसके बाद एचएसएससी ने एक पैन ड्राइव भी हाईकोर्ट में पेश की और इसकी फॉरेंसिक जांच के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक सिब्बल की एकल बेंच ने भर्ती को सही पाते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
इससे नियुक्ति पत्र जारी करने का रास्ता साफ हो गया था, लेकिन इसी बीच एकल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई और याचियों के वकील जसबीर मोर ने जस्टिस महेश ग्रोवर की बेंच को बताया कहा गया कि परिणाम तैयार करने में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। बुधवार को डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी है, जिससे 9455 जेबीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला फिलहाल खटाई में पड़ गया है।
परिणाम से जुड़ा रिकार्ड तलब किया गया था और सीएफएसएल से उन कंप्यूटरों की जांच कराई गई थी, जिनमें परिणाम तैयार करने की बात कही गई थी। पहले सीएफएसएल ने कहा था कि इन कंप्यूटरों में वह सॉफ्टवेयर नहीं है, जिस सॉफ्टवेयर में एचएसएससी परिणाम तैयार करने की बात कह रही है। इसके बाद एचएसएससी ने एक पैन ड्राइव भी हाईकोर्ट में पेश की और इसकी फॉरेंसिक जांच के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक सिब्बल की एकल बेंच ने भर्ती को सही पाते हुए याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
इससे नियुक्ति पत्र जारी करने का रास्ता साफ हो गया था, लेकिन इसी बीच एकल बेंच के फैसले को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई और याचियों के वकील जसबीर मोर ने जस्टिस महेश ग्रोवर की बेंच को बताया कहा गया कि परिणाम तैयार करने में बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। बुधवार को डिवीजन बेंच ने एकल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी है, जिससे 9455 जेबीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी करने का मामला फिलहाल खटाई में पड़ गया है।