शिक्षक दिवस: गुरु की महिमा अपार, कोरोना काल में भी नहीं छोड़ा साथ, शिष्यों का किया बेड़ा पार
कोरोना महामारी के बाद शिक्षकों का काम दो से तीन गुना बढ़ गया है। अभी शिक्षक स्कूल में विद्यार्थियों की ऑफलाइन कक्षा लेने के बाद शाम को घर में ऑनलाइन कक्षाएं भी आयोजित करते हैं। बहुत बार बच्चे रात को दस-ग्यारह बजे भी किसी सवाल में दिक्कत होने पर फोन कर लेते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बच्चे की सबसे पहली शिक्षक मां होती है। लेकिन जैसे ही बच्चा घर से बाहर निकलकर स्कूल पहुंचता है तो उसके बाद भविष्य गढ़ने का जिम्मा शिक्षकों के हाथ में आता है। वर्षों से तमाम परेशानियों से गुजर शिक्षक ज्ञान बांटते आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनका संघर्ष कुछ बड़ा रहा। कोरोना ने शिक्षा के द्वार पूरी तरह बंद करने की कोशिश की, लेकिन इन्हीं गुरुओं ने रास्ता खोज निकाला। खुद ऑनलाइन पढ़ाने का प्रशिक्षण लिया और तकनीक सीखी। अब विद्यार्थियों को ऑनलाइन ज्ञान बांट रहे हैं। इसी ऑनलाइन शिक्षा के बलबूते कई विद्यार्थियों का भविष्य रोशन किया। उन्हें नौकरी के जरिए बेहतर पैकेज मिले। शिक्षक दिवस के अवसर पर पढ़िए ऐसे शिक्षकों के संघर्ष की कहानियां-
मलोया के कृष्ण राठी झुग्गी में रहने वाले बच्चों को दे रहे मुफ्त शिक्षा
कोरोना काल में लगभग पूरे वर्ष जीएमएचएस मलोया आरसी-दो के शिक्षक कृष्ण राठी ने बापूधाम में कोविड ड्यूटी दी। इस दौरान वे शाम के समय कोविड ड्यूटी से लौटकर ऑनलाइन स्कूल के बच्चों की कक्षाएं लेते थे। इसके साथ ही बारदाना कॉलोनी-26 और मनीमाजरा में झुग्गियों में वहां के बच्चों को भी पढ़ाते हैं। उनके कागजात पूरे होने के बाद उन्हें नजदीकी स्कूल में दाखिला दिलवाते हैं। कृष्ण ने बताया कि दो महीने पहले ही उन्हें बापूधाम कॉलोनी में कोविड ड्यूटी से राहत मिली है, क्योंकि विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोले जाने थे और कोरोना के हालात में भी सुधार था। इससे पहले पूरे वर्ष उन्होंने कंटेनमेंट जोन में ड्यूटी दी। उनके स्कूल में ज्यादातर बच्चे कॉलोनी के हैं तो उनके माता-पिता के शाम को घर आने पर ही उन्हें स्मार्टफोन मिलता है। इसलिए वे शाम से लेकर रात आठ बजे तक ऑनलाइन कक्षाएं लगाते थे। अभी शाम को चार से छह बजे तक उन्होंने झुग्गियों के बच्चों को भी पढ़ाना शुरू कर दिया है, क्योंकि मनीमाजरा के क्षेत्र में कई बच्चे ऐसे हैं जो कागजात नहीं होने के कारण अभी स्कूल में दाखिला नहीं ले पाए हैं। दस्तावेज पूरे होते ही बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलवा देते हैं।
गुरुजी ने सिर्फ पढ़ाया ही नहीं, छात्रों का भविष्य भी किया रोशन
पीयू में एक गुरुजी ऐसे हैं जिन्होंने विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया ही नहीं बल्कि उनका कॅरिअर भी संवारा। इसके अलावा लोगों का तनाव दूर करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी इस मेहनत को हर कोई सलाम करता है। गुरुजी का नाम है डॉ. रोशन लाल। जैसा नाम वैसा ही काम। आज उन्हीं की मेहनत से छात्रों का भविष्य रोशन हो गया। कोरोना के समय में पहले खुद को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए तैयार किया। प्रशिक्षण लिया और फिर परास्नातक के विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया। चार से पांच विद्यार्थी नेट उत्तीर्ण हो गए। एक सरकारी सेवा में हैं। कोरोना के पहले ही चरण में लोग इतने तनाव में आ गए। पुलिस के पास तमाम फोन आने लगे। डीजीपी चंडीगढ़ कार्यालय ने लोगों का तनाव दूर करने के लिए डॉ. रोशन लाल का चयन किया और उन्होंने मनोविज्ञान के जरिए लोगों को राहत दी। चंडीगढ़ के अलावा उनके पास हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक के लोगों ने फोन किया जो कोरोना के कारण तनाव में थे। उनकी सेवाओं की बदौलत ही डॉ. रोशन लाल को स्वतंत्रता दिवस पर विशेष सम्मान दिया गया।
सेवानिवृत्त होने के बाद भी सुनीता कपूर कर रहीं बच्चों की काउंसलिंग
मार्च में सेवानिवृत्त हुईं सुनीता कपूर अभी भी शहर के सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों की काउंसलिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अभी भी उनके पास अलग अलग स्कूल के रोजाना 15-20 विद्यार्थियों के काउंसलिंग से संबंधित फोन आते हैं। बच्चों की काउंसलिंग करना उनका जुनून है, इसलिए वे किसी भी बच्चे को अब भी मना नहीं करती हैं। फिलहाल वे बाल निकेतन स्कूल-37डी बतौर प्राचार्या भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। उन्होंने कहा कि पेशे से वह एक शिक्षक ही हैं। इसलिए उन्हें लगता है कि बच्चा चाहे अपने स्कूल का हो या अन्य का, उनकी परेशानी का समाधान करना जरूरी है। अभी विद्यार्थी दाखिला संबंधी काफी प्रश्न पूछते हैं। मसलन ग्यारहवीं में कौन से विषयों का चुनाव करें। बारहवीं के बाद कॉलेज शिक्षा और भविष्य में नौकरी के लिए किस क्षेत्र में संभावनाएं है। उनकी रूचि के अनुसार आगे की पढ़ाई के लिए कौन से कोर्स उपयुक्त रहेंगे। सुनीता ने बताया कि कई बार होता है कि काम ज्यादा होने के कारण वे दिन में फोन नहीं उठा पाती हैं। लेकिन शाम को विद्यार्थियों की काउंसलिंग करती हैं। जरूरत पड़ने पर बच्चों के अभिभावकों से भी बात करती हैं, ताकि उनका तनाव कम किया जा सके।
डॉ. कुलविंदर ने निभाया गुरु का फर्ज जरूरतमंद छात्रों को किताबें-नोट्स दिए
पंजाब यूनिवर्सिटी के नामचीन विभाग यूबीएस में कार्यरत डॉ. कुलविंदर सिंह को जरूरतमंद छात्रों की मदद के लिए जाना जाता है। उन्होंने यूबीएस के उन विद्यार्थियों को किताबें व नोट्स पहुंचाएं जो कोरोना के कारण घरों से नहीं निकल रहे थे। यही नहीं जिन विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई में दिक्कतें आ रही थीं, उनका भी वह साथ-साथ निदान करते रहे। ऑनलाइन पढ़ाने के उन्होंने नए नए तरीके इजाद किए। सोशल मीडिया का पूरा सहारा लिया, जो छात्रों को काफी भाया। उन्होंने कई शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन वेबिनार का शुभारंभ भी कराया। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान परीक्षाएं होनी थीं। उससे पहले ही छात्रों ने घरों से निकलना कम कर दिया। एक तरफ पढ़ाई की चिंता थी तो दूसरी ओर कोरोना से बचाव की। ऐसे में उन्होंने पांच-छह विद्यार्थियों को किताबें घर तक पहुंचाईं। साथ ही नोट्स भी उपलब्ध कराए। उनके पढ़ाए गए कुछ विद्यार्थियों को अच्छी कंपनियों में नौकरियां मिली हैं। डॉ. कुलविंदर कॉलोनियों में रहने वाले बच्चों को भी किताबें मुहैया करा रहे हैं। साथ ही परिवारों की आर्थिक भी मदद कर रहे हैं।
कोरोना काल, शिक्षकों का दो से तीन गुना बढ़ा काम : अमन
बच्चों की पढ़ाई हो आसान, हर हफ्ते यूट्यूब पर डालती हैं वीडियो
जीजीएमएसएसएस-18 की गणित की शिक्षिका गुरप्रीत कौर को शिक्षा विभाग ने छठी से आठवीं कक्षा तक की सेंट्रलाइज्ड गणित शिक्षण की कोऑर्डिनेटर बनाया हुआ है। गुरप्रीत ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन ने शिक्षण को रुचिपूर्ण भी बना दिया है। बच्चों को पढ़ाने के लिए यूट्यूब के लिए वीडियो बनाना, प्लेलिस्ट तैयार करना, अन्य शिक्षकों के साथ मिलकर उनके साथ भी टीम में वीडियो तैयार करना आदि सीखा। इसके साथ ही हर बारी कोशिश रहती है कि विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई में गणित को आसान बनाया जाए। गुरप्रीत ने बताया कि विभाग की ओर से जारी निर्देश के अनुसार हम हर गुरुवार को गणित विषय की वीडियो का सभी स्कूलों के ग्रुप में लिंक अपलोड करते हैं। इसके लिए बुधवार रात को हम प्लेलिस्ट तैयार करते हैं और तैयार वीडियो को अपलोड करते हैं। शिक्षकों की ओर से बनाई वीडियो को पहले वह अपने स्तर पर जांच करती हैं। इसके साथ ही कक्षाएं ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यम में आयोजित की जा रही है। लॉकडाउन के बाद विद्यार्थियों को सहूलियत दी है कि वो किसी भी समय फोन कर हमें सवाल पूछ सकते हैं, क्योंकि इस दौर में शिक्षक और विद्यार्थी साथ में बैठकर पढ़ाई नहीं कर पाते, इसलिए अधिक से अधिक संवाद जरूरी है। ब्यूरो
शिक्षकों के प्रयास से नहीं रुकी बच्चों की पढ़ाई
ऑनलाइन शिक्षा के दौर में कॉलोनी के बच्चे पढ़ाई से जुड़े रह सकें, इसके लिए जीएमएचएस-आरसी दो धनास के शिक्षकों ने एक सामूहिक प्रयास किया। उन्होंने स्कूल के बाहर इंटरनेट के लिए एक राउटर लगाया, ताकि कॉलोनी के विद्यार्थी शाम के समय स्कूल परिसर के ग्राउंड में आकर ऑनलाइन कक्षाएं लगा सकें। स्कूल प्रमुख रविंदर कौर ने बताया कि पिछले वर्ष मार्च के बाद जब ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुईं, तब स्कूल के बहुत से बच्चे सुविधाओं के अभाव में ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगवा पा रहे थे। इस दौरान पहले डाटा डोनेशन बैंक बनवाया। इसके तहत शिक्षक बारी बारी से जिस विद्यार्थी का रिचार्ज खत्म होता था, उनका रिचार्ज करवा देते थे। कॉलोनी के विद्यार्थियों को घर में नेटवर्क कमजोर होने के साथ जगह कम और लोग ज्यादा होने पर भी पढ़ने में दिक्कत आती थी। इसके लिए एनजीओ आदि की मदद लेकर स्कूल के बाहर राउटर लगवाया और उसका पासवर्ड विद्यार्थियों को दे दिया। इससे विद्यार्थी शाम के समय स्कूल परिसर में ही आकर ऑनलाइन कक्षा लगा लेते थे। राउटर में सिर्फ उन्हीं वेबसाइट और एप को चलाने की अनुमति दी थी।