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Haryana: हरियाणा के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के 30 से 70 फीसदी पद खाली, 10 सालों से अटकी हैं भर्तियां

Sat, 23 Nov 2024 03:01 PM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 23 Nov 2024 03:01 PM IST
सार

पिछले करीब 10 सालों से शिक्षकों की भर्ती न होने और सेवानिवृत्त होने वालों की संख्या बढ़ने से कई विभाग नियमित शिक्षक रहित होने के कगार पर हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) में पांच-छह विभाग ऐसे हैं, जिनमें केवल एक-एक नियमित शिक्षक ही बचा है।

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teacher posts are vacant in Haryana universities, recruitment is stuck for 10 years
शिक्षकों के पद खाली - फोटो : प्रतीकात्मक

विस्तार

हरियाणा के सरकारी स्कूलों और काॅलेजों की तरह ही राज्य के विश्वविद्यालयों में भी शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। कई विश्वविद्यालयों में तो 50 से लेकर 80 फीसदी तक पद खाली हैं। 
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स्वीकृत पदों के मुकाबले पिछले दस साल से भर्तियां न होने से सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की किल्लत बनी हुई है। इससे न केवल विद्यार्थियों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है, बल्कि तैनात शिक्षकों पर भी लगातार अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। एक बार फिर प्रदेश के तमाम 21 विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघ पक्की भर्ती की मांग को लेकर लामबंद होने लगे हैं।
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हरियाणा के कुल 21 विश्वविद्यालयों में तकनीकी विवि भी शामिल हैं। प्रदेश का एक भी विश्वविद्यालय ऐसा नहीं है, जहां पर स्वीकृत सभी पदों को भरा गया है। अधिकतर विवि में अतिथियों और एक्सटेंशन लेक्चरर से काम चलाया जा रहा है। प्रदेश के सबसे पुराने दो विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र विवि और महर्षि दयानंद विवि तक में 200-200 के करीब शिक्षकों के पद खाली हैं।
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दरअसल, विवि में भर्तियों में भाई-भतीजावाद और क्षेत्रवाद के आरोप लगते रहे हैं। कई विवि की भर्तियां अदालतों में चैलेंज है। इसलिए सरकार की ओर से सभी विवि में भर्तियों पर रोक लगाई गई है। अक्तूबर माह में उच्चतर शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए थे कि आगामी आदेशों तक किसी भी विवि में भर्ती न की जाए।

कोर्स बढ़ते गए और शिक्षक घटते गए

शिक्षक एसोसिएशन का तर्क है कि पिछले 10 साल में 2014 के बाद सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की संख्या घटी है, जबकि कोर्स बढ़े हैं। बीए स्तर के कोर्सों में जहां सीटों की संख्या दो गुणा की गई है, जबकि कई कोर्स पीजी में शुरू किए गए हैं। इनके अलावा नए कोर्स शुरू किए गए हैं, जबकि शिक्षक नए आने की बजाए सेवानिवृत्त होते जा रहे हैं। शिक्षक एसोसिएशन की मांग है कि विद्यार्थियों और कोर्सों की संख्या को देखते हुए शिक्षकों के पद स्वीकृत किए जाएं, साथ ही जल्द ही भर्ती प्रक्रिया को शुरू किया जाए।

पांच विभागों में एक-एक ही नियमित शिक्षक

पिछले करीब 10 सालों से शिक्षकों की भर्ती न होने और सेवानिवृत्त होने वालों की संख्या बढ़ने से कई विभाग नियमित शिक्षक रहित होने के कगार पर हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (कुवि) में पांच-छह विभाग ऐसे हैं, जिनमें केवल एक-एक नियमित शिक्षक ही बचा है। वर्तमान में कुवि में शिक्षकों के 200 से अधिक पद खाली पड़े हैं। कुवि में शिक्षकों के करीब 550 स्वीकृत पद हैं। साल 2012 में 62 शिक्षकों की भर्ती हुई है।

1500 अनुबंधित शिक्षकों से चलाया जा रहा काम

विश्वविद्यालयों में पक्की भर्ती न होने से पढ़ाई जारी रखने के लिए 1500 अनुबंधित अस्सिटेंट प्रोफेसर तैनात किए हुए हैं। हालांकि, ये शिक्षक भी लगातार स्थायी करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने उनको आश्वासन भी दिया था कि उनके लिए कुछ सकारात्मक सोचा जाएगा। अनुबंधित शिक्षक इन पदों को भरा मानकर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं।

कहां, कितने शिक्षक पद खाली

शिक्षक संस्थान                                       स्वीकृत पद         खाली पद      प्रतिशत
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक                350                 150           42
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र                       550                 200           36
गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार                  395                  200          50
दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल 389      245          63
  
चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद            100                   70          70
नोट : अन्य शिक्षक संस्थानों में भी शिक्षकों के पद खाली हैं।

पिछले 10 साल में विश्वविद्यालयों में भर्तियां होने के बजाए बार-बार रोक लगाने से ये हालात बने हैं। सरकार की ओर से बार-बार भर्ती रोकने के लिए पत्र जारी किया जाता है, न की करने के लिए। अगर किसी विवि में लगातार भर्ती होती है तो वहां पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन भर्ती प्रक्रिया नहीं रोकनी चाहिए। शिक्षक संघ राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मांग करता है कि स्वीकृत पदों की संख्या भी बढ़ाई जाए और खाली पदों को जल्द भरा जाए। - डाॅ. अजय कुमार, प्रधान, शिक्षक संघ, छोटूराम विवि, सोनीपत
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