टैक्सी सर्विस एक्ट में बदलाव, यात्रियों को मिलेगा फायदा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेडियो टैक्सी की तरह एप कैब में भी अब आपको पूरी सुरक्षा मिलेगी। साथ ही किराया भी मनमर्जी का नहीं चुकाना होगा। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) दोनों तरह की टैक्सियों के लिए समान मानक बनाने जा रही है।
एप कैब को भी रेडियो टैक्सी की तरह नियमों के दायरे में लाया जा रहा है। दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ भी अपने टैक्सी सर्विस संबंधी एक्ट में बदलाव करने जा रहा है।
एसटीए इसका प्रपोजल 15 अक्तूबर तक प्रशासन के पास भेज देगा। दिसंबर तक शहर में टैक्सी नए नियमों के तहत ही चलने लगेंगी। शहर में आरबीटीएस, मेगा कैब और फेब कैब अपनी सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं।
तीनों कंपनियां एसटीए से फुली अथॉराइज्ड हैं। इनका किराया भी प्रति किलोमीटर 23 रुपये प्रशासन ने तय कर रखा है। प्रशासन के पास इनका पूरा रिकॉर्ड रहता है।
किराया और सुरक्षा संबंधी नियम प्रशासन तय करेगा
एप कैब सर्विस में टैक्सी की जाती है हायर: एप कंपनियां मांग के हिसाब से लोकल लेवल टैक्सी हायर कर लेती हैं। कई बार ड्राइवर तक की पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होती। एसटीए के पास भी इनका रिकॉर्ड नहीं रहता। एक दूसरे से कंपटीशन की होड़ में नियमों को ताक पर रख मनमर्जी से किराया वसूला जाता है।
जिससे सुरक्षा कहीं पीछे छूट जाती है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ओला, उबर, मेरू और विंग्स ट्रैवल्स जैसी कंपनियां शहर में एप कैब की सेवा दे रही हैं। उबर कैब में हुई घटना के बाद पहले दिल्ली ने एक्ट में संशोधन किया और अब चंडीगढ़ ऐसा करने जा रहा है।
यह चीजें होंगी एक समान
पब्लिक सेफ्टी, परमिट सिस्टम, किराया मीटर, किराया स्ट्रक्चर्ड
राजीव तिवारी, एडीशनल सेक्रेटरी, एसटीए, चंडीगढ़ ने बताया कि दिल्ली की तर्ज पर एक्ट में संशोधन किया जा रहा है। रेडियो टैक्सी और एप कैब समान नियमों के तहत चलेंगी। किराया और सुरक्षा संबंधी नियम प्रशासन तय करेगा। सिक्योरिटी फीचर्स की वजह से ऐसा किया जा रहा है।