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फैसलाः तरनतारन धमाके की जांच एनआईए के हवाले, दोषियों के पाक और एसएफजे से जुड़े हैं तार

Sat, 21 Sep 2019 10:04 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 21 Sep 2019 10:04 AM IST
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Taran taran blast case handed over to NIA, national investigation agency
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी - फोटो : फाइल फोटो
पंजाब के तरनतारन में गत पांच सितम्बर को हुए धमाके का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के हवाले करने की कैप्टन सरकार की सिफारिश केंद्र सरकार ने स्वीकार कर ली है। इस मामले का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंध होने और पाकिस्तान आधारित सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) से तार जुड़े  होने के मद्देनजऱ ऐसा किया गया है।
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सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस संबंधी आधिकारिक सूचना मुख्य सचिव और डीजीपी पंजाब को प्राप्त हो गई है। तरनतारन जिले के गांव पंडोरी गोला के बाहरी खाली प्लाट में हुए शक्तिशाली बम धमाके के बारे में  एक केस (एफआईआर नंबर 0280), धारा 304 आईपीसी और एक्सप्लोसिव सब्स्टांसिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के अधीन दर्ज किया गया था।
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इस धमाके में 2 व्यक्ति मारे गए थे और एक अन्य ज़ख्मी हो गया था। यह धमाका उस समय हुआ था जब दो व्यक्ति बारूद की खेप को निकालने के लिए एक गड्ढा खोद रहे थे। पंजाब पुलिस ने इस मामले में पाकिस्तान आधारित गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ्तार किया है जिनसे पूछताछ के बाद गहरी साजिश  और इस गिरोह के हमलों की बात सामने आई, जिनमें 2016 में किया गया हमला भी शामिल है।
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देसी बमों से हमले की रची गई साजिश

मुख्य साजिशकर्ता बिक्रमजीत सिंह उर्फ ग्रंथी और इस गिरोह के 7 अन्य सदस्य अभी तक भगोड़े हैं। ग्रंथी के बारे में माना जा रहा है कि वह आस्ट्रिया में है। पेशे से  ग्रंथी और दमदमी टकसाल का पैरोकार बिक्रम पाठी के तौर पर काम करता है। वह अत्यंत कट्टर सोच वाला व्यक्ति है। उसने मशहूर राजनीतिक शख्सियतों और सामाजिक -धार्मिक संस्थाओं, स्थानीय विरोधी राजनीतिज्ञों, हिंदू नेताओं और सिख प्रचारकों को देसी बमों की मदद से निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आईईडी के इस माहिर ने स्थानीय तौर पर बने बहुउद्देश्यीय बमों के साथ पुलिस मुलाजिमों पर हमला करने की भी योजना बनाई।

विदेशों में छिपे हैं बाकी आरोपी
भगोड़े दूसरे व्यक्तियों की पहचान गुरप्रीत सिंह (कैलिफोर्निया, अमरीका आधारित), गुरविन्दर सिंह प्रिंस (कैलिफोर्निया, अमरीका), सोढी सिंह (इस समय अर्मीनिया में), अरविन्दर सिंह हनी, कुलदीप सिंह और रणजीत सिंह बब्बू 3 जून, 2016 को अमृतसर के एक शराब के ठेके पर हमला करने के बाद अमरीका फऱार हो गए थे।

अब तक इनकी हुई है गिरफ्तारी
पुलिस की तरफ से अब तक पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान हरजीत सिंह, मनप्रीत सिंह मान, चन्नदीप सिंह खालसा उर्फ गब्बर सिंह, मलकीत सिंह उर्फ शेर सिंह उर्फ शेरा, मनदीप सिंह उर्फ मस्सा सिंह, अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत, अमरजीत सिंह उर्फ अमर और अस्पताल में उपचाराधीन गुरजंट सिंह के तौर पर की गई है।

पाक और एसएफजे के रिश्ते

पुलिस के  मुताबिक, जांच से यह पता लगा है कि उक्त गिरोह के सदस्यों के पाकिस्तान और एसएफजे से  गहरे रिश्ते थे। चन्नदीप सिंह उर्फ गब्बर सिंह पाकिस्तान के उस्मान के लगातार संपर्क में बताया जाता है जिसे वह साल 2018 में फेसबुक के जरिए मिला था। उस्मान चन्नदीप को खालिस्तान और भारत सरकार की तरफ से कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने सम्बन्धी संदेश भेजता रहता था और चन्नदीप सिंह को कश्मीरी जिहादियों के साथ मिलकर एक अलग मुल्क खालिस्तान स्थापित करने के लिए प्रेरित करता था। चन्नदीप की संपर्क सूची में से कई पाकिस्तानी नंबर भी मिले हैं।

कई जगह किए देसी बमों से हमले
गुरजंट सिंह और बिक्रमजीत सिंह विक्की गिल ने नवंबर /दिसंबर, 2016 के दौरान तरनतारन में 2 देसी बम फेंके थे। यह बम फटे नहीं और इस घटना में कोई भी ज़ख्मी नहीं हुआ। गुरजंट सिंह, हरजीत सिंह और विक्की गिल ने 3 जनवरी, 2019 को तरनतारन के गांव बचेड़े में नये चुने गए सरपंच गुरजंट सिंह के घर पर चार देसी बम फेंके जिसके कारण 3 व्यक्ति ज़ख्मी हो गए। बिक्रम सिंह विक्की गिल और गुरजंट सिंह ने 25 मई, 2016 को रईया-ब्यास के नज़दीक एक सुनसान संपर्क सड़क पर भी देसी बम चलाया।
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