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मानवाधिकार आयोग ने मांगा पीड़ित का पक्ष
राजेश ढल्ल/अमर उजाला
Updated Mon, 20 Jan 2014 04:19 PM IST
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आईएएस तन्वी गर्ग और एक ज्वैलर से जुड़ा विवाद समझौता होने के बाद एक बार फिर से उठ गया है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हस्ताक्षेप करते हुए पीड़ित आभूषण विक्रेता विक्रांत को अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
आयोग की ओर से इसकी जानकारी शिकायतकर्ता पकंज चांदगोठिया को दी गई है। मामला पिछले साल अप्रैल का है।
इस मामले में पुलिस विभाग अपना जवाब पहले ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दे चुका है। पुलिस की ओर से आयोग को बताया गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है।
इस मामले की शिकायत आयोग को करने वाले वकील पंकज चांदगोठिया ने बताया कि उन्हें भी यह जानकारी मिली है कि आयोग ने पीड़ित का पक्ष मांगा है। आयोग की वेबसाइट पर स्टेटस चैक करने पर उन्हें यह जानकारी मिली।
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क्या था मामला
यह मामला पिछले साल 17 अप्रैल का है। सेक्टर-44 निवासी ज्वैलर विक्रांत कुमार को तत्कालीन एसडीएम (ईस्ट) तन्वी गर्ग की कार को साइड न देने की शिकायत मिलने पर पकड़ा गया था।
पुलिस ने 17 अप्रैल की रात करीब 8 बजे विक्रांत को उसके घर से उठाया था। उसे अगले दिन दोपहर 3:30 बजे तत्कालीन एसडीएम (ईस्ट) की कोर्ट में पेश किया गया।
वकील चांदगोठिया के अनुसार विक्रांत को पहले अवैध तौर पर पूरी रात थाने में हिरासत में रखा गया। उसके बाद उस पर धारा 107-151 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इस मामले में गर्ग की सरकारी गाड़ी के चालक की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। बाद में विवाद बढ़ने पर कार चालक और विक्रांत के बीच समझौता करवा दिया गया था।
इसके बाद विक्रांत पर दर्ज मामला वापस ले लिया गया था और उसकी जब्त कार भी रिलीज कर दी गई थी। पिछले साल 23 जुलाई को इस मामले की शिकायत पंकज चांदगोठिया ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी।
यह मामला विक्रांत को 20 से 22 घंटे अवैध तौर पर हिरासत में रखने का था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस विभाग से डिटेल रिपोर्ट मांगी थी न कि उनकी राय। आयोग का समझौते से कोई लेना-देना नहीं होता।
-पंकज चांदगोठिया, वकील और मामले के शिकायतकर्ता
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आयोग की ओर से इसकी जानकारी शिकायतकर्ता पकंज चांदगोठिया को दी गई है। मामला पिछले साल अप्रैल का है।
इस मामले में पुलिस विभाग अपना जवाब पहले ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दे चुका है। पुलिस की ओर से आयोग को बताया गया कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है।
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इस मामले की शिकायत आयोग को करने वाले वकील पंकज चांदगोठिया ने बताया कि उन्हें भी यह जानकारी मिली है कि आयोग ने पीड़ित का पक्ष मांगा है। आयोग की वेबसाइट पर स्टेटस चैक करने पर उन्हें यह जानकारी मिली।
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क्या था मामला
यह मामला पिछले साल 17 अप्रैल का है। सेक्टर-44 निवासी ज्वैलर विक्रांत कुमार को तत्कालीन एसडीएम (ईस्ट) तन्वी गर्ग की कार को साइड न देने की शिकायत मिलने पर पकड़ा गया था।
पुलिस ने 17 अप्रैल की रात करीब 8 बजे विक्रांत को उसके घर से उठाया था। उसे अगले दिन दोपहर 3:30 बजे तत्कालीन एसडीएम (ईस्ट) की कोर्ट में पेश किया गया।
वकील चांदगोठिया के अनुसार विक्रांत को पहले अवैध तौर पर पूरी रात थाने में हिरासत में रखा गया। उसके बाद उस पर धारा 107-151 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इस मामले में गर्ग की सरकारी गाड़ी के चालक की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। बाद में विवाद बढ़ने पर कार चालक और विक्रांत के बीच समझौता करवा दिया गया था।
इसके बाद विक्रांत पर दर्ज मामला वापस ले लिया गया था और उसकी जब्त कार भी रिलीज कर दी गई थी। पिछले साल 23 जुलाई को इस मामले की शिकायत पंकज चांदगोठिया ने मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से की थी।
यह मामला विक्रांत को 20 से 22 घंटे अवैध तौर पर हिरासत में रखने का था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस विभाग से डिटेल रिपोर्ट मांगी थी न कि उनकी राय। आयोग का समझौते से कोई लेना-देना नहीं होता।
-पंकज चांदगोठिया, वकील और मामले के शिकायतकर्ता