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टैगोर थिएटर में ‘...लो फिर बसंत आई’नाटक का मंचन
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Jul 2016 09:45 AM IST
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taigore theatre
- फोटो : amar ujala
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टैगोर थिएटर में अदाकार मंच मोहाली व पंजाब संगीत नाटक अकादमी की तरफ से थिएटर फॉर पीस फेस्टिवल हमसाया के तहत सोमवार को ‘...लो फिर बसंत आई ’ नाटक का मंचन हुआ। नाटक में दिखाया गया कि देश के बंटवारे से पहले बंसत का त्यौहार मिल जुल कर मनाया जाता था।
बंसत वाले दिन खूब पंतगबाजी हुआ करती थी। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में पिछले वर्षें से वहां की रोक थाम क मेटी की ओर से इस पर रोक लगा दी गई है। नाटक मे एक मोहल्ला दिखाई देता है जहां पर एक बुजुर्ग अब भी पतंगें बनाता है, जबकि पतंग बेचने पर रोक चल रही है।
अब हालत यह है इस बुजुर्ग के परिवार को खाने के लाले पड़ गए हैं। बुजुर्ग से उसकी बहू कहती है कि अब तो पतंगें बनना बंद करो। यह अब बिकती भी नही और इसे बनाने पर बैन भी है। इसे छोड़कर और कोई काम क्यों नही कर लेते। वह कहती है कि आस-पास के मोहल्ले वालों ने भी अब यह काम छोड़कर ठेला चलना शुरू कर दिया है।
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आप भी इसी तरह का काम धंधा कर लो। बुजुर्ग के पोते-पोती भी होते है जो पेंटिंग और संगीत से लगाव रखते है, लेकिन पाबंदी के कारण वह इस शौक को पूरा नही कर पाते। नाटक के अंत मे दिखाया जाता है कि लाख समझाने पर बुजुर्ग एक दिन फिर से पंतग बनाता है, पुलिस को पता चल जाता है और वह उसे गिरफ्तार करके ले जाती है।
बुजुर्ग जाते-जाते कह जाता है घबराओ मत जब मैं वापिस लौट कर आऊंगा तो ऐसे दिन नही रहेंगे। बसंत फिर से लौट कर आएगा और उसी तहर हम सब फिर से खुशियंा मनाएंगे।
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बंसत वाले दिन खूब पंतगबाजी हुआ करती थी। बंटवारे के बाद पाकिस्तान में पिछले वर्षें से वहां की रोक थाम क मेटी की ओर से इस पर रोक लगा दी गई है। नाटक मे एक मोहल्ला दिखाई देता है जहां पर एक बुजुर्ग अब भी पतंगें बनाता है, जबकि पतंग बेचने पर रोक चल रही है।
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अब हालत यह है इस बुजुर्ग के परिवार को खाने के लाले पड़ गए हैं। बुजुर्ग से उसकी बहू कहती है कि अब तो पतंगें बनना बंद करो। यह अब बिकती भी नही और इसे बनाने पर बैन भी है। इसे छोड़कर और कोई काम क्यों नही कर लेते। वह कहती है कि आस-पास के मोहल्ले वालों ने भी अब यह काम छोड़कर ठेला चलना शुरू कर दिया है।
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आप भी इसी तरह का काम धंधा कर लो। बुजुर्ग के पोते-पोती भी होते है जो पेंटिंग और संगीत से लगाव रखते है, लेकिन पाबंदी के कारण वह इस शौक को पूरा नही कर पाते। नाटक के अंत मे दिखाया जाता है कि लाख समझाने पर बुजुर्ग एक दिन फिर से पंतग बनाता है, पुलिस को पता चल जाता है और वह उसे गिरफ्तार करके ले जाती है।
बुजुर्ग जाते-जाते कह जाता है घबराओ मत जब मैं वापिस लौट कर आऊंगा तो ऐसे दिन नही रहेंगे। बसंत फिर से लौट कर आएगा और उसी तहर हम सब फिर से खुशियंा मनाएंगे।