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एक शादी के चक्कर में बेलने पड़े कितने पापड़, देखिए 'स्यापा ब्याह दा'
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Apr 2017 09:32 AM IST
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'स्यापा ब्याह दा' में लगे ठहाके
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में मंचित नाटक स्यापा ब्याह दा ने सबका दिल जीत लिया। श्याम जुनेजा द्वारा लिखे गए इस नाटक को निर्देशित किया डा, डीके अरोड़ा ने। चंडीगढ़ आर्ट्स थिएटर द्वारा मंचित इस नाटक की कहानी एक परिवार के इर्द गिर्द घूमती रहती है। इसमें दो लड़के (गौरव और विजय) हैं।
यह वकील का परिवार है, एक ऐसा वकील जो एकदम भुलक्कड़ है। इस नाटक की शुरुआत होती है परिवार के छोटे लड़के गौरव की कविताओं से। गौरव खुद को बड़ा कवि समझता है। वह नौकर के संग मिलकर शादी की योजना बनाता रहता है। वकील साहब (डा. डीके अरोड़ा) के परिवार में इंट्री होती है एक लड़की ज्योति की। गौरव ज्योति को अलग अलग प्रकार से रिझाने की कोशिश करने लगता है।
वह चाहता है कि उसकी शादी ज्योति के साथ हो जाए। इस बीच गौरव के बड़े भाई विजय कई इंट्री होती है। विजय और ज्योति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं और दोनों शादी करना चाहते हैं। दोनों भाइयों के बीच एक लड़की के साथ शादी करने की होड़ में की जाने वाली हरकतें कामेडी पैदा करती है। अंत में विजय की शादी ज्योति के साथ हो जाती है। इस नाटक में ज्योति, प्रीतपाल, डा. डीके अरोड़ा, कविता ने अहम भूमिका निभाई।
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यह वकील का परिवार है, एक ऐसा वकील जो एकदम भुलक्कड़ है। इस नाटक की शुरुआत होती है परिवार के छोटे लड़के गौरव की कविताओं से। गौरव खुद को बड़ा कवि समझता है। वह नौकर के संग मिलकर शादी की योजना बनाता रहता है। वकील साहब (डा. डीके अरोड़ा) के परिवार में इंट्री होती है एक लड़की ज्योति की। गौरव ज्योति को अलग अलग प्रकार से रिझाने की कोशिश करने लगता है।
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वह चाहता है कि उसकी शादी ज्योति के साथ हो जाए। इस बीच गौरव के बड़े भाई विजय कई इंट्री होती है। विजय और ज्योति एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं और दोनों शादी करना चाहते हैं। दोनों भाइयों के बीच एक लड़की के साथ शादी करने की होड़ में की जाने वाली हरकतें कामेडी पैदा करती है। अंत में विजय की शादी ज्योति के साथ हो जाती है। इस नाटक में ज्योति, प्रीतपाल, डा. डीके अरोड़ा, कविता ने अहम भूमिका निभाई।
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